Defence (रक्षा)

Agray ASW SWC: भारतीय नौसेना, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और आत्मनिर्भर भारत

Agray ASW SWC: भारतीय नौसेना, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और आत्मनिर्भर भारत

चर्चा में क्यों?

30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (Garden Reach Shipbuilders & Engineers) द्वारा निर्मित आठ एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट्स (Anti‑Submarine Warfare Shallow Water Crafts - ASW SWCs) की श्रृंखला में चौथा पोत अग्रय (Agray) प्राप्त हुआ। यह जहाज तत्कालीन आईएनएस अग्रय (INS Agray) की विरासत को आगे बढ़ाता है और आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) पहल के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण में प्रगति को प्रदर्शित करता है। इसे नौसेना में शामिल करने से उथले तटीय जल में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन पर हमला करने की नौसेना की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

पृष्ठभूमि (Background)

उथले जलयान तटीय क्षेत्रों में गश्त करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जहां पारंपरिक युद्धपोत प्रभावी ढंग से युद्ध-कौशल का प्रदर्शन नहीं कर सकते। 2019 में, भारतीय नौसेना ने बंदरगाहों और शिपिंग लेन की सुरक्षा के लिए आठ ASW SWC डिजाइन और निर्माण करने के लिए GRSE के साथ अनुबंध किया था। पूर्ववर्ती आईएनएस अग्रय, जो 1241 PE श्रेणी का गश्ती पोत था, ने 2017 में सेवामुक्त होने तक नौसेना में काम किया। नए अग्रय में बेहतर तकनीक और डिज़ाइन को शामिल करते हुए उसी नाम को बरकरार रखा गया है।

प्रमुख विशेषताएं (Key features)

  • प्रणोदन (Propulsion): वाटरजेट प्रणोदन (Waterjet propulsion) इसे वाटरजेट द्वारा संचालित सबसे बड़ा भारतीय नौसेना युद्धपोत बनाता है, जिससे उच्च गतिशीलता (high manoeuvrability) और उथले-ड्राफ्ट (shallow‑draft) संचालन की अनुमति मिलती है।
  • सेंसर और हथियार (Sensors and weapons): पनडुब्बियों और समुद्री सुरंगों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने के लिए अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो (lightweight torpedoes), स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत उथले-जल सोनार सिस्टम से लैस है। एकीकृत संचार और नेविगेशन सिस्टम तटीय निगरानी (coastal surveillance) का समर्थन करते हैं।
  • स्वदेशी डिजाइन (Indigenous design): वारशिप डिजाइन ब्यूरो (Warship Design Bureau) द्वारा डिज़ाइन किया गया और 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ GRSE द्वारा निर्मित, जो रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता को रेखांकित करता है।
  • विरासत (Legacy): यह जहाज "अग्रय" नाम को पुनर्जीवित करता है और इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (Indian Register of Shipping) के वर्गीकरण मानकों को पूरा करता है।

महत्व (Significance)

  • उन्नत तटीय रक्षा (Enhanced coastal defence): यह जलयान पानी के नीचे के खतरों से बंदरगाहों, शिपिंग लेन और अपतटीय बुनियादी ढांचे (offshore infrastructure) की रक्षा करने की नौसेना की क्षमता में सुधार करता है।
  • आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा (Promotion of Aatmanirbhar Bharat): उच्च स्वदेशी सामग्री घरेलू उद्योगों का समर्थन करती है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करती है।
  • तकनीकी प्रगति (Technological advancement): वाटरजेट प्रणोदन और आधुनिक सोनार को अपनाना भारतीय नौसेना वास्तुकला (naval architecture) में प्रगति को दर्शाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

अग्रय की डिलीवरी स्वदेशी जहाज निर्माण के माध्यम से तटीय रक्षा को मजबूत करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जैसे-जैसे अधिक ASW SWC बेड़े में शामिल होंगे, वे चुस्त प्लेटफार्मों (agile platforms) का एक नेटवर्क प्रदान करेंगे जो तटीय जल की सुरक्षा करेंगे और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेंगे।

Source: Press Information Bureau

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