खबरों में क्यों?
मणिपुर (Manipur) के अनल नागा (Anal Naga) लोगों की उनके पारंपरिक वन-प्रबंधन प्रथाओं (traditional forest‑management practices) के लिए प्रशंसा की गई है जिन्हें उजू (Uju) और रंगकांग (Rangkang) के रूप में जाना जाता है। ये समुदाय-संचालित प्रणालियां जल स्रोतों की रक्षा करती हैं, संसाधन उपयोग को नियंत्रित करती हैं और जैव विविधता को बनाए रखती हैं, और टिकाऊ संरक्षण के मॉडल के रूप में ध्यान आकर्षित करती हैं।
पृष्ठभूमि
अनल मणिपुर में 19 नागा जनजातियों में से एक हैं और म्यांमार (Myanmar) सीमा पार भी रहते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी जनसंख्या लगभग 24,300 है। वे अनल (Anāl) भाषा बोलते हैं, जो चीन-तिब्बती परिवार (Sino‑Tibetan family) की एक उत्तरी कुकीश (Northern Kukish) भाषा है, और भारत में एक अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। अधिकांश समुदाय चंदेल (Chandel) जिले में रहते हैं और निर्वाह खेती (subsistence farming) और पशुपालन करते हैं। पारंपरिक मान्यताएं जीववादी (animist) हैं, हालांकि कुछ सदस्यों ने ईसाई धर्म अपना लिया है।
समुदाय के नेतृत्व में वन प्रबंधन
- उजू वन (Uju forests): प्रत्येक गांव के करीब, इन आरक्षित वनों का सामूहिक रूप से प्रबंधन किया जाता है। ग्रामीण गांव के अधिकारियों की अनुमति से ही जलाऊ लकड़ी, बांस और अन्य संसाधन इकट्ठा कर सकते हैं। अवैध कटाई के लिए जुर्माना लगाया जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि निष्कर्षण (extraction) टिकाऊ बना रहे। उजू के भीतर झरने और जलधाराएं पीने का पानी और सिंचाई प्रदान करती हैं, इसलिए उनकी रक्षा करना समुदाय के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है।
- रंगकांग वन (Rangkang forests): बस्ती से दूर, इन पैच को अछूता छोड़ दिया जाता है। सूखे जैसी आपात स्थिति को छोड़कर किसी को भी इन क्षेत्रों से पेड़ काटने या उपज इकट्ठा करने की अनुमति नहीं है। इन जंगलों को अछूता छोड़ने से पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित (regenerate) होने का मौका मिलता है और अचानक आने वाली बाढ़ और गर्मी की लहरों के खिलाफ एक बफर (buffer) प्रदान करता है।
- सामूहिक निर्णय लेना (Collective decision‑making): प्रत्येक गांव आने वाले वर्ष के लिए नियम निर्धारित करने के लिए एक वार्षिक सभा आयोजित करता है। बुजुर्ग और युवा सीमाओं, जुर्माने और मौसमी प्रतिबंधों पर चर्चा करते हैं, जो सहभागी शासन (participatory governance) को प्रदर्शित करता है।
महत्व
उजू और रंगकांग स्वदेशी संरक्षण (indigenous conservation) का प्रतीक हैं। वे जंगल के स्वास्थ्य के साथ संसाधनों की आवश्यकता को संतुलित करते हैं, जल स्रोतों की सुरक्षा करते हैं और जलवायु लचीलेपन (climate resilience) में स्थानीय ज्ञान की भूमिका को उजागर करते हैं। ऐसे समय में जब कई जंगलों को कटाई और खनन से खतरा है, अनल नागा प्रथा से पता चलता है कि सामुदायिक स्वामित्व और स्पष्ट नियम पारिस्थितिक तंत्र को पीढ़ियों तक बनाए रख सकते हैं।