चर्चा में क्यों?
बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (Biotechnology Research and Innovation Council - BRIC) के रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड की पहली बैठक 27-28 मार्च 2026 को हुई। 14 स्वायत्त संस्थानों (autonomous institutions) को एक छतरी के नीचे लाकर भारत के जैव प्रौद्योगिकी परिदृश्य (biotechnology landscape) को बदलने की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए वैज्ञानिक और नीति निर्माता दिल्ली में एकत्र हुए।
पृष्ठभूमि (Background)
BRIC को 2023 में जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology) के 14 शोध संस्थानों का विलय करके बनाया गया था। इस एकीकरण का उद्देश्य दोहराव को कम करना, सहयोग को प्रोत्साहित करना और एक सामंजस्यपूर्ण राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला बनाना है। रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड (Research Advisory Board - RAB), जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात जीवविज्ञानी प्रो. के. विजयराघवन कर रहे हैं, अनुसंधान दिशा-निर्देशों का मार्गदर्शन करता है और प्रगति की निगरानी करता है।
बैठक की मुख्य बातें
- राष्ट्रीय मिशन (National missions): प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी (industrial biotechnology) में चुनौतियों से निपटने के लिए महत्वाकांक्षी मिशन प्रस्तावित किए। लक्ष्य भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (bio-economy) को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
- साझा बुनियादी ढांचा (Shared infrastructure): RAB ने बायोफाउंड्री (biofoundries), हाई-थ्रूपुट स्क्रीनिंग प्लेटफॉर्म और बायोमैन्युफैक्चरिंग हब जैसी सामान्य सुविधाओं के निर्माण पर जोर दिया, जो सभी सदस्य संस्थानों के लिए सुलभ हों।
- किफायती नवाचार (Frugal innovation): शोधकर्ताओं को स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्रियों का उपयोग करके लागत प्रभावी (cost-effective) प्रौद्योगिकियां विकसित करने और संप्रभु निर्माण क्षमताओं (sovereign manufacturing capabilities) को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
- ओपन साइंस (Open science): परिषद नवाचार को तेज करने और दोहराव से बचने के लिए ज्ञान, डेटा और जैविक संसाधनों को खुले तौर पर साझा करने की वकालत करती है।
महत्व (Significance)
BRIC में अपने युवा कार्यबल, समृद्ध जैव विविधता और बढ़ते डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ उठाकर भारत को वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी पावरहाउस में बदलने की क्षमता है। अनुसंधान का समन्वय करके और राष्ट्रीय मिशनों पर ध्यान केंद्रित करके, इसका उद्देश्य खोज से लेकर तैनाती तक के मार्ग को छोटा करना है। बैठक ने विभिन्न विषयों में सहयोग, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnerships) और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।