समाचार में क्यों?
Zoological Survey of India (ZSI) और Botanical Survey of India (BSI) ने हाल ही में अपनी वार्षिक रिपोर्ट Animal Discoveries 2025 और Plant Discoveries 2025 जारी कीं। ये रिपोर्ट 2025 में भारत के वन्यजीव और पादप सूची में जोड़ी गई नई प्रजातियों और नए रिकॉर्ड्स की गणना करती हैं। इन प्रकाशनों को ZSI के स्थापना दिवस समारोह के दौरान PaleoIndia जीवाश्म पोर्टल के साथ लॉन्च किया गया था, जिसने जैव विविधता प्रलेखन की ओर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया।
पृष्ठभूमि
भारत की वन्यजीव और पादप संपदा की निगरानी दो राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा की जाती है। 1916 में स्थापित ZSI, जीवों की विविधता का सर्वेक्षण और प्रलेखन करता है। 1890 में स्थापित BSI, पौधों के लिए समान कार्य करता है। हर साल वे विज्ञान के लिए नई प्रजातियों और भारत में पहली बार दर्ज की गई प्रजातियों की सूची वाली रिपोर्ट प्रकाशित करते हैं। इससे वैज्ञानिकों को जैव विविधता में होने वाले बदलावों को ट्रैक करने और संरक्षण रणनीतियों की योजना बनाने में मदद मिलती है। 2025 के निष्कर्ष 1 July 2026 को ZSI के 111वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान जारी किए गए थे।
मुख्य निष्कर्ष
- पशु प्रजातियों में वृद्धि: कुल 709 नए जीव रिकॉर्ड जोड़े गए। इनमें से 483 प्रजातियों को विज्ञान के लिए नई प्रजातियों के रूप में वर्णित किया गया और 226 प्रजातियों को भारत में पहली बार देखा गया। इन वृद्धियों के साथ भारत में प्रलेखित जीवों की संख्या अब 105,953 प्रजातियां हो गई है।
- राज्यों का योगदान: केरल में सबसे अधिक वृद्धि (98 नई प्रजातियां) दर्ज की गई, इसके बाद पश्चिम बंगाल (76), कर्नाटक (67) और अरुणाचल प्रदेश (65) का स्थान रहा।
- प्रमुख समूह: Hymenoptera (चींटियां, मधुमक्खियां और ततैया) ने कीटों की खोज में सबसे अधिक योगदान दिया। कशेरुकी जीवों में, कई नई मछलियों, मेंढकों, छिपकलियों और चमगादड़ों को दर्ज किया गया। उल्लेखनीय उदाहरणों में लंबी पूंछ वाला हिमालयी चमगादड़ (Myotis himalaicus), एक हरे पंखे जैसी गर्दन वाली छिपकली और इरविन का वुल्फ स्नेक शामिल हैं।
- पादप प्रजातियों में वृद्धि: पादप रिपोर्ट में 353 नए टैक्सा दर्ज किए गए, जिनमें 339 प्रजातियां और 14 इन्फ्रास्पेसिफिक टैक्सा (किस्में और उप-प्रजातियां) शामिल हैं। इनमें से 221 टैक्सा विज्ञान के लिए नए हैं जबकि 132 नए वितरण रिकॉर्ड्स का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- पादप विविधता हॉटस्पॉट: पादप खोजों में अरुणाचल प्रदेश 49 टैक्सा के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद उत्तराखंड (39) और केरल (37) का स्थान रहा। कई नई प्रजातियां ऑर्किड, बाल्सम और फलियां थीं।
महत्व
- ज्ञान का विस्तार: नई प्रजातियों का दस्तावेजीकरण भारत की समृद्ध जैव विविधता के बारे में हमारी समझ को बढ़ाता है और शोधकर्ताओं को संरक्षण प्रयासों को प्राथमिकता देने में मदद करता है।
- संरक्षण योजना: यह जानना कि प्रजातियां कहाँ और कब खोजी जाती हैं, आवास सुरक्षा का मार्गदर्शन करता है और संरक्षित क्षेत्रों पर निर्णयों को सूचित करता है।
- जनभागीदारी: इन रिपोर्ट्स को एक जीवाश्म पोर्टल और इनोवेशन हैकथॉन के साथ जारी किया गया था, जो जैव विविधता विज्ञान में नागरिकों को शामिल करने के सरकार के प्रयासों का संकेत देता है।
निष्कर्ष
2025 की पशु और पादप खोज रिपोर्ट्स दर्शाती हैं कि भारत हर साल नए जीवन रूपों को उजागर करना जारी रखता है। व्यवस्थित सर्वेक्षण और आधुनिक तकनीकें जंगलों, आर्द्रभूमि और पहाड़ों से छिपी हुई प्रजातियों को खोज रही हैं। ऐसी खोजें हमें देश की प्राकृतिक संपदा और विकास के दबावों से नाजुक पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करने की आवश्यकता की याद दिलाती हैं।