इतिहास

Gajapati Empire: 15वीं सदी का शिलालेख, ओडिशा और आंध्र प्रदेश

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चर्चा में क्यों?

आंध्र प्रदेश के गुंटूर (Guntur) में लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर में एक पत्थर के खंभे पर 15वीं सदी के गजपति राजाओं से जुड़ा एक प्राचीन तेलुगु शिलालेख पाया गया। शिलालेख में राजा पुरुषोत्तम देव (King Purushottama Deva) के अधीन सेवारत प्रबंधक (steward) कुमारगुरु महापात्र (Kumaraguru Mahapatra) का नाम है, और यह देवता को दूध चढ़ाने (offering of milk) को दर्ज करता है। यह खोज ओडिशा और आंध्र क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को उजागर करती है।

पृष्ठभूमि

गजपति साम्राज्य 15वीं सदी के मध्य में अब के ओडिशा में उदित हुआ। इसकी स्थापना कपिलेंद्र देव (Kapilendra Deva) ने की थी और यह पुरुषोत्तम देव और प्रतापरुद्र देव (Prataparudra Deva) जैसे शासकों के अधीन अपने चरमोत्कर्ष (zenith) पर पहुंचा। अपनी ऊंचाई पर साम्राज्य ओडिशा, उत्तरी आंध्र प्रदेश और बंगाल के कुछ हिस्सों में फैला हुआ था। राजधानी को कटक (Cuttack) से कटक (Kataka) (कोणार्क के पास) ले जाया गया, और शासक कला, साहित्य और कोणार्क में सूर्य मंदिर जैसी स्मारकीय वास्तुकला के संरक्षक थे।

नया पाया गया शिलालेख मूल रूप से कोंडावीडु किले (Kondaveedu Fort) का हिस्सा होने वाले एक खंभे से आया है, जिसे बाद में मंदिर में स्थानांतरित कर दिया गया। यह दर्शाता है कि गजपति दरबार के अधिकारियों ने मंदिर के प्रसाद की देखरेख की और उड़िया अधिकारी इस क्षेत्र में सक्रिय थे। यह पाठ हरि-हर (Hari-Hara) पंथ का पालन करता है, जो वैष्णव और शैव तत्वों का संयोजन है, जिसे गजपति शासकों द्वारा बढ़ावा दिया गया था।

गजपति साम्राज्य के बारे में

  • स्थापना: कपिलेंद्र देव ने लगभग 1435 ईस्वी में सत्ता पर कब्जा कर लिया और कूटनीति (diplomacy) और सैन्य अभियानों के माध्यम से अपने क्षेत्र का विस्तार किया। साम्राज्य दिल्ली सल्तनत (Delhi Sultanate) और बाद में बहमनी सल्तनत (Bahmani Sultanate) से स्वतंत्र रहा।
  • प्रशासन और संस्कृति: गजपतियों ने शैव धर्म और वैष्णव धर्म दोनों का समर्थन किया। उन्होंने उड़िया भाषा, शास्त्रीय नृत्य और संगीत को संरक्षण दिया, और मंदिरों और किलों का निर्माण किया।
  • पतन: बंगाल सल्तनत और मुगलों द्वारा आंतरिक उत्तराधिकार विवादों (succession disputes) और आक्रमणों ने साम्राज्य को कमजोर कर दिया। 17वीं शताब्दी की शुरुआत तक इसके क्षेत्रों को मुगल प्रशासन में मिला लिया गया।

स्रोत: Deccan Chronicle

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