खबरों में क्यों?
भारत के कुछ हिस्सों में वन्यजीव अधिकारियों और पशु चिकित्सकों ने आवारा कुत्तों और जंगली मांसाहारियों के बीच कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के मामलों में वृद्धि की सूचना दी है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर क्षेत्र में सियार, लोमड़ी और सिवेट बिल्लियों (civet cats) में संदिग्ध मामले देखे गए हैं, जिससे घरेलू कुत्तों से वन्यजीवों में इसके फैलने की चिंता बढ़ गई है। यह प्रकोप आवारा कुत्तों के टीकाकरण (vaccination) और प्रबंधन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
कैनाइन डिस्टेंपर (Canine distemper) एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो एक पैरामाइक्सोवायरस (paramyxovirus) के कारण होती है, जो खसरा (measles) और रिंडरपेस्ट (rinderpest) का कारण बनने वाले वायरस से निकटता से संबंधित है। यह घरेलू कुत्तों और लोमड़ियों, भेड़ियों, फेरेट्स, रैकून, सिवेट और यहां तक कि कुछ बड़ी बिल्लियों (large cats) सहित जंगली मांसाहारियों (wild carnivores) की एक विस्तृत श्रृंखला को प्रभावित करता है। संक्रमण मुख्य रूप से एरोसोल बूंदों (aerosol droplets) के माध्यम से फैलता है जब संक्रमित जानवर खांसते या छींकते हैं। वायरस पहले श्वसन तंत्र (respiratory system) में प्रतिकृति (replicates) बनाता है और फिर रक्तप्रवाह के माध्यम से लसीका ऊतकों (lymphatic tissues), जठरांत्र संबंधी मार्ग (gastrointestinal tract) और तंत्रिका तंत्र में फैलता है।
लक्षण और प्रगति
- प्रारंभिक लक्षण: कुत्तों को आमतौर पर संक्रमण के एक सप्ताह के भीतर बुखार आ जाता है। इसके साथ ही सुस्ती, भूख में कमी और नाक या आंख से स्राव (discharge) हो सकता है।
- श्वसन और पाचन संबंधी समस्याएं: जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, जानवरों को खांसी, निमोनिया, उल्टी और दस्त हो सकते हैं। माध्यमिक जीवाणु संक्रमण (Secondary bacterial infections) अक्सर इन लक्षणों को जटिल बना देते हैं।
- न्यूरोलॉजिकल प्रभाव: कुछ जानवरों में मांसपेशियों का फड़कना, दौरे, सिर का झुकना या लकवा विकसित हो जाता है क्योंकि वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। ये लक्षण प्रारंभिक संक्रमण के हफ्तों बाद दिखाई दे सकते हैं।
- परिणाम: बीमारी की गंभीरता अलग-अलग होती है। कुछ जानवर सहायक देखभाल (supportive care) से ठीक हो जाते हैं, लेकिन अन्य, विशेष रूप से न्यूरोलॉजिकल भागीदारी वाले, दम तोड़ सकते हैं। जीवित रहने वाले लोग दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं।
वन्यजीवों पर प्रभाव
- कुत्तों से फैलाव: घरेलू और जंगली कुत्ते वायरस के भंडार (reservoirs) के रूप में कार्य करते हैं। जब जंगलों और घास के मैदानों के पास आवारा कुत्तों की आबादी बढ़ती है, तो वे जंगली मांसाहारियों को CDV संचारित कर सकते हैं। संभाजीनगर क्षेत्र में, आवारा कुत्तों को नीलगाय, काले हिरण (blackbuck) और लंगूरों का शिकार करते हुए भी देखा गया है, जो संरक्षण संबंधी चिंताओं को और बढ़ा देता है।
- आनुवंशिक प्रदूषण (Genetic pollution): जंगली कुत्ते भेड़ियों के साथ प्रजनन (interbreed) कर सकते हैं, जिससे संभावित रूप से जंगली आबादी की आनुवंशिक अखंडता (genetic integrity) बदल सकती है। रोग संचरण के साथ मिलकर, यह पहले से ही कमजोर प्रजातियों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है।
- प्रबंधन उपाय: घरेलू कुत्तों का टीकाकरण करना, आवारा आबादी की नसबंदी (sterilising) करना और अपशिष्ट प्रबंधन में सुधार करने से संक्रमण के भंडार को कम किया जा सकता है। वन्यजीव अभ्यारण्यों में प्रकोप को रोकने के लिए नियमित निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया (rapid response) महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
कैनाइन डिस्टेंपर कुत्तों की बीमारी से कहीं अधिक है; यह एक पारिस्थितिक समस्या है जो घरेलू जानवरों, वन्यजीवों और मानव समुदायों को जोड़ती है। प्रकोपों को दूर करने के लिए पालतू जानवरों और लुप्तप्राय वन्यजीवों (endangered wildlife) दोनों की रक्षा के लिए समन्वित टीकाकरण अभियान (coordinated vaccination campaigns), आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करना और जन जागरूकता की आवश्यकता है।
स्रोत: The Hindu