पर्यावरण

Debrigarh Wildlife Sanctuary: इंडियन बाइसन फेस्ट और गौर

Debrigarh Wildlife Sanctuary: इंडियन बाइसन फेस्ट और गौर

चर्चा में क्यों?

ओडिशा का Debrigarh Wildlife Sanctuary 8-9 मार्च 2026 को "Indian Bison Fest" के दूसरे संस्करण की मेजबानी करेगा। हीराकुड वन्यजीव प्रभाग (Hirakud Wildlife Division) ने इस कार्यक्रम का विस्तार किया है जिसमें नाइट कैंपिंग, गाइडेड सफारी, गौर के व्यवहार और संरक्षण पर विशेषज्ञ वार्ता, स्टारगेज़िंग सत्र और ट्रेक शामिल हैं। यह उत्सव देबरीगढ़-हीराकुड परिदृश्य में भारतीय बाइसन (Indian bison) - जिसे स्थानीय रूप से 'गायला' (gayala) के रूप में जाना जाता है - की बढ़ती आबादी का जश्न मनाता है और इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के बीच पर्यावरण-पर्यटन और जागरूकता को बढ़ावा देना है।

पृष्ठभूमि

Debrigarh Wildlife Sanctuary पश्चिमी ओडिशा के बरगढ़ जिले में महानदी नदी पर हीराकुड बांध (Hirakud Dam) के करीब स्थित है। यह संरक्षित क्षेत्र स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेंद्र साई से जुड़ा है, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह के दौरान पास की पहाड़ियों को अपना आधार बनाया था। अभयारण्य को घास के मैदानों के बीच मिश्रित और शुष्क पर्णपाती जंगलों (dry deciduous forests) की विशेषता है। यह भारतीय तेंदुओं, स्लोथ भालू, सांभर हिरण, चौसिंगा (four-horned antelope) और गौर (भारतीय बाइसन) सहित विभिन्न वन्यजीवों को आश्रय देता है। सर्दियों के दौरान प्रवासी पक्षी इसके आर्द्रभूमि (wetlands) में आते हैं, जबकि क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल (crested serpent eagles), ड्रोंगो (drongos) और बुलबुल साल भर जंगल में निवास करते हैं।

उत्सव के मुख्य आकर्षण

  • इमर्सिव अनुभव: दो दिवसीय कार्यक्रम में गौर पारिस्थितिकी (gaur ecology) पर चर्चा, वन्यजीव फिल्म स्क्रीनिंग, गाइडेड सफारी और साफ आसमान के नीचे रात की कैंपिंग शामिल है। प्रतिभागी सप्तर्षि मंडल और ओरियन (Orion) जैसे नक्षत्रों का निरीक्षण करेंगे और पास के बैट आइलैंड (Bat Island) की यात्रा करेंगे, जो फ्रूट बैट (fruit bats) की एक बड़ी कॉलोनी का घर है।
  • संरक्षण सफलता: हाल के जनगणना डेटा गौर की आबादी में लगातार वृद्धि दिखाते हैं, जनवरी 2026 में लगभग 848 जानवरों को दर्ज किया गया है - जिनमें कई किशोर शामिल हैं। यह स्वस्थ प्रजनन और प्रभावी निवास स्थान प्रबंधन (habitat management) को इंगित करता है।
  • ईको-टूरिज्म लाभ: उत्सव के पिछले संस्करण ने सैकड़ों आगंतुकों और पर्यावरण-विकास समितियों के सदस्यों को आकर्षित किया। वन्यजीव पर्यटन और बाइसन संरक्षण से जुड़े रोजगार के अवसरों से स्थानीय समुदायों को लाभ होता है।

भारतीय बाइसन (गौर) के बारे में

  • सबसे बड़ा जंगली मवेशी: भारतीय बाइसन, या गौर, सबसे बड़ा जीवित गोवंश (bovine) है। नर का शरीर मजबूत होता है, अंग मजबूत होते हैं और उनके सींगों के बीच एक प्रमुख ग्रे रिज (grey ridge) होता है। वयस्क कंधे पर दो मीटर तक खड़े हो सकते हैं।
  • आवास और सीमा: गौर भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में सदाबहार (evergreen), अर्ध-सदाबहार (semi-evergreen) और नम पर्णपाती जंगलों (moist deciduous forests) में निवास करते हैं। वे प्रचुर मात्रा में चारे और जल स्रोतों वाले पहाड़ी इलाकों को पसंद करते हैं।
  • संरक्षण स्थिति: निवास स्थान के नुकसान, शिकार और मवेशियों से रोग संचरण के कारण प्रजातियों को IUCN Red List में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

निष्कर्ष

Indian Bison Fest दिखाता है कि संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी कैसे एक साथ काम कर सकते हैं। देबरीगढ़ की बेहतर गौर संख्या लक्षित आवास प्रबंधन की सफलता को दर्शाती है, जबकि उत्सव जागरूकता बढ़ाता है और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देता है। बाइसन और उनके आवास का जश्न मनाकर, यह आयोजन वन्यजीव संरक्षण और स्थायी आजीविका के लिए दीर्घकालिक समर्थन को प्रोत्साहित करता है।

स्रोत: The New Indian Express

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