अर्थव्यवस्था

Digital Payments Kill Switch: RBI प्रस्ताव, साइबर धोखाधड़ी और UPI सुरक्षा

Digital Payments Kill Switch: RBI प्रस्ताव, साइबर धोखाधड़ी और UPI सुरक्षा

ख़बरों में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि वह डिजिटल भुगतान (digital payment) मोड के लिए एक "किल स्विच (kill switch)" और एक व्यापक (comprehensive) चालू/बंद नियंत्रण (on/off control) की खोज कर रहा है। यह सुविधा ग्राहकों को साइबर धोखाधड़ी (cyber fraud) के खिलाफ सुरक्षा की एक नई परत की पेशकश करते हुए, एक ही बार में या चुनिंदा रूप से सभी डिजिटल भुगतानों को अक्षम (disable) करने की अनुमति देगी।

पृष्ठभूमि

भारत ने UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट के माध्यम से डिजिटल भुगतान का तेजी से विस्तार देखा है। जबकि इन प्रणालियों ने लेनदेन (transactions) को सुविधाजनक बना दिया है, फ़िशिंग (phishing), पहचान की चोरी (identity theft) और तथाकथित "डिजिटल अरेस्ट (digital arrest)" घोटालों की घटनाओं ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। कार्ड जारीकर्ता (Card issuers) पहले से ही ग्राहकों को अपने कार्ड को अस्थायी रूप से ब्लॉक (temporarily block) करने की क्षमता प्रदान करते हैं; अन्य भुगतान चैनलों के लिए इसी तरह की सुविधा का अभाव है।

प्रस्तावित विशेषताएं

  • त्वरित ब्लॉकिंग (Instant blocking): एक किल स्विच ग्राहकों को धोखाधड़ी का संदेह होने पर सभी आउटगोइंग डिजिटल भुगतान (UPI, नेट बैंकिंग, कार्ड आदि) को तुरंत अक्षम (disable) करने की अनुमति देगा। यह त्वरित प्रतिक्रिया (rapid response) अनधिकृत डेबिट (unauthorised debits) को तब तक रोक सकती है जब तक कि उपयोगकर्ता पहुंच को सत्यापित (verifies) और पुनर्स्थापित (restores) नहीं कर लेता।
  • ऑन/ऑफ़ नियंत्रण (On/off controls): किल स्विच से अलग, एक ऑन/ऑफ़ सुविधा उपयोगकर्ताओं को अपने बैंकिंग ऐप के भीतर से विशिष्ट भुगतान उपकरणों (जैसे UPI या डेबिट कार्ड) को निष्क्रिय (deactivate) और पुनः सक्रिय (reactivate) करने देगी, जिससे उन्हें यह नियंत्रण मिलेगा कि चैनल कब चालू होंगे।
  • धोखाधड़ी-निगरानी (fraud‑monitoring) के साथ एकीकरण: RBI एक डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (Digital Payments Intelligence Platform) भी विकसित कर रहा है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence) का उपयोग करके लेनदेन (transactions) को जोखिम स्कोर (risk scores) प्रदान करेगा। किल स्विच और ऑन/ऑफ नियंत्रणों से ग्राहक-प्रारंभिक निवारक कार्रवाई (customer‑initiated preventive action) को सक्षम करके इस मंच का पूरक (complement) होने की उम्मीद है।
  • उपभोक्ता जागरूकता (Consumer awareness): नियामक (regulator) बैंकों, भुगतान ऐप (payment apps) और दूरसंचार प्रदाताओं (telecom providers) के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है ताकि उपयोगकर्ताओं को इन नई सुविधाओं और आपात स्थिति में उनका उपयोग करने के तरीके के बारे में शिक्षित (educate) किया जा सके।

निष्कर्ष

चूंकि डिजिटल भुगतान (digital payments) सर्वव्यापी (ubiquitous) हो गए हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को लेनदेन (transactions) को तेजी से रोकने की क्षमता के साथ सशक्त (empowering) बनाना आवश्यक है। प्रस्तावित किल स्विच (kill switch) और चालू/बंद नियंत्रण (on/off controls) डिजिटल वित्त (digital finance) में विश्वास बढ़ाएंगे और भारत के भुगतान सुरक्षा उपायों (payment security measures) को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (global best practices) के साथ संरेखित करेंगे।

स्रोत

Indian Express

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