चर्चा में क्यों?
कोथा तेलंगाना चरित्र बृंदम (Kotha Telangana Charitra Brundam - KTCB) और क्लाइमेट फ्रंट तेलंगाना के शोधकर्ताओं ने हाल ही में हैदराबाद के पास मंचिरेवुला में बीरप्पा मंदिर (Beerappa Temple) के पीछे एक रॉक शेल्टर में दो प्राचीन रॉक नक्काशी की खोज की। यह खोज दक्कन क्षेत्र में प्रागैतिहासिक कला (prehistoric art) के बढ़ते दस्तावेज़ीकरण में जुड़ती है।
पृष्ठभूमि
एक पेट्रोग्लिफ (petroglyph) चट्टान की सतह पर उकेरी गई एक छवि है। भारत में, कई क्षेत्रों में पेट्रोग्लिफ पाए गए हैं और अक्सर मनुष्यों, जानवरों या प्रतीकों को दर्शाते हैं। नई खोजी गई नक्काशी एक सपाट रॉक स्लैब पर जमीन से लगभग 50 फीट ऊपर मिली थी।
प्रमुख निष्कर्ष
- त्रिशूल रूपांकन (Trident motif): एक नक्काशी एक वृत्त और हैंडल के साथ एक त्रिशूल-जैसे प्रतीक को दर्शाती है। स्थानीय रॉक कला में, ऐसे रूपांकनों को नंदी पद (Nandi Pada) (वृत्त के साथ त्रिशूल) का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है और यह मुहर्रम के जुलूसों के दौरान ले जाने वाली हथेली या हाथ का प्रतीक हो सकता है।
- खिलौना या खेल प्रतिनिधित्व: अलेर मंडल में गोलनकोंडा पहाड़ी पर पाए गए एक के समान एक और नक्काशी, पारंपरिक बोर्ड गेम दादी आटा (Daadi Aata) (नाइन मेन्स मॉरिस - Nine Men’s Morris) का प्रतिनिधित्व करती प्रतीत होती है। इस तरह की नक्काशी विभिन्न स्थलों पर सांस्कृतिक निरंतरता का सुझाव देती है।
महत्व
यह खोज तेलंगाना क्षेत्र में प्रागैतिहासिक या प्रारंभिक ऐतिहासिक मानव गतिविधि के साक्ष्य को जोड़ती है। दक्षिण भारत में कला और अनुष्ठान (ritual) के इतिहास को समझने के लिए इन स्थलों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण महत्वपूर्ण है। सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता ऐसे खजाने को बर्बरता (vandalism) और प्राकृतिक क्षरण (natural erosion) से बचाने में मदद कर सकती है।
स्रोत: Deccan Chronicle