Science & Technology (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

Antariksh Venture Capital Fund: स्पेसटेक स्टार्ट-अप, IN-SPACe और ISRO

Antariksh Venture Capital Fund: स्पेसटेक स्टार्ट-अप, IN-SPACe और ISRO

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने संसद को सूचित किया कि अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड (Antariksh Venture Capital Fund) का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 2025 में स्थापित इस समर्पित फंड का पंजीकरण पूरा हो गया है और यह प्रस्तावों का मूल्यांकन कर रहा है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही से इसके द्वारा निवेश शुरू होने की उम्मीद है। यह कदम स्पेसटेक स्टार्ट‑अप्स (spacetech start‑ups) को समर्थन देने और इस क्षेत्र में नवाचार (innovation) को प्रोत्साहित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है。

पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का दबदबा रहा है, लेकिन हाल के सुधारों का उद्देश्य इसे निजी कंपनियों के लिए खोलना है। अंतरिक्ष फंड को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) में श्रेणी II वैकल्पिक निवेश कोष (Alternative Investment Fund) के रूप में पंजीकृत किया गया है। सिडबी वेंचर कैपिटल लिमिटेड (SIDBI Venture Capital Limited) द्वारा प्रायोजित इस फंड की कुल राशि लगभग ₹1,005 करोड़ है। यह उन कंपनियों में निवेश करेगा जिनका टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (Technology Readiness Levels - TRL) 4 या उससे अधिक है। इस फंड का उद्देश्य विकास के विभिन्न चरणों में पूंजी उपलब्ध कराना और नई अंतरिक्ष तकनीकों के व्यावसायीकरण (commercialisation) में मदद करना है, ताकि स्टार्ट‑अप्स भारत की व्यापक अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में अपना योगदान दे सकें।

प्रमुख उद्देश्य और विशेषताएं

  • भारतीय संस्थाओं को समर्पित (Dedicated to Indian entities): यह फंड विशेष रूप से अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों में निवेश करेगा। इसका उद्देश्य लॉन्च‑व्हीकल (launch‑vehicle) बनाने वालों, उपग्रह निर्माताओं (satellite manufacturers) और डाउनस्ट्रीम सेवाओं (downstream services) को बढ़ावा देना है।
  • समर्थन और मार्गदर्शन (Hand‑holding and mentorship): स्टार्ट‑अप्स को पूंजी के अलावा तकनीकी मार्गदर्शन (technical guidance), बाजार से जुड़ाव और अपने नवाचारों को बढ़ाने के लिए IN‑SPACe तथा ISRO जैसी एजेंसियों से मदद मिलेगी।
  • चरणबद्ध निवेश (Phased investment): वर्तमान में प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है और चार स्टार्ट‑अप्स के आकलन की प्रक्रिया उन्नत चरण में है। उचित जांच (due diligence) पूरी होने के बाद वित्त वर्ष 2027 से वास्तविक निवेश शुरू होने की उम्मीद है।
  • व्यावसायीकरण पर ध्यान (Focus on commercialisation): प्रयोगशाला स्तर से आगे बढ़ चुकी तकनीकों का समर्थन करके, इस फंड का लक्ष्य अनुसंधान को बाजार योग्य उत्पादों और सेवाओं (marketable products and services) में बदलने की प्रक्रिया को तेज करना है।

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN‑SPACe)

इन-स्पेस (IN‑SPACe) अंतरिक्ष विभाग के तहत एक स्वायत्त, सिंगल-विंडो एजेंसी (autonomous, single‑window agency) है। इसे गैर-सरकारी संस्थाओं (non‑governmental entities) की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने और अधिकृत (authorise) करने के लिए बनाया गया है। यह ISRO और निजी क्षेत्र के बीच एक पुल का काम करता है। IN‑SPACe इसरो की सुविधाओं तक पहुंच को आसान बनाता है, निजी कंपनियों द्वारा लॉन्च‑व्हीकल और उपग्रह मिशनों (satellite missions) को अधिकृत करता है, अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे (space infrastructure) को साझा करने की निगरानी करता है और यह सुनिश्चित करता है कि व्यावसायिक उद्यम राष्ट्रीय नीति का पालन करें। यह तीन निदेशालयों के माध्यम से काम करता है - संवर्धन निदेशालय (Promotion Directorate), तकनीकी निदेशालय (Technical Directorate) और कार्यक्रम प्रबंधन एवं प्राधिकरण निदेशालय (Programme Management and Authorization Directorate)। इनमें से प्रत्येक का ध्यान निजी भागीदारी को सक्षम करने, तकनीकी मूल्यांकन और कार्यक्रम प्रबंधन पर केंद्रित है।

महत्व

  • नवाचार को बढ़ावा (Stimulating innovation): जोखिम पूंजी (risk capital) और मार्गदर्शन प्रदान करके, यह फंड एक जीवंत स्पेसटेक इकोसिस्टम विकसित करने में मदद कर सकता है। इससे युवा उद्यमी लॉन्च व्हीकल, छोटे उपग्रह और अंतरिक्ष-आधारित एप्लिकेशन विकसित करने के लिए प्रेरित होंगे।
  • आयात निर्भरता में कमी (Reducing import dependence): अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का स्वदेशी विकास विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता को कम करेगा और आत्मनिर्भर भारत पहल को समर्थन देगा।
  • व्यावसायिक क्षमता का दोहन (Unlocking commercial potential): अंतरिक्ष आधारित उत्पादों और सेवाओं के व्यावसायीकरण से देश के लिए उच्च मूल्य वाली नौकरियां (high‑value jobs) और राजस्व (revenue) पैदा हो सकता है।

निष्कर्ष

अंतरिक्ष वेंचर कैपिटल फंड भारत के अंतरिक्ष सुधारों के सफर में एक महत्वपूर्ण कदम है। निजी स्पेसटेक उद्यमों को पूंजी और विशेषज्ञता देकर, इसका उद्देश्य नवीन विचारों (innovative ideas) को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों (commercially viable products) में बदलना, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत करना और उद्यमियों की नई पीढ़ी को प्रेरित करना है।

स्रोत: Press Information Bureau

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