चर्चा में क्यों?
30 मार्च 2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कोच्चि में "भावसागर" (Bhavasagara) रेफरल सेंटर को भारत के गहरे समुद्र के जीवों के लिए राष्ट्रीय भंडार (National Repository for Deep‑Sea Fauna) के रूप में नामित किया। जैविक विविधता अधिनियम (Biological Diversity Act) के तहत दी गई यह मान्यता, केंद्र को भारत के गहरे समुद्रों से नमूनों की सुरक्षा करने और समुद्री जैव विविधता अनुसंधान का समर्थन करने का अधिकार देती है।
पृष्ठभूमि (Background)
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences) के अंतर्गत समुद्री सजीव संसाधन और पारिस्थितिकी केंद्र (Centre for Marine Living Resources & Ecology - CMLRE) ने भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) से गहरे समुद्र के जीवों के नमूने एकत्र करने, उनकी पहचान करने और उन्हें संरक्षित करने के लिए भावसागर रेफरल सेंटर की स्थापना की। गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र में कई ऐसी प्रजातियां हैं जिन्हें अच्छी तरह से नहीं समझा गया है और जिनके शोषण की आशंका है। इस केंद्र को एक राष्ट्रीय भंडार के रूप में मान्यता देने से यह इन नमूनों और संबंधित आनुवंशिक डेटा का औपचारिक संरक्षक (formal custodian) बन जाता है।
कार्य (Functions)
- सुरक्षित अभिरक्षा (Secure custody): भविष्य के वैज्ञानिक संदर्भ के लिए डीएनए अनुक्रमों (DNA sequences) जैसे महत्वपूर्ण डेटा के साथ वाउचर नमूनों (voucher specimens) को संरक्षित करता है।
- टाइप नमूने (Type specimens): भारतीय जलक्षेत्र में खोजी गई नई प्रजातियों के टाइप नमूनों के आधिकारिक संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
- क्षमता निर्माण (Capacity building): गहरे समुद्र के वर्गीकरण (deep‑sea taxonomy) में विशेषज्ञता को बढ़ावा देता है और संयुक्त राष्ट्र महासागर विज्ञान दशक (UN Decade of Ocean Science - 2021-2030) के अनुरूप शोधकर्ताओं के साथ सहयोग करता है।
- व्यापक संग्रह (Extensive collection): 3,500 से अधिक भू-संदर्भित नमूनों (geo‑referenced specimens) का संग्रह, जिसमें निडेरियन (cnidarians) और एनेलिड्स (annelids) से लेकर इलास्मोब्रांच मछलियां (elasmobranch fishes) तक शामिल हैं।
महत्व (Significance)
- वैज्ञानिक अनुसंधान (Scientific research): एक केंद्रीकृत भंडार (centralised repository) वर्गीकरणविदों (taxonomists) और पारिस्थितिकीविदों (ecologists) को नमूनों का अध्ययन करने और उनकी तुलना करने की अनुमति देता है, जिससे संरक्षण नीतियों को तैयार करने में मदद मिलती है।
- संरक्षण और सतत उपयोग (Conservation and sustainable use): प्रजातियों और आनुवंशिक जानकारी का दस्तावेजीकरण जैविक विविधता अधिनियम (Biological Diversity Act) के तहत बायोप्रोस्पेक्टिंग (bioprospecting) के नियमन और उचित लाभ साझाकरण (fair benefit sharing) का समर्थन करता है।
- राष्ट्रीय सहयोग (National collaboration): यह सुविधा विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के सहयोग को आमंत्रित करती है, जिससे भारत की अपने समुद्री संसाधनों का अन्वेषण करने और स्थायी प्रबंधन करने की क्षमता में वृद्धि होती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
भावसागर को राष्ट्रीय भंडार के रूप में नामित करना अपने गहरे समुद्र की विरासत को तलाशने और संरक्षित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह समुद्री जैव विविधता में वैज्ञानिक खोज और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के लिए एक आधार के रूप में कार्य करेगा।
Source: Press Information Bureau