विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Aurora Borealis (Northern Lights): Geomagnetic Storm, Solar Wind और Magnetosphere

Aurora Borealis (Northern Lights): Geomagnetic Storm, Solar Wind और Magnetosphere

चर्चा में क्यों?

जून 2026 की शुरुआत में एक शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफान (geomagnetic storm) ने शानदार अरोरा (auroras) पैदा किए जो उच्च अक्षांशों (higher latitudes) पर और कुछ पलों के लिए, हिमालय के दक्षिण तक दिखाई दिए। सोशल मीडिया रंगीन रोशनी की तस्वीरों से भर गया, जिससे यह दिलचस्पी फिर से जाग गई कि वे कैसे बनते हैं。

पृष्ठभूमि

अरोरा बोरेलिस (aurora borealis), या "उत्तरी रोशनी" (northern lights), एक प्राकृतिक प्रकाश प्रदर्शन है जो तब होता है जब सूर्य से आवेशित कण (charged particles) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) और वायुमंडल (atmosphere) के साथ बातचीत करते हैं। सौर हवा (solar wind) इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉन की एक धारा ले जाती है जो कभी-कभी पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर (magnetosphere) से टकराती है। जब इन कणों को ऊपरी वायुमंडल में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं (magnetic field lines) के साथ भेजा जाता है, तो वे ऑक्सीजन और नाइट्रोजन परमाणुओं को उत्तेजित (excite) करते हैं, जिससे वे फोटॉन (photons) उत्सर्जित करते हैं。

गठन और रंग (Formation and colours)

  • सौर हवा और मैग्नेटोस्फीयर (Solar wind and magnetosphere): सूर्य लगातार सौर हवा (solar wind) नामक आवेशित कणों का प्रवाह उत्सर्जित करता है। जब सौर तूफान (solar storms) आते हैं, तो यह प्रवाह तेज हो जाता है और पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को संपीड़ित करता है, जिससे अधिक कणों को प्रवेश करने में सक्षम बनाता है।
  • वायुमंडलीय गैसों का उत्तेजन (Excitation of atmospheric gases): 60-200 किमी की ऊंचाई पर, ऊर्जावान कण ऑक्सीजन अणुओं से टकराते हैं, जो हरी रोशनी (green light) उत्सर्जित करते हैं। 120 किमी से ऊपर की उच्च ऊंचाई पर, उत्तेजित ऑक्सीजन लाल रोशनी (red light) भी उत्सर्जित कर सकती है। नाइट्रोजन के अणु नीले और गुलाबी रंग (blue and pink hues) पैदा करते हैं, विशेष रूप से कम ऊंचाई पर।
  • अक्षांश और दृश्यता (Latitude and visibility): पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) कणों को ध्रुवों के पास उच्च अक्षांशों (high latitudes) तक ही सीमित रखता है, इसलिए अरोरा आमतौर पर वहीं देखे जाते हैं। तीव्र भू-चुंबकीय तूफानों (geomagnetic storms) के दौरान, औरोरल ओवल (auroral oval) फैलता है, जिससे मध्य-अक्षांशों पर लोगों को - यहां तक ​​कि उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में भी - इस प्रदर्शन की एक झलक देखने को मिलती है।

महत्व

अरोरा हमारे ग्रह के सूर्य से संबंध की खूबसूरत याद दिलाते हैं। वे अंतरिक्ष मौसम (space weather) के संकेतक के रूप में भी काम करते हैं, जो उपग्रहों, नेविगेशन सिस्टम और पावर ग्रिड को बाधित कर सकता है। अरोरा को समझने से वैज्ञानिकों को भू-चुंबकीय तूफानों की निगरानी करने और तकनीकी बुनियादी ढांचे की रक्षा करने में मदद मिलती है。

निष्कर्ष

जून 2026 की अरोरा घटना ने आकाश देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सूर्य और पृथ्वी के बीच गतिशील अंतःक्रिया (dynamic interaction) को उजागर किया। अंतरिक्ष मौसम के बारे में निरंतर अवलोकन और सार्वजनिक शिक्षा समुदायों को भविष्य के भू-चुंबकीय तूफानों के लिए तैयार करने में मदद करेगी。

स्रोत

The Hindu

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