पर्यावरण

Banni Grassland: मालधारी समुदाय, आर्द्रभूमि और सोलर पार्क की चिंताएँ

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समाचार में क्यों?

22 May 2026 को गुजरात के कच्छ (Kachchh) के बन्नी क्षेत्र (Banni region) के 500 से अधिक ग्रामीणों ने छारी-ढंड आर्द्रभूमि (Chhari‑Dhand wetland) के पास एक प्रस्तावित सौर पार्क (solar park) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय लोगों को डर है कि बड़े पैमाने पर सौर प्रतिष्ठान (solar installations) एशिया के दूसरे सबसे बड़े अर्ध-शुष्क घास के मैदान (semi‑arid grassland) के प्रवासी पक्षियों, चारागाह भूमि और देहाती अर्थव्यवस्था (pastoralist economy) को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

Banni grassland के बारे में

Banni grassland गुजरात के कच्छ (Kachchh) जिले में भुज (Bhuj) तालुका के उत्तरी किनारे पर लगभग 2,617 वर्ग किमी में फैला है। माना जाता है कि इसका निर्माण सिंधु नदी (Indus River) द्वारा जमा किए गए तलछट (sediments) से हुआ है और इसे स्थानीय रूप से "बन्नी हुई (Banni hui)" या "बनी हुई" भूमि कहा जाता है। कभी एशिया का सबसे बेहतरीन घास का मैदान (finest grassland) माना जाने वाला यह राज्य के स्थायी चरागाह का लगभग 45% और इसकी चरागाह भूमि का 10% हिस्सा है। बन्नी में लगभग 48 गाँव हैं जहाँ मालधारी (Maldharis) के नाम से जाने जाने वाले तेरह समुदाय रहते हैं। लवणता (salinity) और शुष्क जलवायु (arid climate) के कारण कृषि अव्यवहार्य (unviable) होने के साथ, निवासी पशुपालन पर निर्भर हैं, विशेष रूप से बन्नी भैंस (Banni buffalo)-एक सूखा-सहिष्णु नस्ल (drought‑tolerant breed) जिसे एक विशिष्ट आनुवंशिक संसाधन के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस क्षेत्र के मीठे पानी के आर्द्रभूमि (freshwater wetlands), जैसे छारी-ढंड (Chhari‑Dhand), 270 से अधिक पक्षी प्रजातियों का समर्थन करते हैं और दसियों हज़ार क्रेन (cranes) और अन्य जलपक्षियों (waterfowl) के लिए शीतकालीन मैदान (wintering grounds) के रूप में काम करते हैं।

पारिस्थितिक महत्व

  • जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity hotspot): बन्नी सूखे और लवणता के अनुकूल घास का समर्थन करता है और नीलगाय (blue bull), चिंकारा (chinkara), काला हिरण (blackbuck), सियार (jackal), लोमड़ी, लकड़बग्घा (hyena) और कई पक्षियों का घर है। छारी-ढंड और अन्य मौसमी आर्द्रभूमि (seasonal wetlands) क्रेन, पेलिकन (pelicans) और अन्य प्रवासी प्रजातियों को आकर्षित करते हैं।
  • सांस्कृतिक विरासत: मालधारी (Maldhari) समुदायों ने पशु प्रजनन (animal breeding), कढ़ाई, संगीत और जल संचयन (water harvesting) का ज्ञान विकसित किया है। उनका देहाती जीवन (pastoral way of life) चराई (grazing) और खुले जल निकायों (open water bodies) तक मुफ्त पहुंच पर निर्भर करता है।
  • संरक्षित स्थिति: 1955 में बन्नी के लगभग 2,700 वर्ग किमी को संरक्षित वन (protected forest) घोषित किया गया था, हालांकि स्वामित्व (ownership) राजस्व विभाग (Revenue Department) के पास है। कई क्षेत्रों को प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों (key biodiversity areas) के रूप में नामित किया गया है। फिर भी घास के मैदान को आक्रामक (invasive) Prosopis juliflora, अत्यधिक चराई (overgrazing), लवणीकरण (salinisation) और जलवायु परिवर्तन के दबाव का सामना करना पड़ता है।

सौर परियोजनाओं को लेकर चिंताएं

ग्रामीणों को चिंता है कि आर्द्रभूमि (wetlands) के पास विशाल सौर सरणियाँ (solar arrays) स्थापित करने से आवास विखंडित हो जाएंगे, सूक्ष्म जलवायु (micro‑climates) बदल जाएगी और एक "झील प्रभाव (lake effect)" पैदा होगा जहाँ पक्षी परावर्तक पैनलों (reflective panels) से टकराते हैं। यह परियोजना चरागाह भूमि (grazing land) को भी कम कर सकती है और आजीविका को खतरे में डाल सकती है। प्रदर्शनकारियों ने पारिस्थितिक आकलन (ecological assessments) और वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के तहत सामुदायिक वन अधिकारों (community forest rights) की मान्यता की मांग की। उनका तर्क है कि अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं (renewable energy projects) को नाजुक पारिस्थितिक तंत्र (fragile ecosystems) और सांस्कृतिक परिदृश्य की रक्षा के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

Banni grassland एक अनूठा पारिस्थितिक और सांस्कृतिक परिदृश्य है। किसी भी विकास को संरक्षण और देहाती अधिकारों (pastoralist rights) के साथ अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों (renewable energy goals) को संतुलित करना चाहिए। इस अर्ध-शुष्क खजाने (semi‑arid treasure) की सुरक्षा के लिए सामुदायिक जुड़ाव (Community engagement), सावधानीपूर्वक स्थल चयन और आक्रामक प्रजातियों (invasive species) का प्रबंधन आवश्यक है।

स्रोत

The Hindu

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