चर्चा में क्यों?
भारत (India) अपनी बिटुमेन (bitumen) की लगभग एक-तिहाई जरूरतों के लिए पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्ताओं (West Asian suppliers) पर निर्भर है। 2026 की शुरुआत में क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनावों (geopolitical tensions) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से शिपिंग को बाधित कर दिया। भारतीय आयात (Indian imports) अप्रैल 2025 में 2.97 लाख टन से गिरकर अप्रैल 2026 में 2.36 लाख टन हो गया, और खपत (consumption) एक तिहाई गिर गई। सड़क ठेकेदारों (Road contractors) को आपूर्ति की कमी और कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ा, जिससे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India) को राहत उपाय (relief measures) पेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
पृष्ठभूमि
बिटुमेन (Bitumen) कच्चे तेल (crude oil) के आसवन से उत्पादित एक काला, चिपचिपा पदार्थ (viscous material) है। उत्तरी अमेरिका (North America) में इसे डामर सीमेंट (asphalt cement) या डामर बाइंडर (asphalt binder) कहा जाता है। बिटुमेन गर्म होने पर नरम हो जाता है लेकिन कमरे के तापमान (room temperature) पर गैर-वाष्पशील (non-volatile) होता है। इसकी विशिष्ट संरचना (composition) 79-88 प्रतिशत कार्बन (carbon), 7-13 प्रतिशत हाइड्रोजन (hydrogen) और सल्फर (sulphur) निशान से 8 प्रतिशत तक और ऑक्सीजन (oxygen) 2-8 प्रतिशत है, जिसमें नाइट्रोजन (nitrogen) की थोड़ी मात्रा और वैनेडियम (vanadium) और निकल (nickel) जैसी ट्रेस धातुएं (trace metals) होती हैं। क्योंकि यह चिपचिपा (sticky) और पानी प्रतिरोधी (water-resistant) है, बिटुमेन का व्यापक रूप से सड़क निर्माण (road construction) और छत (roofing) में बाइंडर (binder) के रूप में उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग प्राचीन काल (ancient times) से किया जाता रहा है; सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley civilisation) ने टैंकों और स्नानघरों (tanks and baths) को जलरोधी (waterproof) बनाने के लिए प्राकृतिक बिटुमेन का उपयोग किया।
आपूर्ति व्यवधान का प्रभाव
- आयात निर्भरता (Import dependency): भारत को हर साल लगभग 90 लाख टन बिटुमेन (bitumen) की आवश्यकता होती है। घरेलू रिफाइनरियां (Domestic refineries) लगभग 54 लाख टन की आपूर्ति करती हैं, जिससे 30-40 प्रतिशत की कमी रह जाती है जिसे आयात (imported) किया जाना चाहिए। लगभग सभी आयात (imports) इराक (Iraq), संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates), ईरान (Iran), ओमान (Oman) और बहरीन (Bahrain) से आते हैं।
- उपलब्धता में कमी (Reduced availability): पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia conflict) के दौरान आयात में भारी गिरावट आई। खपत (Consumption) में भी गिरावट आई क्योंकि निर्माण फर्मों (construction firms) ने अनिश्चित आपूर्ति के कारण सड़क के काम में देरी की।
- राजमार्ग परियोजनाओं को खतरा (Highway projects at risk): भारत (India) का लक्ष्य सालाना 10,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग (national highways) बनाना है। बिटुमेन की कमी इस लक्ष्य को खतरे में डालती है और सड़क विस्तार (road expansion) की गति को धीमा कर सकती है।
- राहत के उपाय (Relief measures): भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India) ने कुछ अनुबंधों में अप्रत्याशित घटना खंड (force majeure clauses) लागू किए हैं और ठेकेदारों (contractors) को अप्रत्याशित लागत वृद्धि से बचाने के लिए मूल्य समायोजन (price adjustments) की अनुमति दी है।
- विकल्पों की आवश्यकता (Need for alternatives): शोधकर्ता कृषि अवशेषों (agricultural residues) और पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक (recycled plastics) से बायो-बिटुमेन (bio-bitumen) की खोज कर रहे हैं। आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने (Diversifying suppliers) और घरेलू उत्पादन (domestic production) बढ़ाने से भी अस्थिर विदेशी बाजारों (volatile foreign markets) पर निर्भरता कम हो सकती है।
निष्कर्ष
बिटुमेन (Bitumen) आधुनिक सड़कों का गोंद है। आपूर्ति में व्यवधान का बुनियादी ढांचे (infrastructure) और आर्थिक गतिविधियों (economic activity) पर गहरा प्रभाव पड़ता है। भारत (India) को अपने राजमार्ग कार्यक्रम (highway programme) को पटरी पर रखने के लिए घरेलू रिफाइनिंग क्षमता (domestic refining capacity) में निवेश करना चाहिए, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प (environmentally friendly substitutes) विकसित करना चाहिए और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) के लचीलेपन में सुधार करना चाहिए।