अर्थव्यवस्था

FOM Blending: Fermented Organic Manure, SuBiCulP और NBS

FOM Blending: Fermented Organic Manure, SuBiCulP और NBS

चर्चा में क्यों?

मई 2026 में आयोजित बायो-एनर्जी और बायो-फर्टिलाइजर बिजनेस (BBB) शिखर सम्मेलन के दौरान, इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (Indian Biogas Association) ने रासायनिक उर्वरकों के साथ किण्वित जैविक खाद (Fermented Organic Manure - FOM) के अनिवार्य सम्मिश्रण (mandatory blending) का आह्वान करते हुए एक श्वेत पत्र (white paper) जारी किया। यह पेपर 2030 तक चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत सम्मिश्रण तक पहुंचने का प्रस्ताव करता है। समर्थकों का कहना है कि यह उपाय मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करेगा, बायोगैस संयंत्रों के आसपास सर्कुलर इकोनॉमी (circular economy) को प्रोत्साहित करेगा और आयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम करेगा。

पृष्ठभूमि

किण्वित जैविक खाद (FOM) बायोगैस या संपीड़ित बायोगैस (CBG) संयंत्रों में एनारोबिक पाचन (anaerobic digestion) के बाद प्राप्त पोषक तत्वों से भरपूर अवशेष है। साधारण कम्पोस्ट (compost) के विपरीत, FOM में नाइट्रोजन, फास्फोरस और जैविक कार्बन के उच्च स्तर होते हैं। यह मिट्टी के कार्बनिक पदार्थों को बहाल करने में मदद करता है, जल प्रतिधारण (water retention) में सुधार करता है और लाभकारी रोगाणुओं (beneficial microbes) को बढ़ावा देता है। 2025 के उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertiliser Control Order) ने "ऑर्गेनिक कार्बन एन्हांसर (Organic Carbon Enhancer)" श्रेणी के तहत FOM को पेश किया, जिससे गुणवत्ता मानकों के साथ इसकी बिक्री सक्षम हुई। इसके बावजूद, भारत की मिट्टी क्षीण बनी हुई है: औसत मिट्टी का जैविक कार्बन लगभग 0.4 प्रतिशत है, जो वांछनीय 0.8-1 प्रतिशत सीमा से बहुत नीचे है। रासायनिक उर्वरकों के साथ FOM का सम्मिश्रण बायोगैस संयंत्रों के कचरे का उपयोग करते हुए इस गिरावट को उलटने में मदद कर सकता है。

श्वेत पत्र की सिफारिशें

  • चरणबद्ध सम्मिश्रण अनुसूची: 2026-27 में 1 प्रतिशत, 2027-28 में 3 प्रतिशत, 2028-29 में 5 प्रतिशत और 2029-30 से 10 प्रतिशत की दर से FOM के न्यूनतम सम्मिश्रण को अनिवार्य किया जाए। इसका उद्देश्य स्थिर मांग और बायोगैस तथा CBG संयंत्रों द्वारा उत्पादित FOM का पूर्ण उठाव (full offtake) सुनिश्चित करना है।
  • मौजूदा योजनाओं के साथ एकीकरण: FOM को पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (NBS) ढांचे, मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC) योजना और परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) में शामिल किया जाए। जैविक कार्बन को पोषक तत्व पैरामीटर (nutrient parameter) के रूप में पहचानने से संतुलित उर्वरक उपयोग और FOM के लिए उचित सब्सिडी सक्षम होगी।
  • सुबिकल्प (SuBiCulP) कार्यक्रम शुरू करें: प्रस्तावित सस्टेनेबल बायोगैस-ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बेस्ड कल्टीवेशन प्रोग्राम (“SuBiCulP से समृद्धि”) आपूर्ति श्रृंखला का समन्वय करेगा, बायोगैस संयंत्रों को किसानों से जोड़ेगा और क्षेत्रीय पोषक तत्व प्रबंधन योजनाएं विकसित करेगा। इसका उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य के साथ नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को जोड़ने वाला एक सर्कुलर इकोसिस्टम बनाना है।
  • अनुसंधान और विस्तार (Research and extension): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों को क्षेत्र-विशिष्ट अनुप्रयोग प्रोटोकॉल (region‑specific application protocols) विकसित करने और योगों (formulations) में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित करें। बहुभाषी विस्तार सेवाएं, गुणवत्ता प्रमाणीकरण और विकेंद्रीकृत (decentralised) परीक्षण प्रयोगशालाएं किसानों को अपनाने में सहायता करेंगी।
  • अपेक्षित लाभ: एसोसिएशन का अनुमान है कि 10 प्रतिशत सम्मिश्रण भारत को उर्वरक आयात लागत में सालाना लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर बचा सकता है। यह मिट्टी की संरचना में भी सुधार करेगा, रासायनिक निर्भरता को कम करेगा और जलवायु लचीलेपन (climate resilience) में योगदान देगा।

स्रोत

The Hindu

Continue reading on the App

Save this article, highlight key points, and take quizzes.

App Store Google Play
Home Current Affairs 📰 Daily News 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Web App