पर्यावरण

Dalma Wildlife Sanctuary: झारखंड, एशियाई हाथी और इको-टूरिज्म

Dalma Wildlife Sanctuary: झारखंड, एशियाई हाथी और इको-टूरिज्म

चर्चा में क्यों?

झारखंड पर्यटन विभाग ने हाल ही में जमशेदपुर के पास दलमा वन्यजीव अभयारण्य (Dalma Wildlife Sanctuary) में जंगल सफारी (jungle safari) और पर्यावरण-कॉटेज (eco‑cottages) शुरू किए हैं। सुविधाओं का उद्देश्य संरक्षण के लिए राजस्व पैदा करते हुए पर्यावरण-पर्यटन (eco‑tourism) को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

1975 में स्थापित, दलमा वन्यजीव अभयारण्य झारखंड के पूर्वी सिंहभूम (East Singhbhum) और सरायकेला-खरसावां (Saraikela‑Kharsawan) जिलों में लगभग 193 वर्ग किलोमीटर में फैला है। अभयारण्य का नाम स्थानीय देवी दलमा माई (Dalma Mai) के नाम पर रखा गया है और इसमें लगभग 915 मीटर तक उठने वाली ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियाँ शामिल हैं, जो सुवर्णरेखा नदी (Subarnarekha River) के जलग्रहण क्षेत्र (catchment) का हिस्सा हैं।

दलमा के वन मुख्य रूप से शुष्क प्रायद्वीपीय साल (Dry Peninsular Sal) और उत्तरी शुष्क मिश्रित पर्णपाती (Northern Dry Mixed Deciduous) प्रकार के हैं। यह क्षेत्र सीतागुल्डी (Sitaguldi) और दस्सम (Dassam) जैसे झरनों से अटा पड़ा है और औषधीय पौधों सहित विविध वनस्पतियों (flora) का समर्थन करता है।

वन्यजीवों के मुख्य आकर्षण

  • हाथियों का निवास (Elephant abode): यह अभयारण्य एशियाई हाथियों (Asian elephants) के निवासी झुंड के लिए प्रसिद्ध है। ये हाथी पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड को जोड़ने वाले गलियारों (corridors) में प्रवास करते हैं।
  • अन्य स्तनधारी (Other mammals): बार्किंग डियर (Barking deer), जंगली सूअर (wild boar), स्लॉथ बियर (sloth bear), साही (porcupine), पैंगोलिन (pangolin) और भारतीय विशाल गिलहरी (Indian giant squirrel) जंगल में निवास करते हैं।
  • पक्षी जीव (Avifauna): फाल्कन (falcons), गोल्डन ओरीओल्स (golden orioles), पैराडाइज फ्लाईकैचर्स (paradise flycatchers) और हॉर्नबिल (hornbills) जैसे पक्षी छतरी (canopy) में रंग भरते हैं।

हाल के घटनाक्रम

नई जंगल सफारी निर्धारित मार्गों के माध्यम से निर्देशित वाहन पर्यटन प्रदान करती है, जिससे आगंतुकों को आवास (habitats) को परेशान किए बिना वन्यजीवों का निरीक्षण करने की अनुमति मिलती है। स्थानीय सामग्रियों से निर्मित इको-कॉटेज आवास प्रदान करते हैं और स्थानीय समुदायों द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ निवासियों तक पहुंचे।

वन अधिकारियों ने हाल ही में तीन साल की अनुपस्थिति के बाद 38 हाथियों के झुंड के लौटने की सूचना दी। हाथियों ने पारंपरिक गलियारों का अनुसरण किया और इससे क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष (human–elephant conflict) को कम करने की उम्मीद है।

Sign in Today’s news
Current affairs Daily news Daily quiz News Blitz Shorts Economic Survey 2025-26 Subjects
Polity Economy Geography Environment History Science & Tech Intl. Relations Internal Security Art & Culture Social Issues
All subjects Exam info UPSC Syllabus Prelims syllabus Mains syllabus Exam pattern Eligibility & attempts OBC & EWS checker Resources Free downloads Booklist 2026 Previous year papers Video notes YouTube channel