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CARA Guidelines: गोद लेने की प्रक्रिया, बाल कल्याण और किशोर न्याय अधिनियम

CARA Guidelines: गोद लेने की प्रक्रिया, बाल कल्याण और किशोर न्याय अधिनियम

चर्चा में क्यों?

16 मार्च 2026 को केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (Central Adoption Resource Authority - CARA) ने गोद लेने (adoption) की प्रक्रियाओं में सुधार, अभिलेखों (records) की सुरक्षा और बच्चों की पहचान की रक्षा के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी निर्देशों की एक श्रृंखला जारी की।

पृष्ठभूमि

CARA महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) के तहत एक वैधानिक निकाय (statutory body) है। अनाथ (orphaned), परित्यक्त (abandoned) और आत्मसमर्पित (surrendered) बच्चों को गोद लेने को विनियमित (regulate) और निगरानी करने के लिए इसे किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (Juvenile Justice Act, 2015) की धारा 68 के तहत स्थापित किया गया था। यह प्राधिकरण अंतर-देशीय दत्तक ग्रहण (Inter-country Adoption) पर हेग कन्वेंशन (Hague Convention) के तहत भारत के केंद्रीय निकाय के रूप में कार्य करता है और विशेष दत्तक एजेंसियों (specialised adoption agencies) और राज्य-स्तरीय निकायों के नेटवर्क के माध्यम से कार्य करता है।

जारी किए गए प्रमुख निर्देश

  • बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी रूप से मुक्त करने की समय पर घोषणा: राज्यों और बाल कल्याण समितियों (child welfare committees) को बच्चों को कानूनी रूप से मुक्त (legally free) घोषित करते समय सख्त समय-सीमा (strict timelines) का पालन करना चाहिए। जैविक माता-पिता (biological parents) का पता लगाने और पुनर्वास विकल्पों (rehabilitation options) का पता लगाने के प्रयास दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 10-60 दिनों के भीतर और बड़े बच्चों के लिए 60-90 दिनों के भीतर पूरे किए जाने चाहिए।
  • गोद लेने के रिकॉर्ड की सुरक्षित रखना: CARA ने सभी राज्यों और दत्तक एजेंसियों (adoption agencies) को निर्देश दिया कि वे गोद लेने के रिकॉर्ड (adoption records) को सुरक्षित रूप से संरक्षित करें। रिकॉर्ड को डिजिटल किया जाना चाहिए और कम से कम 30 वर्षों तक रखा जाना चाहिए ताकि गोद लिए गए व्यक्ति बाद में अपनी उत्पत्ति का पता लगाने के लिए "मूल खोज (root searches)" कर सकें।
  • बच्चों की पहचान की गोपनीयता (Confidentiality): निर्देश इस बात पर जोर देते हैं कि बच्चों और जैविक माता-पिता की पहचान गोपनीय (confidential) रहनी चाहिए। गोद लेने वाली एजेंसियों और सरकारी विभागों को किसी भी पहचान की जानकारी का खुलासा करने से बचना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर्मचारी गोपनीयता प्रोटोकॉल (privacy protocols) का पालन करें।

महत्व

  • स्पष्ट प्रक्रियाएं और समय-सीमाएं देरी को कम करती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि कमजोर बच्चों को समय पर परिवारों के साथ रखा जाए।
  • रिकॉर्ड बनाए रखना संवेदनशील जानकारी की रक्षा करते हुए जीवन में बाद में अपनी उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए गोद लिए गए व्यक्तियों के अधिकारों (rights) का सम्मान करता है।
  • गोपनीयता बच्चों को कलंक (stigma) और अनधिकृत प्रकटीकरण (unauthorised disclosure) से बचाती है, और दत्तक परिवारों (adoptive families) के लिए एक सहायक वातावरण (supportive environment) को बढ़ावा देती है।

निष्कर्ष

CARA के नए निर्देश भारत के दत्तक ग्रहण ढांचे (adoption framework) को मजबूत करते हैं। बच्चों के कल्याण को प्राथमिकता देकर, रिकॉर्ड को संरक्षित करके और गोपनीयता सुनिश्चित करके, दिशा-निर्देशों का उद्देश्य गोद लेने को अधिक पारदर्शी, कुशल और मानवीय बनाना है।

स्रोत: Press Information Bureau

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