पर्यावरण

Deepor Beel: असम रामसर साइट, आर्द्रभूमि संरक्षण और ब्रह्मपुत्र

Deepor Beel: असम रामसर साइट, आर्द्रभूमि संरक्षण और ब्रह्मपुत्र
Study next

Convert reading into recall

Read once, then use one quick app action while the topic is fresh. Links open in a new tab.

1 Start True/False practice 2-min recall check Open
Read for
Exam hook Prelims fact Mains angle
Other useful actions
N Save key points Build a revision note S Watch related Shorts Quick visual recap App Open News in Web App Browse related current affairs

चर्चा में क्यों?

पर्यावरणविदों (Environmentalists) और स्थानीय अधिकारियों ने प्रदूषण और अतिक्रमण (encroachment) की रिपोर्टों के बाद, असम की एकमात्र रामसर आर्द्रभूमि (Ramsar wetland), दीपोर बील को बहाल करने (restore) के लिए मार्च 2026 में नए सिरे से प्रयास शुरू किए। इस पहल का उद्देश्य जैव विविधता (biodiversity) की रक्षा करना और आसपास के समुदायों के लिए पानी की गुणवत्ता में सुधार करना है।

पृष्ठभूमि

दीपोर बील, जिसका अर्थ है "हाथियों की झील", गुवाहाटी के दक्षिण-पश्चिम में एक बड़ी बाढ़ के मैदान (floodplain) की झील है। आसपास की पहाड़ियों से बहने वाली छोटी धाराओं द्वारा सूखी, यह खानजन आउटलेट (Khanajan outlet) के माध्यम से ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra) से जुड़ती है। आर्द्रभूमि लगभग 40 वर्ग किलोमीटर को कवर करती है और 2002 में इसे वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuary) और रामसर साइट नामित किया गया था। बर्डलाइफ इंटरनेशनल (Birdlife International) ने 2003 में इसे एक महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र (Important Bird and Biodiversity Area) घोषित किया।

पारिस्थितिक महत्व

  • तूफान-जल जलाशय (Storm-water reservoir): दीपोर बील एक प्राकृतिक बेसिन (natural basin) के रूप में कार्य करता है जो गुवाहाटी से मानसून के बहाव (run-off) और तूफानी पानी (storm water) प्राप्त करता है। यह बाढ़ को कम करता है और भूजल को रिचार्ज करता है।
  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: झील प्रवासी पक्षियों (migratory birds) की मेजबानी करती है, जिनमें स्पॉट-बिल्ड पेलिकन (spot-billed pelicans), ग्रेटर एडजुटेंट (greater adjutants) और बतख और वेडर्स (waders) की कई प्रजातियां शामिल हैं। आस-पास के जंगलों के हाथी शुष्क मौसम के दौरान आर्द्रभूमि का दौरा करते हैं।
  • आजीविका: स्थानीय समुदाय मछली पकड़ने, चावल की खेती और जलीय पौधों (aquatic plants) के संग्रह के लिए आर्द्रभूमि पर निर्भर हैं। पारंपरिक मछुआरे (Traditional fisherfolk) स्थायी प्रथाओं का पालन करते हैं जिन्होंने पीढ़ियों से झील को बनाए रखा है।

खतरे और बहाली के प्रयास

  • प्रदूषण: भरालू (Bharalu) और बशिष्ठ-वाहिनी (Basistha–Bahini) नदियों द्वारा ले जाया जाने वाला गुवाहाटी का अनुपचारित सीवेज (Untreated sewage), झील में बह जाता है। ठोस अपशिष्ट डंपिंग (Solid waste dumping) और औद्योगिक अपशिष्ट (industrial effluents) पानी की गुणवत्ता को खराब करते हैं और जलीय जीवन (aquatic life) को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • अतिक्रमण: बस्तियों (settlements) के विस्तार, सड़कों के निर्माण और अवैध रूप से मछली पकड़ने की संरचनाओं ने आर्द्रभूमि के क्षेत्र को कम कर दिया है और वन्यजीवों को परेशान किया है।
  • संरक्षण पहल: 2023 में एक परियोजना शुरू हुई जिसमें पमोही नहर (Pamohi canal) को साफ करने के लिए बायोरेमेडिएशन (bioremediation) का उपयोग किया गया, जो मुख्य अंतर्वाहों (inflows) में से एक है। अधिकारी अपशिष्ट डंपिंग को नियंत्रित करने, आक्रामक प्रजातियों (invasive species) को हटाने, और निवास स्थान के विखंडन (habitat fragmentation) को कम करने के लिए एक एलिवेटेड रेलवे बनाने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ काम कर रहे हैं।
Finished reading?

Do one recall action now

Practice first while the topic is fresh. Save the key points or use Shorts when you want a quick recap.

1 Start True/False practice 2-min recall check N Save key points Build a revision note S Watch related Shorts Quick visual recap App Open News in Web App Browse related current affairs
Home Current Affairs 📰 Daily News 🎬 Watch Shorts 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Sign In / Open Web App