विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Meteorology

Doppler Weather Radar: Mahabaleshwar में IITM सुविधा

Doppler Weather Radar: Mahabaleshwar में IITM सुविधा

समाचार में क्यों?

24 अप्रैल 2026 को Indian Institute of Tropical Meteorology (IITM) ने महाराष्ट्र के महाबलेश्वर (Mahabaleshwar) में अपनी High Altitude Cloud Physics Laboratory में X-band dual-polarisation Doppler Weather Radar का कमीशन किया। पश्चिमी घाट (Western Ghats) में लगभग 1,400 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित यह नया रडार, अल्पकालिक पूर्वानुमान (nowcasting) और मानसून की गतिशीलता तथा पर्वतीय वर्षा (orographic rainfall) पर शोध को बढ़ाता है।

पृष्ठभूमि

Doppler weather radars बारिश की बूंदों और अन्य कणों की गति को मापने के लिए डॉपलर प्रभाव (Doppler effect) का उपयोग करते हैं। एक रडार माइक्रोवेव ऊर्जा की पल्स उत्सर्जित करता है; जब ये तरंगें वर्षा का सामना करती हैं, तो कुछ ऊर्जा रिसीवर की ओर वापस परावर्तित हो जाती है। लौटाई गई सिग्नल में आवृत्ति बदलाव (frequency shifts) का विश्लेषण करके, मौसम विज्ञानी हाइड्रोमेटर्स (बारिश, बर्फ, ओले) के वेग (velocity) को निर्धारित कर सकते हैं और हवा के पैटर्न का अनुमान लगा सकते हैं।

Doppler weather radars कैसे काम करते हैं

  • पल्स ट्रांसमिशन: एक ट्रांसमीटर एक ज्ञात आवृत्ति (frequency) की रेडियो तरंगें भेजता है। जब किरण बूंदों या कणों से टकराती है, तो ऊर्जा का एक हिस्सा वापस रडार पर परावर्तित होता है।
  • डॉपलर शिफ्ट (Doppler shift): यदि लक्ष्य रडार की ओर या उससे दूर जा रहा है, तो लौटे गए संकेत की आवृत्ति थोड़ी बदल जाती है। इस बदलाव को मापकर, रडार रेडियल वेग (radial velocity) की गणना करता है।
  • दोहरी ध्रुवीकरण (Dual polarisation): महाबलेश्वर रडार क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रूप से ध्रुवीकृत तरंगों (horizontally and vertically polarised waves) का उत्सर्जन और प्राप्त कर सकता है। यह उसे बारिश की बूंदों, ओलों और पिघलती बर्फ के आकार और दिशा की तुलना करके उनके बीच अंतर करने की अनुमति देता है।

महाबलेश्वर रडार की विशेषताएं

  • फ्रीक्वेंसी बैंड: यह X-बैंड (लगभग 9.4 GHz) में संचालित होता है, जो उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन प्रदान करता है लेकिन कवरेज त्रिज्या लगभग 150 किमी तक सीमित है — जो स्थानीय नाउकास्टिंग (nowcasting) के लिए आदर्श है।
  • सॉलिड-स्टेट डिज़ाइन: रडार आधुनिक सॉलिड-स्टेट पावर एम्पलीफायरों (solid-state power amplifiers) का उपयोग करता है, जिससे विरासत क्लाइस्ट्रॉन-आधारित प्रणालियों (klystron-based systems) की तुलना में विश्वसनीयता में सुधार और रखरखाव में कमी आती है।
  • ऊंचाई का लाभ: 1,400 मीटर की ऊंचाई पर लगा एंटीना उबड़-खाबड़ पश्चिमी घाटों पर एक अबाधित दृश्य प्रस्तुत करता है, जिससे पर्वतीय बादलों (orographic clouds), कोहरे और गहरे संवहन (deep convection) की बेहतर निगरानी संभव हो पाती है।
  • अनुसंधान सहयोग: IITM ने ग्राउंड और स्पेस अवलोकनों को मिलाने के लिए उपग्रह-रडार उत्पाद संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए Indian Space Research Organisation (ISRO) के अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (Space Applications Centre) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

उपयोग (Applications)

  • Nowcasting: रडार वर्षा, गरज और बादलों की गतिविधियों की तीन घंटे पहले भविष्यवाणी करने के लिए लगभग रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है — जो कोंकण, पुणे और मुंबई क्षेत्रों में आपदा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अनुसंधान (Research): वैज्ञानिक गहरे संवहनी बादलों (convective clouds) की संरचना, मानसूनी प्रणालियों में सूक्ष्म-भौतिक प्रक्रियाओं (microphysical processes) और जटिल भूभागों के वर्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर सकते हैं।
  • हाइड्रोमेटेर वर्गीकरण: दोहरे-ध्रुवीकरण (Dual-polarisation) माप वर्षा, ग्राउपेल (graupel) और ओलावृष्टि के बीच अंतर करने में मदद करते हैं, जिससे कृषि और जल प्रबंधन के लिए मात्रात्मक वर्षा अनुमान (precipitation estimation) में सुधार होता है।

स्रोत: News On Air

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