चर्चा में क्यों?
26 मार्च 2026 को, राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) और नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज (NCBS) ने बेंगलुरु में CALM-Brain डिजिटल रिपॉजिटरी का अनावरण किया। यह मंच प्रमुख मनोरोग विकारों (psychiatric disorders) में अनुसंधान को गति देने के लिए ब्रेन-इमेजिंग और नैदानिक डेटा संग्रहीत करता है।
पृष्ठभूमि
CALM-Brain रोहिणी नीलेकणि सेंटर फॉर ब्रेन एंड माइंड (Rohini Nilekani Centre for Brain and Mind) का हिस्सा है, जो NIMHANS और NCBS के बीच एक सहयोग है जिसे रोहिणी नीलेकणि फिलैंथ्रोपीज द्वारा समर्थित किया गया है। यह स्टेम सेल का उपयोग करके मस्तिष्क विकारों में खोज के लिए त्वरक कार्यक्रम (Accelerator Program for Discovery in Brain disorders using Stem cells - ADBS) पर आधारित है, जो 2016 में शुरू हुआ था और जिसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology) और प्रतीक्षा ट्रस्ट द्वारा वित्त पोषित किया गया था। मानसिक बीमारियों से जुड़े मस्तिष्क परिवर्तनों को समझने के लिए ADBS ने रोगियों और स्वस्थ स्वयंसेवकों पर मल्टी-मॉडल डेटा एकत्र किया।
CALM-Brain प्लेटफॉर्म इस डेटा को दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाता है। यह ओपन साइंस की ओर एक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जहां खोजों और व्यक्तिगत उपचारों को बढ़ावा देने के लिए बड़े डेटासेट साझा किए जाते हैं।
प्रमुख विशेषताएं
- मल्टी-मॉडल डेटा: रिपॉजिटरी में मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI), फंक्शनल नियर-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी, इलेक्ट्रो-एन्सेफेलोग्राम (EEG) रिकॉर्डिंग, जेनेटिक जानकारी और नैदानिक आकलन शामिल हैं। इन तौर-तरीकों के संयोजन से शोधकर्ताओं को मस्तिष्क की संरचना और कार्य दोनों का अध्ययन करने में मदद मिलती है।
- पांच विकारों पर ध्यान: CALM-Brain शुरुआत में व्यसन (addiction), बाइपोलर डिसऑर्डर (bipolar disorder), मनोभ्रंश (dementia), ऑब्सेसिव-कम्पलसिव डिसऑर्डर (OCD) और सिज़ोफ्रेनिया (schizophrenia) पर केंद्रित है। इन स्थितियों को इसलिए चुना गया क्योंकि ये भारी बोझ डालती हैं और इनमें जैविक मार्ग समान होते हैं।
- ओपन एक्सेस: शोधकर्ता अज्ञात डेटा तक पहुंचने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे क्रॉस-इंस्टीट्यूशनल अध्ययन सक्षम हो सकते हैं। यह मंच सहयोग को प्रोत्साहित करता है और इसमें बड़े डेटासेट का विश्लेषण करने के लिए अंतर्निहित टूल हैं।
- नैदानिक प्रभाव (Clinical impact): समय के साथ रोगियों को ट्रैक करके, CALM-Brain का उद्देश्य रोग की शुरुआत और प्रगति के बायोमार्कर की पहचान करना है। इससे पहले निदान और व्यक्तिगत उपचार योजनाएँ बनाई जा सकती हैं।
भारत के लिए महत्व
भारत में मानसिक स्वास्थ्य विकारों का अक्सर कम निदान किया जाता है और उन पर कम शोध किया जाता है। CALM-Brain न्यूरोसाइंस अनुसंधान के लिए घरेलू क्षमता निर्माण में एक बड़ी छलांग का प्रतिनिधित्व करता है। यह इस बात का भी उदाहरण है कि कैसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (public-private partnerships) ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण कर सकती है जिससे वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को लाभ हो।