समाचार में क्यों?
महाराष्ट्र में संरक्षण अधिकारियों (Conservation authorities) ने हाल ही में भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य (Bhimashankar Wildlife Sanctuary) में भारतीय विशाल गिलहरी (Indian giant squirrel) की आबादी का अनुमान लगाने के लिए एक विस्तृत सर्वेक्षण (detailed survey) की घोषणा की। यह सर्वेक्षण पश्चिमी घाट (Western Ghats) के जैव विविधता हॉटस्पॉट (biodiversity hotspots) में से एक में आवास के स्वास्थ्य (habitat health) का आकलन करने और भविष्य के संरक्षण कार्यों का मार्गदर्शन करने में मदद करेगा。
पृष्ठभूमि
भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य (Bhimashankar Wildlife Sanctuary) पुणे के उत्तर में पश्चिमी घाट (Western Ghats) में लगभग 131 square kilometres में फैला है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत 1985 में अधिसूचित, इसे मुख्य रूप से भारतीय विशाल गिलहरी (Ratufa indica elphinstonii) के आवास की रक्षा के लिए स्थापित किया गया था, जो एक वृक्षवासी कृंतक (arboreal rodent) है जो अपने आकर्षक तीन-रंग के फर (three‑coloured fur) के लिए जाना जाता है। अभयारण्य के परिदृश्य (landscape) में लहरदार पहाड़ियाँ (undulating hills), घने सदाबहार (dense evergreen) और अर्ध-सदाबहार (semi‑evergreen) जंगल और घास के मैदान (grasslands) शामिल हैं। नौ आदिवासी गांव (tribal villages) और कई पवित्र उपवन (sacred groves) इसकी सीमाओं के भीतर आते हैं, जो क्षेत्र के सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व (ecological significance) को रेखांकित करते हैं。
वनस्पति और जीव (Flora and fauna)
- भारतीय विशाल गिलहरी (Indian giant squirrel): यह बड़ी पेड़ गिलहरी, जिसे मालाबार विशाल गिलहरी (Malabar giant squirrel) भी कहा जाता है, महाराष्ट्र का राज्य पशु (state animal) है। यह अपना अधिकांश जीवन छतरी (canopy) में बिताती है, पेड़ों के बीच छलांग लगाती है। रंग पैटर्न मैरून (maroon) और भूरे (brown) से लेकर क्रीम (cream) तक भिन्न होते हैं। आवास के नुकसान (Habitat loss) और शिकार (hunting) ने इसकी संख्या कम कर दी है, जिससे संरक्षण के लिए जनसंख्या सर्वेक्षण (population surveys) महत्वपूर्ण हो गए हैं।
- अन्य वन्यजीव (Other wildlife): भीमाशंकर में स्तनधारियों (mammals) का एक समृद्ध समूह है, जिसमें तेंदुए (leopards), सांभर (sambar) और काकड़ (barking deer), सुनहरा सियार (golden jackal), जंगली सूअर (wild boar), आम लंगूर (common langur), रीसस मकाक (rhesus macaque) और भारतीय पैंगोलिन (Indian pangolin) शामिल हैं। स्थानिक सरीसृप (Endemic reptiles) और उभयचर (amphibians) भी मौजूद हैं। अभयारण्य के पवित्र उपवन (sacred groves) दुर्लभ पौधों की प्रजातियों की मेज़बानी करते हैं और आनुवंशिक भंडार (genetic reservoirs) के रूप में कार्य करते हैं।
- सामुदायिक भागीदारी (Community involvement): अभयारण्य में स्थानीय जनजातियों (local tribes) की पारंपरिक प्रथाओं को शामिल किया गया है, जो पवित्र उपवनों का प्रबंधन करते हैं और वन देवताओं (forest deities) की पूजा करते हैं। उनका ज्ञान स्थायी संसाधन प्रबंधन (sustainable resource management) के लिए अमूल्य है।
सर्वेक्षण का महत्व (Significance of the survey)
एक व्यवस्थित जनसंख्या सर्वेक्षण (systematic population survey) भारतीय विशाल गिलहरी की संख्या और वितरण पर बेसलाइन डेटा (baseline data) प्रदान करेगा। यह आवास गलियारों (habitat corridors) और वनों की कटाई (deforestation), मानव-वन्यजीव संघर्ष (human–wildlife conflict) और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों की पहचान करने में मदद करेगा। निष्कर्षों का उपयोग संरक्षण योजनाओं (conservation plans) और इकोटूरिज़्म दिशा-निर्देशों (ecotourism guidelines) को डिज़ाइन करने के लिए किया जा सकता है जो आजीविका के साथ वन्यजीव संरक्षण को संतुलित करते हैं。
निष्कर्ष
भीमाशंकर के मिश्रित जंगल और पवित्र उपवन (sacred groves) इसे जैव विविधता का खजाना (treasure house of biodiversity) बनाते हैं। भारतीय विशाल गिलहरी (Indian giant squirrel) जैसी प्रमुख प्रजातियों (flagship species) की रक्षा करने से पश्चिमी घाट (Western Ghats) की पारिस्थितिक अखंडता (ecological integrity) सुरक्षित रहेगी और जंगल पर निर्भर स्थानीय समुदायों (local communities) का समर्थन होगा。