विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

e-SafeHER Initiative: साइबर सुरक्षा, ग्रामीण महिलाएँ और साइबर सखी

e-SafeHER Initiative: साइबर सुरक्षा, ग्रामीण महिलाएँ और साइबर सखी

चर्चा में क्यों?

13 अप्रैल 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) और रिलायंस फाउंडेशन (Reliance Foundation) ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक राष्ट्रव्यापी साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम, ई-सेफहर (e‑SafeHER) लॉन्च किया। इस पहल का उद्देश्य अगले तीन वर्षों में एक मिलियन "साइबर सखी (Cyber Sakhis)" बनाना है जो अपने समुदायों को डिजिटल टूल का सुरक्षित और आत्मविश्वास से उपयोग करने में मदद कर सकें। मध्य प्रदेश और ओडिशा में प्रायोगिक (pilot) प्रशिक्षण सत्र शुरू होंगे।

पृष्ठभूमि

भारत के तेजी से डिजिटलीकरण ने अवसरों के साथ-साथ जोखिम भी लाए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अक्सर मार्गदर्शन के बिना डिजिटल सेवाओं का उपयोग करती हैं, जिससे वे ऑनलाइन धोखाधड़ी और उत्पीड़न के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं। इस अंतर को दूर करने के लिए, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C‑DAC) और रिलायंस फाउंडेशन ने सरकार के सूचना सुरक्षा शिक्षा और जागरूकता (ISEA) कार्यक्रम के तहत e-SafeHER डिजाइन किया। यह योजना स्थानीय महिलाओं की पहचान करने और उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए मौजूदा स्वयं सहायता समूह (self-help group) नेटवर्क का उपयोग करती है। C-DAC ऑडियो-विज़ुअल मॉड्यूल और सरल कहानी कहने का उपयोग करके बहुभाषी पाठ्यक्रम विकसित करता है, जबकि रिलायंस फाउंडेशन जमीनी स्तर के समूहों को जुटाता है और सुविधाप्रदाता (facilitators) प्रदान करता है। लक्ष्य स्पष्ट भाषा में पासवर्ड स्वच्छता (password hygiene), सुरक्षित डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया शिष्टाचार और साइबर घटनाओं की रिपोर्ट करने के तरीकों पर पाठ देना है।

प्रमुख पहलू

  • सामुदायिक प्रशिक्षक: एक मिलियन महिलाओं को साइबर सखी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा जो बदले में स्वयं सहायता समूहों और गांवों के भीतर साथियों को शिक्षित करेंगी।
  • बहुभाषी सामग्री: प्रशिक्षण सामग्री कई भारतीय भाषाओं में प्रस्तुत की जाती है और साक्षरता बाधाओं को दूर करने के लिए इंटरैक्टिव अभ्यासों के साथ दृश्य-श्रव्य कहानी (audio‑visual storytelling) को जोड़ती है।
  • चरणबद्ध रोलआउट (Phased rollout): मध्य प्रदेश और ओडिशा में प्रारंभिक प्रायोगिक कार्यक्रमों के बाद अन्य राज्यों में विस्तार किया जाएगा, जिसमें 2029 तक सभी प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य है।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public–private partnership): C-DAC तकनीकी विशेषज्ञता और पाठ्यक्रम विकास प्रदान करता है, जबकि रिलायंस फाउंडेशन प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए महिलाओं के समूहों के अपने नेटवर्क का लाभ उठाता है।
  • मौजूदा योजनाओं के साथ एकीकरण: e-SafeHER डिजिटल साक्षरता, वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण पर सरकारी कार्यक्रमों का पूरक है, यह सुनिश्चित करता है कि साइबर सुरक्षा व्यापक विकास पहलों का हिस्सा बन जाए।

महत्व

  • लैंगिक अंतर को पाटना: आत्मविश्वास और जागरूकता का निर्माण करके, कार्यक्रम महिलाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था में सुरक्षित रूप से भाग लेने में मदद करता है और लिंग-आधारित साइबर कमजोरियों को कम करता है।
  • जमीनी स्तर का दृष्टिकोण: स्थानीय चैंपियनों को प्रशिक्षित करना एक टिकाऊ समर्थन प्रणाली बनाता है जो दूरदराज के समुदायों तक भी पहुंचता है।
  • सामाजिक-आर्थिक लाभ: डिजिटल सेवाओं का सुरक्षित उपयोग ग्रामीण परिवारों के लिए सरकारी लाभ, बैंकिंग, टेली-मेडिसिन और ऑनलाइन सीखने तक पहुंच में सुधार कर सकता है।

निष्कर्ष

e-SafeHER साइबर सुरक्षा शिक्षा के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है। महिलाओं को डिजिटल सुरक्षा के केंद्र में रखकर, इसका उद्देश्य लचीला समुदाय बनाना है और यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी प्रगति ग्रामीण भारत को पीछे न छोड़े।

स्रोत: Press Information Bureau · Reliance Foundation

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