राजव्यवस्था

Dibru-Saikhowa National Park: असम बायोस्फीयर रिजर्व और दलदली जंगल

Dibru-Saikhowa National Park: असम बायोस्फीयर रिजर्व और दलदली जंगल

चर्चा में क्यों?

अप्रैल 2026 में भारत के आम चुनावों के पहले चरण के दौरान, मतदान अधिकारियों (polling officials) को असम के डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (Dibru-Saikhowa National Park) के अंदर लाइका (Laika) और डोडिया (Dodhia) गांवों तक पहुंचने के लिए घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ा और उफनती नदियों को पार करना पड़ा। जंगली जानवरों से बचाने के लिए राइफलों से लैस वन रक्षकों (Forest guards) ने टीमों को एस्कॉर्ट किया। भारी बारिश और चुनौतीपूर्ण इलाके के बावजूद, स्थानीय लोग वोट डालने के लिए उत्साहपूर्वक कतार में खड़े रहे।

पृष्ठभूमि

असम के डिब्रूगढ़ (Dibrugarh) और तिनसुकिया (Tinsukia) जिलों में स्थित, डिब्रू-सैखोवा एक राष्ट्रीय उद्यान और बायोस्फीयर रिजर्व (biosphere reserve) दोनों है। 1997 में एक बायोस्फीयर रिजर्व के रूप में स्थापित, यह लगभग 765 वर्ग किमी (340 वर्ग किमी कोर के साथ) को कवर करता है, जो उत्तर में ब्रह्मपुत्र और लोहित नदियों और दक्षिण में डिब्रू नदी से घिरा है। यह पार्क दुर्लभ आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्र (wetland ecosystems), घास के मैदानों और दलदली जंगलों की रक्षा करता है और भारत के उन कुछ स्थानों में से एक है जहां जंगली घोड़े (feral horses) स्वतंत्र रूप से घूमते हैं।

प्राकृतिक विशेषताएं और जैव विविधता

  • दलदली जंगल और घास के मैदान: डिब्रू-सैखोवा पूर्वोत्तर भारत में सबसे बड़े सलिक्स दलदली जंगल (Salix swamp forest) की मेजबानी करता है, जो बीच-बीच में बेंत (canebrakes) और लंबी घास से घिरा हुआ है।
  • समृद्ध जीव (Rich fauna): रिजर्व में लगभग 36 स्तनपायी प्रजातियां (mammal species) हैं, जिनमें बंगाल टाइगर (Bengal tigers), क्लाउडेड लेपर्ड (clouded leopards), हूलॉक गिब्बन (hoolock gibbons), गंगा नदी डॉल्फ़िन (Gangetic river dolphins) और द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के घुड़सवार सेना (cavalry stock) से उत्पन्न जंगली घोड़ों की एक अनूठी आबादी शामिल है। पक्षियों की 380 से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिससे यह पक्षी देखने वालों (birdwatcher) के लिए एक स्वर्ग बन गया है।
  • दूरस्थ समुदाय: लाइका और डोडिया जैसे गांव पार्क के बहुत अंदर स्थित हैं। निवासी अक्सर आवश्यक सेवाओं के लिए नाव से नदियों को पार करते हैं और घने जंगलों को नेविगेट करते हैं, जो संरक्षण और मानव आजीविका के प्रतिच्छेदन (intersection) को उजागर करते हैं।

चुनौतियां और महत्व

  • पहुंच (Accessibility): मानसूनी बारिश और वार्षिक बाढ़ पार्क के कई हिस्सों को अलग कर देती है। मतदान टीमों को वन रक्षकों की मदद की आवश्यकता थी क्योंकि हाथी (elephants), जंगली भैंस (wild buffaloes) और बड़ी बिल्लियां (big cats) इस क्षेत्र में अक्सर आते हैं।
  • संरक्षण बनाम मानवीय जरूरतें: स्वदेशी समुदायों (indigenous communities) के कल्याण को सुनिश्चित करते हुए वन्यजीवों की रक्षा करने के लिए सावधानीपूर्वक योजना, स्थायी आजीविका और समय-समय पर स्थानांतरण चर्चाओं की आवश्यकता होती है।
  • इकोटूरिज्म क्षमता: उचित बुनियादी ढांचे के साथ, डिब्रू-सैखोवा के अनूठे परिदृश्य जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों को आय होगी और आर्द्रभूमि संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।

निष्कर्ष

डिब्रू-सैखोवा में मतदान का अनुभव दूरस्थ जंगली क्षेत्रों में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के संचालन की चुनौतियों और भाग लेने के लिए उत्सुक मतदाताओं के लचीलेपन दोनों को प्रदर्शित करता है। इसके निवासियों का समर्थन करते हुए इस जैव विविधता हॉटस्पॉट को संरक्षित करना एक नाजुक संतुलन का काम है।

स्रोत: TOI

Continue reading on the App

Save this article, highlight key points, and take quizzes.

App Store Google Play
Home Current Affairs 📰 Daily News 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Web App