पर्यावरण

Cyrtodactylus jayadityai: बेंट-टोड गेको, त्रिपुरा और पूर्वी हिमालय

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खबरों में क्यों?

पूर्वोत्तर भारत और जर्मनी के शोधकर्ताओं ने उत्तरी त्रिपुरा (North Tripura) के तराई के जंगलों (lowland forests) से बेंट-टोड गेको (bent-toed gecko) की एक नई प्रजाति का वर्णन किया है। सिर्टोडैक्टाइलस जयदित्याई (Cyrtodactylus jayadityai) नाम की यह छिपकली जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र से खोजों की बढ़ती सूची में इजाफा करती है और प्रसिद्ध हेरपेटोलॉजिस्ट (herpetologist) डॉ. जयदित्य पुरकायस्थ को सम्मानित करती है।

पृष्ठभूमि

बेंट-टोड गेको (सिर्टोडैक्टाइलस प्रजाति - Cyrtodactylus spp.) दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाई जाने वाली छोटी छिपकलियों का एक विविध समूह है। नई वर्णित प्रजाति की खोज उत्तरी त्रिपुरा में क्षेत्रीय सर्वेक्षणों (field surveys) के दौरान की गई थी और इसे अप्रैल 2026 में यूरोपियन जर्नल ऑफ टैक्सोनॉमी (European Journal of Taxonomy) में औपचारिक रूप से वर्णित किया गया था। वैज्ञानिकों ने इसे निकट से संबंधित प्रजातियों से अलग करने के लिए आकारिकी (morphology) और डीएनए (DNA) विश्लेषणों के संयोजन वाले एक एकीकृत दृष्टिकोण का उपयोग किया।

प्रमुख विशेषताएं

  • रंग-रूप: इस गेको का शरीर पतला (slender body), लंबी पूंछ और पीठ पर भूरे और बेज रंग की धारियां होती हैं। सिर और किनारों पर काले धब्बों का एक विशिष्ट पैटर्न इसे इसके रिश्तेदारों से अलग करता है।
  • आवास (Habitat): यह उत्तरी त्रिपुरा के कम ऊंचाई वाले सदाबहार जंगलों (low‑elevation evergreen forests) में निवास करती है। प्रजातियों को पेड़ों के तनों (tree trunks) और पत्तों के कूड़े के बीच देखा गया, जो अर्ध-वृक्षीय (semi‑arboreal) जीवन शैली का संकेत देता है।
  • आनुवंशिक भिन्नता (Genetic divergence): डीएनए अध्ययनों से पता चलता है कि यह प्रजाति अपने निकटतम ज्ञात रिश्तेदार से लगभग 4.7-5.2 प्रतिशत भिन्न है, जो एक अलग प्रजाति के रूप में इसकी स्थिति का समर्थन करता है।
  • संरक्षण की स्थिति: चूंकि यह एक ही इलाके से जानी जाती है, शोधकर्ता इसे IUCN रेड लिस्ट (IUCN Red List) में डेटा की कमी (Data Deficient) के रूप में वर्गीकृत करने का सुझाव देते हैं, जब तक कि आगे के सर्वेक्षण इसके वितरण का आकलन न कर लें।

महत्व

  • जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity hotspot): यह खोज पूर्वोत्तर भारत से दर्ज सिर्टोडैक्टाइलस प्रजातियों की संख्या को बढ़ाकर 31 कर देती है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध और कम खोजी गई जैव विविधता को रेखांकित करती है।
  • संरक्षण के निहितार्थ: नई खोजी गई और स्थानिक प्रजातियों (endemic species) को आवास के नुकसान और विखंडन (fragmentation) से बचाने के लिए त्रिपुरा में तराई के जंगलों (lowland forests) की रक्षा करना महत्वपूर्ण है।
  • वैज्ञानिक सहयोग: यह एकीकृत शोध भारत के जीवों के दस्तावेजीकरण और संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के साथ स्थानीय क्षेत्रीय कार्यों (fieldwork) को संयोजित करने के महत्व पर प्रकाश डालता है।

स्रोत: The Hindu

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