अर्थव्यवस्था

BHAVYA Scheme: DPIIT, Industrial Parks और Make in India

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खबरों में क्यों?

मई 2026 में उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade - DPIIT) ने भारत औद्योगिक विकास योजना (Bharat Audyogik Vikas Yojna - BHAVYA) योजना के लिए परिचालन दिशानिर्देश (operational guidelines) जारी किए। केंद्र सरकार की 2026-27 और 2031-32 के बीच लगभग ₹33,660 करोड़ के परिव्यय (outlay) के साथ पूरे भारत में 100 निवेश-तैयार (investment‑ready) औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना है। दिशानिर्देश राज्यों और निजी डेवलपर्स के लिए पात्रता मानदंड (eligibility criteria), चयन प्रक्रियाओं और वित्त पोषण तंत्र (funding mechanisms) की रूपरेखा तैयार करते हैं।

पृष्ठभूमि

अप्रैल 2026 में घोषित, BHAVYA एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (central sector scheme) है जिसका उद्देश्य भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र (manufacturing hub) में बदलना है। इसका उद्देश्य विश्वसनीय उपयोगिताओं (utilities), मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी (multimodal logistics connectivity), श्रमिक आवास और डिजिटल गवर्नेंस के साथ प्लग-एंड-प्ले (plug‑and‑play) औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। यह योजना प्रधानमंत्री के गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (Gati Shakti National Master Plan) और मेक इन इंडिया (Make in India) पहल से प्रेरणा लेती है, जिसका उद्देश्य घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करना है।

दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं

  • दायरा और समयरेखा (Scope and timeline): BHAVYA छह वर्षों (2026-27 से 2031-32) में ₹33,660 करोड़ के कुल वित्तीय परिव्यय के साथ 100 औद्योगिक पार्क विकसित करेगा। पहले चरण में चुनौती-आधारित (challenge‑based) चयन प्रक्रिया के माध्यम से 50 पार्क तक का चयन किया जाएगा।
  • पात्रता और भूमि आवश्यकताएं: राज्यों को कम से कम 100 एकड़ सन्निहित भूमि (contiguous land) (पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में 25 एकड़) प्रदान करनी होगी। कुछ पार्क 1,000 एकड़ तक के हो सकते हैं। भूमि भार-मुक्त (encumbrance‑free) होनी चाहिए और परियोजना अनुमोदन के तीन महीने के भीतर स्पेशल पर्पज व्हीकल (Special Purpose Vehicle - SPV) को हस्तांतरित की जानी चाहिए।
  • चयन मानदंड (Selection criteria): मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, कोर और सामाजिक बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत, नीतिगत समर्थन और स्थिरता (sustainability) जैसे मापदंडों पर प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाएगा। केवल बेंचमार्क सीमा (benchmark threshold) से ऊपर स्कोर करने वाली परियोजनाओं को ही मंजूरी दी जाएगी।
  • परियोजना कार्यान्वयन (Project implementation): प्रत्येक पार्क को कंपनी अधिनियम, 2013 (Companies Act, 2013) के तहत गठित SPV के माध्यम से विकसित किया जाएगा। SPV में राज्य सरकारें, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (central public sector enterprises) और निजी डेवलपर्स शामिल हो सकते हैं। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (National Industrial Corridor Development Corporation) परियोजना प्रबंधन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
  • वित्तपोषण पैटर्न (Funding pattern): केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता भूमि मूल्य और मील के पत्थर (milestones) की उपलब्धि से जुड़ी इक्विटी के रूप में प्रदान की जाएगी। परियोजनाओं में नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचा, अपशिष्ट जल उपचार (wastewater treatment), सामान्य परीक्षण प्रयोगशालाएं और डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम (digital single‑window systems) शामिल होंगे।
  • निगरानी और शासन (Monitoring and governance): दिशानिर्देशों में जीआईएस-आधारित (GIS‑based) निगरानी, ​​आवधिक प्रगति रिपोर्ट (periodic progress reports) और राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति (National Level Steering Committee) द्वारा निरीक्षण की आवश्यकता है। निजी डेवलपर्स को स्पष्ट शासन सुरक्षा उपायों (governance safeguards) के साथ परियोजना-विशिष्ट SPV के माध्यम से भाग लेने के प्रावधान मौजूद हैं।

निष्कर्ष

BHAVYA विश्व स्तर के औद्योगिक पार्क बनाने का एक महत्वाकांक्षी प्रयास है जो नौकरशाही की देरी (bureaucratic delays) के बिना आधुनिक विनिर्माण इकाइयों की मेजबानी कर सकता है। सफलता के लिए पारदर्शी चयन, टिकाऊ बुनियादी ढांचा और निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक है। यदि इसे अच्छी तरह से लागू किया जाता है, तो यह योजना भारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ease of doing business) में सुधार कर सकती है, रोजगार पैदा कर सकती है और घरेलू उद्योगों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (global value chains) में एकीकृत कर सकती है।

स्रोत

Business Standard

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