रक्षा

अभ्यास प्रगति: बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास, हिंद महासागर

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खबरों में क्यों?

भारतीय सेना ने अभ्यास प्रगति (Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region) नामक एक नए बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास की घोषणा की है। मेघालय के उमरोई छावनी में 18 मई से 31 मई 2026 के बीच निर्धारित, यह अभ्यास रक्षा सहयोग और अंतःक्रियाशीलता (interoperability) को बढ़ावा देने के लिए ग्यारह मित्र देशों की सेनाओं को एक साथ लाएगा।

पृष्ठभूमि

भारत लंबे समय से व्यक्तिगत देशों के साथ द्विपक्षीय अभ्यास आयोजित करता रहा है। अभ्यास प्रगति हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean region) पर केंद्रित पहला बहुपक्षीय अभ्यास है। प्रारंभ में पंद्रह देशों को आमंत्रित किया गया था; जिनमें से ग्यारह ने अपनी भागीदारी की पुष्टि की है, जिनमें बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस और श्रीलंका शामिल हैं। शेष देशों ने लॉजिस्टिक बाधाओं या आंतरिक प्रतिबद्धताओं के कारण इनकार कर दिया।

प्रमुख उद्देश्य

  • रक्षा संबंधों को मजबूत करना: संयुक्त युद्धाभ्यास, सामरिक प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से क्षेत्रीय सेनाओं के बीच विश्वास और समझ गहरी होगी।
  • स्वदेशी रक्षा उत्पादों का प्रदर्शन: अभ्यास स्थल पर एक उद्योग प्रदर्शनी संभावित खरीदारों को भारत के घरेलू स्तर पर विकसित हथियारों, ड्रोन और संचार प्रणालियों का प्रदर्शन करेगी।
  • क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना: संयुक्त ड्रिल और मानवीय सहायता सिमुलेशन के माध्यम से, प्रतिभागी प्राकृतिक आपदाओं या सुरक्षा संकटों के दौरान समन्वय करना सीखेंगे।

महत्व

  • अपनी तरह का पहला: एक साथ कई देशों की मेजबानी करके, भारत खुद को हिंद महासागर क्षेत्र में छोटे राज्यों के लिए एक सुरक्षा भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है।
  • आर्थिक अवसर: रक्षा एक्सपो से निर्यात आदेश और प्रौद्योगिकी सहयोग प्राप्त हो सकता है, जिससे घरेलू हथियार उद्योग को समर्थन मिलेगा।
  • सॉफ्ट पावर कूटनीति: सैन्य आदान-प्रदान अक्सर शिक्षा, आपदा राहत और समुद्री सुरक्षा में व्यापक सहयोग में बदल जाते हैं।

स्रोत: DD News

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