चर्चा में क्यों?
प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन (Convention on the Conservation of Migratory Species - CMS) के पक्षकारों का 15वां सम्मेलन (COP15) 29 मार्च 2026 को कैम्पो ग्रांडे, ब्राजील में संपन्न हुआ। प्रतिनिधियों ने 40 प्रजातियों को नई या उन्नत सुरक्षा प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की और प्रवासी जानवरों के खतरों को संबोधित करते हुए 39 प्रस्तावों (resolutions) को अपनाया।
पृष्ठभूमि (Background)
बॉन कन्वेंशन (Bonn Convention) के रूप में भी जाना जाने वाला CMS, UNEP ढांचे के तहत 1979 में हस्ताक्षरित एक संयुक्त राष्ट्र संधि है। यह स्थलीय (terrestrial), जलीय (aquatic) और एवियन (avian) प्रजातियों में प्रवासी जानवरों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है। पक्षकार समय-समय पर कार्यान्वयन की समीक्षा करने और परिशिष्ट सूचियों (Appendix lists) को अपडेट करने के लिए मिलते हैं: परिशिष्ट I में लुप्तप्राय प्रजातियां सूचीबद्ध हैं जिन्हें सख्त सुरक्षा की आवश्यकता है, जबकि परिशिष्ट II में उन प्रजातियों को शामिल किया गया है जिनकी संरक्षण स्थिति प्रतिकूल है और जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से लाभ होता है।
COP15 के प्रमुख परिणाम (Key outcomes of COP15)
- प्रजातियों की सूची (Species listings): चीता, धारीदार लकड़बग्घा (striped hyenas), स्नोई उल्लू (snowy owls), विशाल ऊदबिलाव (giant otters) और ग्रेट हैमरहेड शार्क सहित 40 प्रजातियों को निवास स्थान के नुकसान, अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण जनसंख्या में भारी गिरावट के कारण CMS परिशिष्टों में जोड़ा गया था।
- संरक्षण योजनाएं (Conservation plans): अमेज़ॅन जैसे क्षेत्रों के लिए बहु-प्रजाति कार्य योजनाएं (Multi‑species action plans) अपनाई गईं, जिसमें रेंज राज्यों (range states) में समन्वित प्रयासों (coordinated efforts) की आवश्यकता को मान्यता दी गई।
- उभरते खतरों का समाधान (Addressing emerging threats): प्रतिनिधियों ने गहरे समुद्र में खनन (deep‑sea mining), प्लास्टिक प्रदूषण, पानी के नीचे के शोर, अवैध वन्यजीव हत्या और मत्स्य पालन बायकैच (fisheries bycatch) के खतरों पर प्रकाश डाला, और संरक्षण उपायों में विज्ञान के साथ स्वदेशी ज्ञान को एकीकृत करने पर जोर दिया।
- प्रवासी प्रजातियों की स्थिति रिपोर्ट (State of Migratory Species Report): एक अंतरिम रिपोर्ट (interim report) से पता चला है कि लगभग आधी निगरानी वाली प्रवासी आबादी में गिरावट आ रही है और लगभग 24 प्रतिशत को विलुप्त होने के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, जो बढ़ी हुई सुरक्षा की तात्कालिकता को रेखांकित करता है।
महत्व (Significance)
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (International cooperation): परिशिष्टों में प्रजातियों को जोड़ने से रिकवरी योजनाओं के लिए वैश्विक समर्थन जुटाया जाता है और रेंज राज्यों के बीच सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया जाता है।
- समग्र संरक्षण (Holistic conservation): जलवायु परिवर्तन और प्लास्टिक प्रदूषण जैसे खतरों को पहचानने से व्यापक रणनीतियों को बढ़ावा मिलता है जो निवास स्थान की सुरक्षा, स्थायी मत्स्य पालन और प्रदूषण नियंत्रण को मिलाती हैं।
- भारत में जागरूकता (Awareness in India): भारत, जो CMS का एक पक्षकार है, कई प्रवासी प्रजातियों की मेजबानी करता है; COP15 के परिणाम वन्यजीव गलियारों (wildlife corridors), समुद्री प्रदूषण और नवीकरणीय ऊर्जा विकास (renewable energy development) पर राष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित करते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
COP15 ने प्रजातियों की सुरक्षा का विस्तार करके और उभरते खतरों को संबोधित करके प्रवासी जानवरों की सुरक्षा में एक कदम आगे बढ़ाया। राष्ट्रीय सीमाओं को पार करने वाली प्रजातियों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान द्वारा सूचित देशों के बीच निरंतर सहयोग महत्वपूर्ण होगा।