खबरों में क्यों?
मार्च 2026 में बजट सत्र के दौरान, कृषि राज्य मंत्री ने संसद को बताया कि भारत दुनिया के नारियल उत्पादन (coconut production) में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और लगभग 30 मिलियन आजीविका (livelihoods) का समर्थन करता है। उन्होंने केंद्रीय बजट 2026-27 में एक नई नारियल संवर्धन योजना (Coconut Promotion Scheme) की भी घोषणा की, जिसका उद्देश्य पुराने पेड़ों को फिर से लगाना और नारियल, काजू और कोको जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों (high-value crops) को बढ़ावा देना है।
पृष्ठभूमि
नारियल उष्णकटिबंधीय तटीय क्षेत्रों (tropical coastlands) की एक प्रमुख वृक्ष फसल है। भारत में लगभग 2.165 मिलियन हेक्टेयर में नारियल की खेती होती है और हर साल लगभग 21.3 बिलियन नारियल का उत्पादन होता है, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन जाता है। भारत में इस पेड़ को कल्पवृक्ष (Kalpavriksha) (इच्छा पूरी करने वाला पेड़) के रूप में पूजा जाता है क्योंकि इसके हर हिस्से - पानी, गिरी, छिलका और पत्तियां - का उपयोग किया जा सकता है। प्रमुख नारियल उत्पादक राज्यों में केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश शामिल हैं, हालांकि गोवा और ओडिशा जैसे राज्य भी ताड़ की खेती करते हैं। सफल वैज्ञानिक खेती प्रथाओं (scientific farming practices) को दर्शाते हुए कर्नाटक ने हाल ही में भारत के शीर्ष उत्पादक के रूप में केरल को पीछे छोड़ दिया है।
पारिस्थितिकी और खेती
- जलवायु: नारियल एक उष्णकटिबंधीय पौधा है जो मुख्य रूप से 20° N और 20° S के बीच उगाया जाता है। यह लगभग 600 मीटर की ऊंचाई तक नम तटों (humid coasts) पर पनपता है। इष्टतम तापमान 60 प्रतिशत से अधिक सापेक्ष आर्द्रता (relative humidity) और सालाना लगभग 2,000 मिमी अच्छी तरह से वितरित वर्षा (well-distributed rainfall) के साथ 27 ± 5 डिग्री सेल्सियस के आसपास है।
- मिट्टी: ताड़ कई प्रकार की मिट्टी - रेतीली से लेकर लाल दोमट (red loams) तक - के अनुकूल हो जाता है, लेकिन इसके लिए अच्छी जल निकासी की आवश्यकता होती है। तटीय जलोढ़ (Coastal alluvium) और लाल रेतीली दोमट मिट्टी (red sandy loam) आदर्श हैं।
- उपयोग: नारियल खाने योग्य तेल, पानी, दूध और रस्सियों व मैट के लिए कॉयर (coir) प्रदान करता है। पत्तियों का उपयोग छप्पर (thatching) के लिए और छिलकों का उपयोग ईंधन के लिए किया जाता है। हिंदू अनुष्ठानों (Hindu rituals) और त्योहारों में भी ताड़ का महत्व है।
- संवर्धन योजना: 2026 का बजट पुराने पेड़ों (senile trees) को उच्च उपज वाले संकर (high-yielding hybrids) से बदलने के लिए धन आवंटित करता है और मूल्य वर्धित उत्पादों (value-added products) को अपनाने में किसानों का समर्थन करता है। यह योजना उच्च मूल्य वाली फसलों (high-value crops) के लिए ₹350 करोड़ के परिव्यय का हिस्सा है।
महत्व
- नारियल की खेती कॉयर और तेल उद्योगों में लाखों किसानों, महिला सहकारी समितियों और श्रमिकों को बनाए रखती है।
- वैश्विक उत्पादन में भारत का बड़ा हिस्सा इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में एक प्रमुख खिलाड़ी बनाता है। उत्पादकता और मूल्यवर्धन (value addition) बढ़ाने से निर्यात आय बढ़ेगी।
- संवर्धन योजना का उद्देश्य वृक्षारोपण को फिर से जीवंत करना और जलवायु-अनुकूल कृषि (climate-resilient agriculture) का समर्थन करते हुए उत्पादकों के लिए आय सुरक्षा में सुधार करना है।
स्रोत: PIB