चर्चा में क्यों?
फरवरी 2026 में विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade - DGFT) ने डिजिटल व्यापार सुविधा विधेयक (Digital Trade Facilitation Bill), 2026 के मसौदे पर सार्वजनिक टिप्पणियां (public comments) आमंत्रित करते हुए एक व्यापार नोटिस (trade notice) जारी किया। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेजों (electronic trade documents) को कानूनी मान्यता (legal recognition) देकर और डिजिटल पहचान (digital identity) और विश्वास सेवाओं (trust services) के लिए एक ढांचा तैयार करके भारत के व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र (trade ecosystem) का आधुनिकीकरण (modernise) करना है। हितधारकों (Stakeholders) को 30 दिनों के भीतर प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
पृष्ठभूमि
DGFT भारत की विदेश व्यापार नीति (foreign trade policy) को लागू करने के लिए जिम्मेदार वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) की एक शाखा है। यह निर्यात और आयात लाइसेंस (export and import licences) का प्रबंधन करता है, व्यापार नोटिस जारी करता है और व्यापार नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करता है। डिजिटल व्यापार सुविधा विधेयक का मसौदा "भारत ट्रेड नेट (Bharat Trade Net)" बनाने के सरकार के प्रयास का हिस्सा है - जो व्यापार के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (digital public infrastructure) है - जिसकी घोषणा केंद्रीय बजट 2025-26 में की गई थी। वर्तमान कानून इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेजों को पर्याप्त रूप से मान्यता नहीं देते हैं या सीमा पार डिजिटल विश्वास (cross-border digital trust) के लिए तंत्र प्रदान नहीं करते हैं, जिससे निर्बाध (seamless) डिजिटल व्यापार में बाधा उत्पन्न होती है।
मसौदा विधेयक की मुख्य विशेषताएं
- इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की कानूनी मान्यता (Legal recognition of electronic documents): विधेयक का प्रस्ताव है कि इलेक्ट्रॉनिक व्यापार दस्तावेजों (जैसे लदान का बिल - bills of lading - और गोदाम रसीदें - warehouse receipts) को कागज के दस्तावेजों (paper documents) के समान कानूनी दर्जा (legal status) प्राप्त हो। अदालतों और बैंकों को विधिवत प्रमाणित (properly authenticated) डिजिटल रिकॉर्ड स्वीकार करने की आवश्यकता होगी।
- कब्जे (possession) की जगह नियंत्रण (Control): भौतिक कब्जे (physical possession) के बजाय, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ पर नियंत्रण (control) की अवधारणा स्वामित्व (ownership) और इसे स्थानांतरित करने के अधिकार को निर्धारित करेगी। यह परिवर्तन डिजिटल दस्तावेज़ों को कागज के दस्तावेज़ों की तरह सुरक्षित रूप से समर्थन (endorsed) और स्थानांतरित (transferred) करने की अनुमति देता है।
- पहचान और विश्वास सेवाएँ (Identity and trust services): मसौदा इलेक्ट्रॉनिक मुहरों (electronic seals), टाइमस्टैम्प (timestamps), पंजीकृत वितरण सेवाओं (registered delivery services) और डिजिटल हस्ताक्षर प्रदाताओं (digital signature providers) के लिए एक शासन ढांचा (governance framework) स्थापित करता है। इन उपायों का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक व्यापार रिकॉर्ड की प्रामाणिकता (authenticity) और अखंडता (integrity) सुनिश्चित करना है。
- सीमा पार मान्यता (Cross-border recognition): यदि वे निर्दिष्ट विश्वसनीयता मानकों (reliability standards) को पूरा करते हैं, तो भारत के बाहर जारी किए गए डिजिटल दस्तावेजों और विश्वास सेवाओं (trust services) को मान्यता दी जाएगी। इस प्रावधान का उद्देश्य भारत के व्यापार बुनियादी ढांचे को वैश्विक डिजिटल व्यापार प्रणालियों के साथ इंटरऑपरेबल (interoperable) बनाना है।
- साक्ष्य मूल्य (Evidentiary value): विश्वसनीय तरीकों का उपयोग करके बनाए गए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड कानूनी कार्यवाही (legal proceedings) में साक्ष्य (evidence) के रूप में स्वीकार्य (admissible) होंगे, जिससे विवाद और देरी कम होगी।