पर्यावरण

Anamalai Tiger Reserve: तमिलनाडु, पश्चिमी घाट और मानव-वन्यजीव संघर्ष

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चर्चा में क्यों?

मानव-हाथी संघर्ष (human-elephant conflict) बढ़ने की रिपोर्टों और बागानों (plantations) के पास बाघों (tigers) के देखे जाने के बाद अधिकारियों ने हाल ही में अनामलाई टाइगर रिज़र्व (Anamalai Tiger Reserve) में गश्त (patrolling) और सामुदायिक जागरूकता (community awareness) बढ़ा दी है। इन उपायों का उद्देश्य वन्यजीवों और स्थानीय निवासियों दोनों की रक्षा करना और रिज़र्व में इकोटूरिज्म (ecotourism) को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

अनामलाई टाइगर रिज़र्व, जिसे पहले इंदिरा गांधी वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान (Indira Gandhi Wildlife Sanctuary and National Park) के नाम से जाना जाता था, तमिलनाडु के कोयंबटूर (Coimbatore) और तिरुपुर (Tiruppur) जिलों की अनामलाई पहाड़ियों (Anaimalai Hills - जिसका अर्थ है "हाथी पहाड़ियाँ") में स्थित है। मूल रूप से 1976 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में स्थापित, इसे 2007 में टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया था। रिज़र्व में लगभग 959 वर्ग किमी का मुख्य क्षेत्र (core area) और 521 वर्ग किमी का बफर ज़ोन (buffer zone) शामिल है, जो कुल मिलाकर लगभग 1,480 वर्ग किमी का संरक्षित क्षेत्र (protected area) बनाता है।

परिदृश्य और जैव विविधता (Landscape and biodiversity)

  • स्थलाकृति और जलवायु (Topography and climate): ऊंचाई 340 मीटर से लेकर 2,513 मीटर तक है, जो आवासों (habitats) का एक मोज़ेक (mosaic) बनाती है। विंडवर्ड ढलानों (windward slopes) पर उच्च वर्षा उष्णकटिबंधीय वर्षावनों (tropical rainforests) का समर्थन करती है, जबकि निचले क्षेत्रों में नम और शुष्क पर्णपाती वन (moist and dry deciduous forests), कांटेदार झाड़ियाँ और घास के मैदान (grasslands) शामिल हैं।
  • वनस्पति: 2,000 से अधिक पौधों की प्रजातियों को दर्ज किया गया है, जिनमें कई औषधीय पौधे (medicinal plants) शामिल हैं। होपिया पार्विफ्लोरा (Hopea parviflora), मेसुआ फेरिया (Mesua ferrea), वटेरिया इंडिका (Vateria indica) और कुलेनिया एक्सेलसा (Cullenia excelsa) जैसी सदाबहार प्रजातियाँ छत्र (canopy) पर हावी हैं, जबकि बांस के ब्रेक और ईख के बिस्तर (reed beds) घाटी के तल पर कब्जा कर लेते हैं। अधिक ऊंचाई वाले शोला वन (shola forests) और घास के मैदान शंकुधारी पोडोकार्पस वालिचियानस (Podocarpus wallichianus) जैसी अवशेष प्रजातियों (relic species) को आश्रय देते हैं।
  • जीव-जंतु: रिज़र्व में बंगाल के बाघों, भारतीय हाथियों, भारतीय तेंदुओं, ढोल (dholes), गौर (gaurs), शेर-पूंछ वाले मकाक (lion-tailed macaques), नीलगिरी लंगूर, नीलगिरी तहर (Nilgiri tahr) और सुस्त भालू (sloth bears) की एक बड़ी आबादी है। 250 से अधिक पक्षी प्रजातियों में हॉर्नबिल (hornbills), ट्रोगन (trogons), किंगफिशर, ड्रोंगो (drongos) और रैप्टर (raptors) शामिल हैं, जिनमें 15 पश्चिमी घाट के लिए स्थानिक (endemic) हैं। पर्पल फ्रॉग (purple frog) और अनामलाई उड़ने वाले मेंढक (Anaimalai flying frog) जैसे दुर्लभ उभयचर (amphibians) जलधाराओं में रहते हैं।
  • आदिवासी समुदाय (Tribal communities): कादर (Kadars), मलासर (Malasars), पुलैयार (Pulaiyars), मुदुगर (Mudugars) और एरावल्लन (Eravallan) जैसी जनजातियों के 4,600 से अधिक आदिवासी लोग रिज़र्व के भीतर 34 बस्तियों में रहते हैं। वे गैर-इमारती लकड़ी के उत्पादों (non-timber products) के लिए जंगल पर निर्भर हैं और पारंपरिक कृषि करते हैं।

संरक्षण और पर्यटन

  • बाघ संरक्षण (Tiger conservation): रिज़र्व अनामलाई-परम्बिकुलम-चिन्नार (Anamalai-Parambikulam-Chinnar) परिदृश्य का हिस्सा है, जो पश्चिमी घाट में एक महत्वपूर्ण बाघ आवास है। निगरानी (Monitoring), अवैध शिकार विरोधी शिविर (anti-poaching camps) और आवास प्रबंधन का उद्देश्य बाघों की स्वस्थ संख्या बनाए रखना है।
  • मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व (Human-wildlife coexistence): हाथियों और गौरों द्वारा फसलों पर हमला और कभी-कभार बड़ी बिल्लियों के मुठभेड़ (encounters) ग्रामीणों के लिए जोखिम पैदा करते हैं। संघर्षों को कम करने और किसानों को नुकसान की भरपाई करने के लिए अधिकारी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (early-warning systems), खाइयों (trenches) और सौर बाड़ (solar fencing) का उपयोग करते हैं।
  • इकोटूरिज्म के अवसर: आगंतुक निर्देशित सफारी (guided safaris) कर सकते हैं, टॉप स्लिप (Top Slip) में वन विश्राम गृहों (forest rest houses) में रह सकते हैं और हाथियों को खिलाने और नहलाने में भाग ले सकते हैं। पर्यटन से होने वाली आय संरक्षण का समर्थन करती है लेकिन गड़बड़ी (disturbance) को कम करने के लिए इसे प्रबंधित किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

अनामलाई टाइगर रिज़र्व पश्चिमी घाट की पारिस्थितिक समृद्धि (ecological richness) को प्रदर्शित करता है और मानव समुदायों के साथ जैव विविधता (biodiversity) के संरक्षण की चुनौतियों पर प्रकाश डालता है। इसके वन्यजीवों के दीर्घकालिक अस्तित्व (long-term survival) के लिए निरंतर आवास सुरक्षा, वैज्ञानिक निगरानी और सामुदायिक जुड़ाव (community engagement) आवश्यक हैं।

स्रोत: टीओआई (TOI)

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