समाचार में क्यों?
यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) ने घोषणा की कि द्रुज़बा पाइपलाइन (Druzhba pipeline) - यूक्रेन के माध्यम से हंगरी और स्लोवाकिया तक रूसी तेल का मुख्य मार्ग - एक रूसी मिसाइल हमले से क्षतिग्रस्त होने के बाद मरम्मत कर दी गई है। मरम्मत पूरी होने के साथ ही, तेल पम्पिंग फिर से शुरू होने की उम्मीद थी, जिससे यूक्रेन और इसके भू-आबद्ध (land-locked) यूरोपीय पड़ोसियों के बीच महीनों का तनाव समाप्त हो गया जो इस मार्ग पर निर्भर हैं।
पृष्ठभूमि
द्रुज़बा ("मैत्री") पाइपलाइन दुनिया की सबसे लंबी कच्चा-तेल पाइपलाइन प्रणालियों में से एक है। 1960 के दशक की शुरुआत में पूर्वी यूरोप में सोवियत तेल की आपूर्ति के लिए निर्मित, यह यूरोप भर में रूसी और कजाख तेल के परिवहन के लिए प्रमुख धमनी बनी हुई है। नेटवर्क रूसी संघ (Russian Federation) के अल्मेत्येवस्क (Almetyevsk) से शुरू होता है, जहाँ साइबेरिया, यूराल और कैस्पियन क्षेत्र से पाइपलाइनें मिलती हैं। यह बेलारूस के मोजियर (Mozyr) तक जाती है और फिर दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है: उत्तरी शाखा बेलारूस और पोलैंड से होते हुए जर्मनी तक जाती है, जबकि दक्षिणी शाखा यूक्रेन से होकर गुजरती है और स्लोवाकिया, चेक गणराज्य और हंगरी की सेवा के लिए पश्चिमी यूक्रेन में फिर से विभाजित हो जाती है।
हालिया घटनाक्रम
- क्षति और मरम्मत: जनवरी 2026 में एक यूक्रेनी पम्पिंग स्टेशन पर रूसी हमले ने कीव को तेल के प्रवाह को रोकने के लिए मजबूर किया, जिससे हंगरी और स्लोवाकिया क्रोधित हो गए। यूक्रेन ने जोर देकर कहा कि वह जितनी जल्दी हो सके क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर रहा है। मरम्मत कार्य के बाद, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा कि तेल पम्पिंग फिर से शुरू हो सकती है और यूरोपीय संघ (European Union) से विवाद को लेकर रुके हुए 90-बिलियन-यूरो के ऋण पैकेज को अनब्लॉक करने का आह्वान किया।
- राजनीतिक संदर्भ: हंगरी की घरेलू राजनीति में प्रवाह का निलंबन एक विवादास्पद मुद्दा बन गया। कीव के आलोचक और रूसी ऊर्जा आयात के रक्षक प्रधान मंत्री विक्टर ओर्बन (Viktor Orbán) ने अपने चुनाव अभियान के दौरान इसका इस्तेमाल किया। 12 अप्रैल 2026 को अपने पुन: चुनाव की बोली हारने के बाद, तनाव कम हो गया और यूक्रेन ने घोषणा की कि मरम्मत पूरी हो गई है।
- क्षमता और पहुंच: द्रुज़बा (Druzhba) नेटवर्क अपनी शाखाओं सहित लगभग 5,500 किलोमीटर तक फैला हुआ है और वर्तमान में प्रति दिन लगभग 1.2–1.4 मिलियन बैरल तेल परिवहन कर सकता है, जिसे दो मिलियन तक बढ़ाने की गुंजाइश है। यह जर्मनी, पोलैंड, स्लोवाकिया, चेक गणराज्य और हंगरी में रिफाइनरियों की आपूर्ति करता है।
महत्व
मध्य यूरोप में ऊर्जा सुरक्षा के लिए द्रुज़बा (Druzhba) पाइपलाइन की मरम्मत और बहाली महत्वपूर्ण है, जहाँ कुछ देश अभी भी रूसी तेल पर भारी रूप से निर्भर हैं। साथ ही, यह प्रकरण भू-राजनीतिक तनावों के प्रति यूरोप की भेद्यता और ऊर्जा विविधीकरण (energy diversification) पर चल रही बहस पर प्रकाश डालता है। इस गतिरोध ने यह भी दिखाया कि बुनियादी ढांचे के हमलों के दूरगामी आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव कैसे हो सकते हैं।
स्रोत: Aljazeera