चर्चा में क्यों?
अधिकारियों ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (Kaziranga National Park) से एशियाई जंगली जल भैंसों को मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व (Kanha Tiger Reserve) में स्थानांतरित (relocate) करने की योजना शुरू की है। मध्य-मार्च 2026 में निर्धारित स्थानांतरण (translocation) के पहले चरण में जानवरों के एक छोटे समूह को ले जाया जाएगा।
पृष्ठभूमि
एशियाई जंगली जल भैंस (बुबलस अर्नी - Bubalus arnee) को IUCN लाल सूची में लुप्तप्राय (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। ऐतिहासिक रूप से, जंगली भैंसें मध्य भारत में घूमती थीं, लेकिन निवास स्थान के नुकसान और शिकार के कारण इनकी आबादी में गिरावट आई। काजीरंगा में अब 1,000 से अधिक भैंसे हैं और इसे इस प्रजाति का गढ़ माना जाता है। कान्हा ने दशकों पहले अपनी मूल आबादी खो दी थी।
स्थानांतरण योजना
- उद्देश्य: कान्हा में एक व्यवहार्य (viable) आबादी को बहाल करना और एक क्षेत्र में केंद्रित पूरी प्रजाति के बीमारी या आपदा से मिट जाने के जोखिम को कम करना।
- जानवरों की संख्या: लगभग 50 भैंसों को चरणों में ले जाया जाना है; प्रारंभिक चरण में 5-6 जानवरों को स्थानांतरित किया जाएगा, व्यवहार्यता सिद्ध होने पर इसे बढ़ाकर 15 करने की योजना है।
- प्रक्रिया: वन्यजीव टीमें भैंसों को ट्रैंक्विलाइज़ (tranquilise), कैप्चर और सड़क मार्ग से परिवहन (transport) करेंगी। इस ऑपरेशन की तैयारी के लिए काजीरंगा में एक मॉक ड्रिल (mock drill) आयोजित की गई थी।
- औचित्य: कान्हा उपयुक्त घास के मैदान और जल निकाय (water bodies) प्रदान करता है। भैंसों को वापस लाने से पारिस्थितिक संतुलन (ecological balance) और आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को बहाल करने में मदद मिलेगी।
महत्व
यह भारत के प्रमुख प्रजातियों के पुन: परिचय (re-introduction) कार्यक्रमों में से एक है। एक लुप्तप्राय प्रजाति की भौगोलिक सीमा का विस्तार करके, संरक्षणवादियों को बीमारी के प्रकोप और जलवायु की घटनाओं के खिलाफ लचीलापन (resilience) बनाने की उम्मीद है। यह परियोजना वन्यजीव प्रबंधन में अंतरराज्यीय सहयोग (interstate cooperation) के महत्व को रेखांकित करती है।
स्रोत: The Assam Tribune