चर्चा में क्यों?
30 मार्च 2026 को सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (Electronics Component Manufacturing Scheme) की चौथी किश्त (fourth tranche) के तहत 29 आवेदनों को मंजूरी दी। इन अनुमोदनों से लगभग 7,104 करोड़ रुपये का निवेश आने और 14,000 से अधिक नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है, जिससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।
पृष्ठभूमि (Background)
2020 में घोषित इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना, पहली समर्पित उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (production‑linked incentive - PLI) योजना है जो निष्क्रिय इलेक्ट्रॉनिक घटकों (passive electronic components) को लक्षित करती है। इसका उद्देश्य प्रतिरोधक (resistors), कैपेसिटर (capacitors), इंडक्टर्स (inductors), स्पीकर, माइक्रोफोन, रिले, स्विच और कनेक्टर (connectors) के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक निर्माण खंड (building blocks) हैं। स्थानीय उत्पादन को मजबूत करने से आयात निर्भरता कम होती है और ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार जैसे क्षेत्रों का समर्थन होता है।
प्रमुख विशेषताएं (Key features)
- प्रोत्साहन के प्रकार (Types of incentives): तीन प्रोत्साहन संरचनाएं पेश की जाती हैं- टर्नओवर-लिंक्ड, पूंजीगत व्यय-लिंक्ड (capital expenditure‑linked) और एक हाइब्रिड मॉडल जो दोनों का संयोजन है। प्रोत्साहन वर्ष और घटक के आधार पर 1 से 10 प्रतिशत तक होता है।
- अनिवार्य रोजगार (Mandatory employment): पूंजीगत उपकरणों (capital equipment) के उत्पादन सहित आवेदकों को नौकरियां पैदा करनी होंगी।
- कार्यकाल (Tenure): यह योजना कंपनियों को सुविधाएं स्थापित करने के लिए एक वर्ष की गर्भधारण अवधि (gestation period) के साथ छह वर्षों तक चलती है।
- लक्षित दायरा (Targeted scope): निष्क्रिय घटकों (passive components) पर केंद्रित; सेमीकंडक्टर जैसे सक्रिय उपकरणों (active devices) को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अलग से कवर किया गया है।
- हालिया अनुमोदन (Recent approvals): चौथी किश्त कंपनियों को प्रतिरोधक, कैपेसिटर, विशेष सिरेमिक, रिले, स्विच और कनेक्टर के निर्माण में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे घरेलू क्षमता का विस्तार होता है।
महत्व (Significance)
- आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण (Building supply chains): घरेलू और विदेशी फर्मों को भारत में उत्पादन लाइनें स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे महत्वपूर्ण घटकों (critical components) में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलता है।
- औद्योगिक विकास (Industrial growth): रोजगार उत्पन्न करता है, कौशल बढ़ाता है और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे संबद्ध उद्योगों का समर्थन करता है।
- वैश्विक बाजारों के साथ एकीकरण (Integration with global markets): वैश्विक मानकों को पूरा करने से भारतीय घटक निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में भाग लेने और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
निष्कर्ष (Conclusion)
इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला (electronics value chain) को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक धक्का है। नए निवेश प्रस्तावों की मंजूरी उद्योग के विश्वास को इंगित करती है और एक लचीले और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षेत्र (resilient and competitive manufacturing sector) की दिशा में प्रगति का संकेत देती है।
Source: The Economic Times