चर्चा में क्यों?
तेलंगाना सरकार ने एतूरनागरम वन्यजीव अभयारण्य (Eturnagaram Wildlife Sanctuary) में इको-पर्यटन (eco-tourism) और समुदाय-आधारित संरक्षण को बढ़ावा देने की योजना की घोषणा की है, जिससे संरक्षित क्षेत्र को वापस सार्वजनिक विमर्श में लाया जा सके। अधिकारियों को उम्मीद है कि टिकाऊ पर्यटन वन्यजीवों को संरक्षित करते हुए स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका उत्पन्न करेगा।
पृष्ठभूमि
1952 में स्थापित, एतूरनागरम वन्यजीव अभयारण्य महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमाओं के पास तेलंगाना के मुलुगु जिले में स्थित है। लगभग 812 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में धीरे-धीरे लहरदार मैदान और कम ऊंचाई वाली पहाड़ियाँ हैं। गोदावरी नदी एक किनारे के साथ बहती है और इसकी सहायक नदी डय्यम वागु (Dayyam Vagu) अभयारण्य को दो ब्लॉकों में विभाजित करती है, जो बारहमासी पानी प्रदान करती है। वनस्पति शुष्क पर्णपाती वन (dry deciduous forest) है जिसमें सागौन (teak), बांस और चंदन (sandalwood) का वर्चस्व है। यह क्षेत्र बाघ, तेंदुआ, भेड़िया, स्लॉथ भालू, गौर, सांभर, काला हिरण और नीलगाय जैसे बड़े स्तनधारियों के साथ-साथ मगरमच्छ (mugger crocodiles) और कई पक्षी प्रजातियों सहित विभिन्न प्रकार के सरीसृपों को आश्रय देता है। कोया आदिवासी समुदाय (Koya tribal community) पारंपरिक रूप से यहां वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व में है और हाशिये के साथ झूम खेती (shifting cultivation) का अभ्यास करता है।
प्रमुख विशेषताएं
- नदी का आवास (Riverine habitat): गोदावरी और डय्यम वागु समृद्ध तटीय वनस्पतियों (riparian vegetation) को बनाए रखते हैं और शुष्क मौसम के दौरान हाथियों और हिरणों को आकर्षित करते हैं।
- वनस्पति (Flora): सागौन, बांस, एनोगिसस (anogeissus) और टर्मिनलिया (terminalia) प्रजातियों के साथ शुष्क पर्णपाती वन शाकाहारी लोगों के लिए चारा और आश्रय प्रदान करते हैं और विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों का समर्थन करते हैं।
- जीव (Fauna): बाघ और तेंदुए जैसे शीर्ष शिकारी (Apex predators) परिदृश्य को अनगुलेट्स (ungulates), प्राइमेट्स, स्लॉथ भालू और सरीसृपों के साथ साझा करते हैं। पक्षियों में क्रेस्टेड सर्पेंट ईगल (crested serpent eagles), ग्रे हॉर्नबिल और पैराकीट शामिल हैं।
- सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय कोया जनजातियां वन उपज एकत्र करती हैं और संरक्षण कार्यक्रमों में भाग लेती हैं, जिससे अभयारण्य लोगों और पार्कों के सह-अस्तित्व का उदाहरण बन जाता है।
महत्व
- जैव विविधता हॉटस्पॉट: अभयारण्य तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के जंगलों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाता है, जिससे व्यापक प्रजातियों के लिए जीन प्रवाह (gene flow) की अनुमति मिलती है।
- इको-पर्यटन क्षमता: नियंत्रित प्रकृति ट्रेल्स और होमस्टे आगंतुकों को संरक्षण और आदिवासी संस्कृति के बारे में शिक्षित करते हुए आय उत्पन्न कर सकते हैं।
- सांस्कृतिक विरासत: प्राचीन मेगालिथिक दफन स्थल (megalithic burial sites) और आदिवासी रीति-रिवाज परिदृश्य में पुरातात्विक मूल्य (archaeological value) जोड़ते हैं।
निष्कर्ष
एतूरनागरम की नदियों, जंगलों और संस्कृति का मिश्रण इसे मध्य भारत में एक अनूठा संरक्षित क्षेत्र बनाता है। जिम्मेदार पर्यटन और सामुदायिक प्रबंधन के साथ, यह वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित आश्रय और स्थानीय लोगों के लिए गर्व का स्रोत बना रह सकता है।
स्रोत: Wikipedia · Telangana Forest Department