चर्चा में क्यों?
पर्यावरण (संरक्षण) द्वितीय संशोधन नियम, 2025 (Environment (Protection) Second Amendment Rules, 2025) ने झिल्ली-सेल तकनीक (membrane-cell technology) का उपयोग करने वाले कास्टिक-सोडा संयंत्रों (caustic-soda plants) के लिए एक नई आवश्यकता पेश की। इन कारखानों को यह प्रदर्शित करना होगा कि 96 घंटों के लिए उनके 100% उपचारित अपशिष्ट जल (treated wastewater) के संपर्क में आने पर कम से कम 90% मछलियाँ जीवित रहती हैं। इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नदियों या झीलों में छोड़े जाने से पहले अपशिष्ट (effluents) गैर-विषाक्त हों।
पृष्ठभूमि
कास्टिक सोडा, या सोडियम हाइड्रॉक्साइड (sodium hydroxide), एक अत्यधिक कास्टिक सफेद ठोस है जिसका उपयोग साबुन, डिटर्जेंट, कागज, कपड़ा और पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। यह पानी और कार्बनिक पदार्थों के साथ हिंसक रूप से प्रतिक्रिया करता है और गंभीर जलन पैदा कर सकता है, इसलिए इसे सावधानी से संभालना आवश्यक है। भारत में, रासायनिक उद्योग (chemical industry) तेजी से बढ़ा है, जिससे नियामकों को जलीय जीवन और डाउनस्ट्रीम समुदायों की रक्षा के लिए प्रदूषण मानकों को कड़ा करने के लिए प्रेरित किया गया है।
नए नियमों के प्रमुख प्रावधान
- मछली उत्तरजीविता परीक्षण (Fish survival test): संयंत्रों को 100% उपचारित अपशिष्ट जल वाले टैंकों में मछलियों को रखकर बायोएसे (bioassay) करना होगा। यदि 96 घंटों के बाद कम से कम 90% मछलियाँ जीवित रहती हैं, तो अपशिष्ट परीक्षण में पास हो जाता है और इसे छोड़ा जा सकता है।
- अपशिष्ट गुणवत्ता मानक (Effluent quality standards): डिस्चार्ज का पीएच (pH) 6.5 और 8.5 के बीच होना चाहिए, क्लोराइड (chloride) का स्तर 250 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए, निलंबित ठोस (suspended solids) 100 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और कुल घुलित ठोस (total dissolved solids) 2,100 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना चाहिए। ये सीमाएं क्षरण (corrosion) को रोकने और जलीय प्रजातियों की रक्षा करने में मदद करती हैं।
- पानी की खपत और अपशिष्ट उत्पादन (Water consumption and effluent generation): प्रत्येक संयंत्र को उत्पादित कास्टिक सोडा के प्रति टन 5 क्यूबिक मीटर से अधिक पानी का उपयोग नहीं करना चाहिए और अपशिष्ट उत्पादन को प्रति टन 1 क्यूबिक मीटर तक सीमित करना चाहिए। संरक्षण निर्माताओं को बंद-लूप प्रणालियों (closed-loop systems) को अपनाने और प्रक्रिया जल को रीसायकल (recycle) करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
- उद्योग का संदर्भ (Industry context): कास्टिक सोडा कई उद्योगों के लिए एक आवश्यक कच्चा माल है, लेकिन अनुपचारित अपशिष्टों में लवण (salts) और क्षार (alkalis) की उच्च सांद्रता होती है। नया मछली उत्तरजीविता परीक्षण (fish survival test) सरल रासायनिक मापों से आगे बढ़ता है और सभी दूषित पदार्थों की संयुक्त विषाक्तता (toxicity) की जांच करता है।
निष्कर्ष
कास्टिक-सोडा संयंत्रों को जैविक परीक्षण (biological test) पास करने की आवश्यकता से, नियामक कारखानों को उनके अपशिष्ट जल के वास्तविक दुनिया के प्रभाव के लिए अधिक जवाबदेह बनाने का इरादा रखते हैं। नए मानक निर्माताओं को बेहतर उपचार प्रौद्योगिकियों (treatment technologies) में निवेश करने, पानी को रीसायकल करने और हानिकारक निर्वहन (discharges) को कम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जलीय जीवन की रक्षा करना न केवल एक नैतिक कर्तव्य है बल्कि मानव स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए भी आवश्यक है।