रक्षा

Exercise Dustlik 2026: भारत-उज्बेकिस्तान सैन्य अभ्यास और आतंकवाद का मुकाबला

Exercise Dustlik 2026: भारत-उज्बेकिस्तान सैन्य अभ्यास और आतंकवाद का मुकाबला

चर्चा में क्यों?

12 अप्रैल 2026 को, भारतीय सेना और उज़्बेक सशस्त्र बलों (Uzbek armed forces) की टुकड़ियों ने उज़्बेकिस्तान के गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया (Gurumsaray Field Training Area) में अभ्यास डस्टलिक (Exercise Dustlik) के सातवें संस्करण की शुरुआत की। 25 अप्रैल 2026 तक चलने वाले इस दो सप्ताह के अभ्यास का उद्देश्य अर्ध-पहाड़ी इलाकों में (semi-mountainous terrain) आतंकवाद-रोधी (counter-terrorism) और बंधक-बचाव (hostage-rescue) कार्यों की संयुक्त योजना और निष्पादन में सुधार करना है। भारत ने महार रेजिमेंट (MAHAR Regiment) और वायु सेना से 60 कर्मियों को भेजा है, जबकि समान आकार की उज़्बेक टुकड़ी भाग ले रही है।

पृष्ठभूमि

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए 2019 में अभ्यास डस्टलिक शुरू हुआ। देश बारी-बारी से इस ड्रिल की मेजबानी करते हैं; 2025 का संस्करण पुणे के पास औंध (Aundh) में हुआ था। यह अभ्यास नई दिल्ली और ताशकंद के बीच बढ़ते सहयोग को रेखांकित करता है, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी, आपदा राहत और शांति स्थापना (peacekeeping) में।

प्रमुख गतिविधियां

  • भूमि नेविगेशन और स्ट्राइक मिशन: सैनिक कठिन भूभाग को नेविगेट करने, घात लगाकर हमला करने की योजना बनाने और नकली दुश्मन के शिविरों पर सटीक छापेमारी करने का अभ्यास करते हैं।
  • क्षेत्र वर्चस्व और बंधक बचाव (Area domination and hostage rescue): ड्रिल में रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा करने, बंधकों को मुक्त करने और सशस्त्र समूहों को बेअसर करने के अभ्यास शामिल हैं। विशेष अभियान इकाइयां (Special operations units) गुप्त गतिविधि (stealth movement) और समन्वित हमले (coordinated assaults) का प्रदर्शन करती हैं।
  • सत्यापन अभ्यास (Validation exercise): एक 48 घंटे का अंतिम मिशन नकली चोटों, संचार टूटने और बदलते उद्देश्यों से निपटते हुए वास्तविक समय में एक जटिल ऑपरेशन की योजना बनाने और उसे निष्पादित करने की संयुक्त बलों की क्षमता का परीक्षण करता है।

महत्व

  • अंतरसंचालनीयता (Interoperability): संयुक्त प्रशिक्षण सैनिकों को एक-दूसरे की रणनीति, संचार प्रोटोकॉल और उपकरणों को समझने में मदद करता है, जिससे वास्तविक संचालन में निर्बाध सहयोग का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • विश्वास निर्माण: यह अभ्यास सैनिकों के बीच सौहार्द और विश्वास को बढ़ावा देता है और क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
  • रणनीतिक साझेदारी: बढ़ा हुआ सैन्य संबंध मध्य एशिया के प्रमुख भागीदार भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापक आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग का पूरक है।

निष्कर्ष

पर्वतीय युद्ध और आतंकवाद-रोधी कौशल को निखारकर, अभ्यास डस्टलिक 2026 सामान्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की तैयारियों को मजबूत करता है। यह भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की बढ़ती गहराई का भी संकेत देता है, जो रक्षा से आगे बढ़कर व्यापार, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक फैला हुआ है।

स्रोत: Press Information Bureau

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