समाचार में क्यों?
अप्रैल 2026 के अंत में इज़राइल (Israel) ने अपने महत्वाकांक्षी Operation Wings of Dawn के हिस्से के रूप में भारत से Bnei Menashe समुदाय के 250 से अधिक सदस्यों को तेल अवीव (Tel Aviv) के लिए उड़ान भरी। सरकार द्वारा वित्त पोषित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों मणिपुर और मिज़ोरम में रहने वाले शेष 6,000 Bnei Menashe लोगों को 2030 तक इज़राइल लाना है।
पृष्ठभूमि
Bnei Menashe एक जातीय समूह है जो बाइबिल के 'Manasseh' की जनजाति से वंशज होने का दावा करता है, जो इज़राइल की दस "खोई हुई जनजातियों" (lost tribes) में से एक है। मौखिक परंपराओं के अनुसार, 8वीं शताब्दी ईसा पूर्व (BCE) में उत्तरी इज़राइल साम्राज्य की असीरियन विजय के बाद उनके पूर्वज पूर्व की ओर चले गए। सदियों से उन्होंने फारस, अफगानिस्तान, तिब्बत और चीन के माध्यम से यात्रा की और वर्तमान मणिपुर और मिज़ोरम की पहाड़ियों में बस गए। ईसाई मिशनरियों ने बाद में कई लोगों को प्रोटेस्टेंटवाद (Protestantism) में परिवर्तित कर दिया, लेकिन समुदाय ने कुछ यहूदी रीति-रिवाजों को बरकरार रखा, जिसमें कोषेर शैली (kosher-style) के भोजन प्रतिबंध और सब्त (Sabbath) को याद रखना शामिल है।
पहचान और धार्मिक अभ्यास
- समुदाय का नाम: भारत में उन्हें शिनलुंग (Shinlung) लोगों के नाम से भी जाना जाता है। "Bnei Menashe" शब्द का अर्थ है "Manasseh के पुत्र"।
- आबादी: लगभग 10,000 Bnei Menashe मणिपुर और मिजोरम में रहते हैं। 1990 के दशक के बाद से लगभग 4,000 लोग पहले ही इज़राइल चले गए हैं।
- धर्मांतरण और अलियाह (Aliyah): वापसी के कानून (Law of Return) के तहत इजरायली नागरिकता प्राप्त करने के लिए, Bnei Menashe प्रवासियों को यहूदी धर्म में औपचारिक रूप से परिवर्तित होना पड़ता है। गैर-लाभकारी संगठन Shavei Israel उनके आप्रवास को सुविधाजनक बनाता है, हिब्रू (Hebrew) पाठ और धार्मिक शिक्षा प्रदान करता है।
- बसावट और सेवा: नए आगमन को नोफ हागलिल (Nof Hagalil) जैसे अवशोषण केंद्रों (absorption centres) में रखा जाता है, जहाँ वे हिब्रू सीखते हैं और इज़राइली समाज में एकीकृत होते हैं। कई युवा Bnei Menashe Israel Defense Forces में काम करते हैं।
Operation Wings of Dawn
नवंबर 2025 में इजरायली सरकार ने पांच वर्षों में भारत से लगभग 6,000 Bnei Menashe को स्थानांतरित करने की योजना को मंजूरी दी। हर साल लगभग 1,200 लोगों को इज़राइल के लिए उड़ान भरी जाएगी। इस ऑपरेशन में हवाई किराया, धर्मांतरण कक्षाएं, आवास और सामाजिक समर्थन के लिए धन शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस पहल के तहत पहला बड़ा समूह अप्रैल 2026 में इज़राइल पहुंचा। साल में आगे और उड़ानों की योजना है।
महत्व
Bnei Menashe के लिए, आप्रवासन (immigration) उन्हें स्वतंत्र रूप से यहूदी धर्म का अभ्यास करने और पहले से ही वहां चले गए रिश्तेदारों के साथ फिर से जुड़ने का मौका देता है। इज़राइल उनकी वापसी को एक प्राचीन डायस्पोरा (diaspora) के एकत्रीकरण और एक जनसांख्यिकीय बढ़ावा (demographic boost) के रूप में देखता है। हालांकि, प्रवासन ने सांस्कृतिक अनुकूलन, भारत में राजनीतिक संवेदनशीलता और पैतृक दावों की प्रामाणिकता पर बहस को लेकर भी जांच का सामना किया है।
स्रोत: The Hindu