चर्चा में क्यों?
21 मार्च 2026 को मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ईरान ने हिंद महासागर में संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य अड्डे (joint US-UK military base) की मेजबानी करने वाले एक सुदूर द्वीप (remote island) डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) की ओर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (intermediate-range ballistic missiles) दागीं। कथित तौर पर एक मिसाइल विफल रही और दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत (warship) द्वारा रोक लिया गया। ईरान ने शामिल होने से इनकार किया, लेकिन इस घटना ने द्वीप के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
पृष्ठभूमि
डिएगो गार्सिया चागोस द्वीपसमूह (Chagos Archipelago) का सबसे बड़ा द्वीप है, जो अफ्रीकी तट से लगभग 3,800 किमी पूर्व में स्थित है। पुर्तगालियों ने 16वीं शताब्दी की शुरुआत में इसका पता लगाया, और 18वीं शताब्दी में फ्रांस ने वहां बस्ती बसाई। 1814 की पेरिस की संधि (Treaty of Paris) के तहत यह ब्रिटिश क्षेत्र बन गया। 1965 में ब्रिटेन ने मॉरीशस (Mauritius) से चागोस द्वीपों को अलग करके ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (British Indian Ocean Territory - BIOT) का गठन किया। 1967 और 1973 के बीच स्वदेशी चागोसियंस (Chagossians) को जबरन मॉरीशस और सेशेल्स में स्थानांतरित कर दिया गया ताकि ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका एक प्रमुख सैन्य अड्डा बना सकें।
रणनीतिक और कानूनी मुद्दे
- भू-राजनीतिक महत्व: डिएगो गार्सिया बेस में एक लंबा रनवे (runway) और गहरे पानी का बंदरगाह (deep-water port) है, जो एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व में बमवर्षक विमानों (bombers), निगरानी विमानों और पूर्व-तैनात जहाजों की तेजी से तैनाती (rapid deployment) की अनुमति देता है। इसका उपयोग खाड़ी युद्ध (Gulf War) से लेकर अफगानिस्तान और इराक में अभियानों तक के संघर्षों में किया गया है।
- 2019 ICJ सलाहकार राय: 2019 में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) ने सलाह दी कि ब्रिटेन को चागोस द्वीपसमूह के अपने प्रशासन को समाप्त करना चाहिए और मॉरीशस के विऔपनिवेशीकरण (decolonisation) को पूरा करना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने द्वीपों की वापसी का आह्वान करते हुए एक प्रस्ताव अपनाया।
- 2025 यूके-मॉरीशस संधि: मई 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस एक समझौते पर पहुंचे जिसके तहत ब्रिटेन ने द्वीपसमूह पर मॉरीशस की संप्रभुता (sovereignty) को मान्यता दी, जबकि डिएगो गार्सिया को 99 वर्षों के लिए यूके और अमेरिका को वापस पट्टे (lease) पर दिया। संधि में पर्यावरण संरक्षण और विस्थापित चागोसियंस के लिए मुआवजा (compensation) शामिल है।
- हालिया मिसाइल घटना: बेस को निशाना बनाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों की रिपोर्ट ने इसकी भेद्यता (vulnerability) और ईरान की विस्तारित मिसाइल रेंज (expanding missile range) को रेखांकित किया। ब्रिटेन ने हमले की निंदा की; ईरान ने इसे "मनगढ़ंत (fabricated)" बताकर खारिज कर दिया। इस घटना ने बेस की वैधता और सुरक्षा पर बहस छेड़ दी।
निहितार्थ (Implications)
यह घटना दर्शाती है कि हिंद महासागर में महान शक्तियों की प्रतिद्वंद्विता (great-power rivalry) और अनसुलझी औपनिवेशिक विरासतें (colonial legacies) कैसे प्रतिच्छेद करती हैं। जबकि बेस पश्चिमी सुरक्षा हितों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, विऔपनिवेशीकरण (decolonisation) की ओर बढ़ना और विस्थापित चागोसियंस के अधिकारों को संबोधित करना स्थायी वैधता (lasting legitimacy) प्राप्त करने के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu