Economy

ALMM Framework: सौर ऊर्जा, घरेलू विनिर्माण और PV मॉड्यूल

ALMM Framework: सौर ऊर्जा, घरेलू विनिर्माण और PV मॉड्यूल

चर्चा में क्यों?

भारत के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) ने 1 जून 2028 से एक नई सूची III के तहत सौर सिल्लियां (solar ingots) और वेफर्स (wafers) को शामिल करने के लिए अपने मॉडल और निर्माताओं की स्वीकृत सूची (Approved List of Models and Manufacturers - ALMM) ढांचे का विस्तार किया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (domestic solar manufacturing ecosystem) को मजबूत करना और संपूर्ण मूल्य श्रृंखला (entire value chain) में गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

पृष्ठभूमि

जनवरी 2019 में जारी ALMM आदेश यह सत्यापित करने के लिए बनाया गया था कि सरकार समर्थित परियोजनाओं (government-supported projects) में उपयोग किए जाने वाले सौर फोटोवोल्टिक (solar photovoltaic - PV) मॉड्यूल और सेल वास्तविक रूप से उन निर्माताओं द्वारा उत्पादित किए जाते हैं जो उन्हें बनाने का दावा करते हैं। सौर संयंत्रों को दशकों तक संचालित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इसलिए विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है। यह ढांचा स्वीकृत मॉडलों और निर्माताओं को सूचीबद्ध करता है, यह सुनिश्चित करता है कि केवल जाँचे-परखे (vetted) उत्पाद ही सरकारी परियोजनाओं, ओपन-एक्सेस (open-access) और नेट-मीटरिंग इंस्टॉलेशन (net-metering installations) में स्थापित किए जा सकते हैं। पीवी मॉड्यूल की पहली सूची मार्च 2021 में जारी की गई थी, और पीवी सेल की एक अलग सूची जुलाई 2025 में पेश की गई थी।

प्रमुख विशेषताएं

  • त्रि-स्तरीय संरचना (Three-tier structure): ALMM में अब स्वीकृत पीवी मॉड्यूल के लिए सूची I, स्वीकृत पीवी सेल के लिए सूची II और स्वीकृत सिल्लियों (ingots) और वेफर्स (wafers) के लिए सूची III है। 15 गीगावाट (gigawatts) की संयुक्त क्षमता वाले कम से कम तीन घरेलू निर्माता चालू होने के बाद जून 2028 से सूची III लागू होगी।
  • सरकारी परियोजनाओं में अनिवार्य उपयोग: ALMM के तहत सूचीबद्ध केवल मॉडल और निर्माताओं का उपयोग सरकारी या सरकार-सहायता प्राप्त परियोजनाओं, नेट-मीटरिंग इंस्टॉलेशन और सरकारी उपयोगिताओं (government utilities) को बिजली बेचने वाली परियोजनाओं में किया जा सकता है। यह गुणवत्ता सुनिश्चित करता है और नकली (counterfeit) या उप-मानक उत्पादों (sub-standard products) के जोखिम को कम करता है।
  • ग्रैंडफादरिंग (Grandfathering): जिन परियोजनाओं के लिए निर्दिष्ट कट-ऑफ तिथि (specified cut-off date) से पहले बोलियां जमा की गई हैं, उन्हें ALMM की नई आवश्यकताओं से छूट दी गई है। यह प्रावधान चल रही परियोजनाओं में व्यवधान को रोकता है।
  • घरेलू सामग्री सुदृढीकरण (Domestic content reinforcement): यह आदेश सेल, मॉड्यूल, सिल्लियां और वेफर्स के स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करके नवीकरणीय-ऊर्जा योजनाओं के तहत मौजूदा घरेलू सामग्री आवश्यकताओं का पूरक (complements) है।
  • आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन (Supply chain resilience): सिल्लियों और वेफर्स का विस्तार अपस्ट्रीम (upstream) सौर घटकों के आयात पर निर्भरता को कम करता है, आत्मनिर्भरता (self-reliance) को बढ़ावा देता है और सौर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (solar manufacturing ecosystem) को मजबूत करता है।

महत्व

  • गुणवत्ता आश्वासन (Quality assurance): स्वीकृत मॉडलों और निर्माताओं को सूचीबद्ध करके, ALMM ढांचा उपभोक्ताओं और निवेशकों को उप-मानक (sub-standard) सौर उपकरणों से बचाता है।
  • घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना: सरकारी परियोजनाओं में ALMM-सूचीबद्ध घटकों की आवश्यकता कंपनियों को भारत में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे नौकरियों और प्रौद्योगिकी विकास को समर्थन मिलता है।
  • जलवायु लक्ष्यों के साथ संरेखण (Alignment with climate goals): यह नीति 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा (non-fossil energy) क्षमता हासिल करने की भारत की रणनीति का हिस्सा और स्वच्छ-ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

स्रोत: News on Air

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