समाचार में क्यों?
10–11 जून 2026 को भारत ने अपने बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (multi-layered ballistic missile defence - BMD) प्रणाली के उड़ान परीक्षणों की एक श्रृंखला सफलतापूर्वक आयोजित की। इन परीक्षणों में Naval Anti-Ship Missile – Medium Range (NASM-MR) की पहली उड़ान शामिल थी। रक्षा अधिकारियों ने इन परीक्षणों को समुद्री और रणनीतिक निवारण (strategic deterrence) के लिए एक मील का पत्थर बताया।
पृष्ठभूमि
भारत 2000 के दशक की शुरुआत से दो-स्तरीय BMD प्रणाली विकसित कर रहा है। निचला स्तर वायुमंडल के अंदर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों (surface-to-air missiles) का उपयोग करता है। ऊपरी स्तर वायुमंडल के बाहर खतरों को नष्ट करने के लिए उच्च ऊंचाई वाले इंटरसेप्टर (interceptors) का उपयोग करता है। NASM-MR एक सभी मौसम (all-weather) वाली क्रूज मिसाइल (cruise missile) है जिसे DRDO द्वारा लगभग 350 किलोमीटर की दूरी पर दुश्मन के युद्धपोतों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मुख्य विवरण
- NASM-MR का वजन लगभग 600 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 5.2 मीटर है। यह 150 किलोग्राम का वारहेड (warhead) ले जाता है।
- यह मिसाइल एक ठोस रॉकेट बूस्टर (solid rocket booster) और टर्बोफैन इंजन (turbofan engine) द्वारा संचालित होती है, जो इसे लगभग Mach 0.9 की सबसोनिक गति (subsonic speed) देती है।
- इसे युद्धपोतों, पनडुब्बियों और विमान वाहक-आधारित विमानों जैसे MiG-29K से लॉन्च किया जा सकता है।
- जून के परीक्षणों के दौरान, BMD इंटरसेप्टर ने पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर दोनों जगह लक्ष्य मिसाइलों को नष्ट कर दिया।
- सफल परीक्षण NASM-MR को शामिल करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं और भारत की बहु-स्तरीय वायु रक्षा क्षमता (air defence capability) को मजबूत करते हैं।
निष्कर्ष
संयुक्त BMD और NASM-MR परीक्षण स्वदेशी रक्षा तकनीक (indigenous defence technology) विकसित करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं। एक मजबूत एंटी-शिप मिसाइल (anti-ship missile) और बहु-स्तरीय ढाल (multi-layered shield) निवारण को बढ़ाएगी, तटीय संपत्तियों की रक्षा करेगी और समुद्री अभियानों का समर्थन करेगी।
स्रोत: Republic