खबरों में क्यों?
सरीसृप विज्ञानियों (Herpetologists) ने हाल ही में मेघालय की पूर्वी खासी पहाड़ियों (East Khasi Hills) में मावफलांग (Mawphlang) के उच्च-ऊंचाई वाले घास के मैदानों से टोड (toad) की एक नई प्रजाति, डट्टाफ्रिनस धारा (Duttaphrynus dhara) का वर्णन किया है। मई 2026 में घोषित यह खोज, भारत के उत्तर-पूर्वी हिमालय-इंडो-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट (Himalaya–Indo-Burma biodiversity hotspot) की छिपी हुई उभयचर विविधता (amphibian diversity) को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
Duttaphrynus बुफोनिडे (Bufonidae) परिवार के भीतर असली टोड (true toads) का एक जीनस (genus) है। इसकी प्रजातियां दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया (Southeast Asia) में वितरित हैं। कई का कम अध्ययन किया गया है क्योंकि वे सुदूर पहाड़ों (remote mountains) में रहते हैं। खासी पठार (Khasi Plateau) में फील्ड सर्वेक्षण करने वाले शोधकर्ताओं ने समुद्र तल से लगभग 1,854 मीटर ऊपर परती खेतों (fallow fields) और पत्तों के कूड़े (leaf litter) में कई छोटे टोड खोजे। विस्तृत रूपात्मक मापन (morphological measurements) और आनुवंशिक विश्लेषण (genetic analyses) से पता चला कि ये नमूने किसी भी ज्ञात प्रजाति से मेल नहीं खाते थे। क्षेत्र में उभयचर अनुसंधान का समर्थन करने वाले संरक्षणवादी (conservationist) धारा सिंह पाई (Dhara Singh Pai) के सम्मान में उन्हें dhara नाम दिया गया था।
प्रजातियों की विशेषताएं
- आकार और रूप (Size and appearance): वयस्क नर छोटे होते हैं, जिनका आकार थूथन (snout) से वेंट (vent) तक लगभग 40-42 मिलीमीटर होता है। उनमें प्रमुख कपाल लकीरें (cranial ridges) नहीं होती हैं और एक छोटा लेकिन अलग टाम्पैनम (tympanum - कान की झिल्ली) होता है। पैर की उंगलियां मामूली रूप से जाल से युक्त (webbed) होती हैं और पृष्ठीय भाग (dorsum) नुकीले, केराटिनाइज्ड मौसों (keratinised warts) से ढका होता है।
- आवास (Habitat): टोड मावफलांग (Mawphlang) के पास पर्वतीय घास के मैदान (montane grassland) और जंगल के किनारे के आवासों में पाए गए थे। इस क्षेत्र में ठंडे तापमान (cool temperatures) और उच्च वर्षा का अनुभव होता है। ऐसा लगता है कि प्रजातियां इस इलाके तक ही सीमित हैं।
- आनुवंशिक भिन्नता (Genetic divergence): डीएनए अनुक्रमण (DNA sequencing) (16S rRNA) से पता चला कि D. dhara आनुवंशिक रूप से अपने निकटतम रिश्तेदारों, D. stuarti और D. chandai से अलग है, जिसमें लगभग 4-7 प्रतिशत का विचलन (divergence) है। इस तरह के मतभेद इसे एक अलग प्रजाति (separate species) के रूप में मान्यता देते हैं।
खोज का महत्व
एक नई प्रजाति की खोज उत्तर-पूर्व भारत के समृद्ध और अभी भी कम ज्ञात उभयचर जीवों (amphibian fauna) को उजागर करती है। कई पर्वतीय प्रजातियाँ (montane species) अत्यधिक स्थानीयकृत होती हैं और निवास स्थान में गड़बड़ी (habitat disturbance), जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण की चपेट में आ जाती हैं। पूर्वी हिमालय (Eastern Himalaya) में जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन (ecological balance) को बनाए रखने के लिए उनके आवासों की रक्षा करना आवश्यक है।
निष्कर्ष
Duttaphrynus dhara की पहचान हमें याद दिलाती है कि टोड जैसे परिचित समूहों में भी छिपे हुए आश्चर्य होते हैं। खासी हिल्स (Khasi Hills) और अन्य सुदूर क्षेत्रों में निरंतर क्षेत्र सर्वेक्षण (field surveys) और संरक्षण प्रयास (conservation efforts) संभवतः अधिक प्रजातियों को प्रकट करेंगे और विकास (evolution) और पारिस्थितिकी (ecology) के बारे में हमारी समझ को गहरा करेंगे।