पर्यावरण

Gamgul Siyabehi Sanctuary: हिमालयी ब्राउन भालू और जैव विविधता

Gamgul Siyabehi Sanctuary: हिमालयी ब्राउन भालू और जैव विविधता

समाचार में क्यों?

मई 2026 में हिमाचल प्रदेश वन विभाग (Himachal Pradesh Forest Department) ने Gamgul Siyabehi Wildlife Sanctuary में हिमालयन ब्राउन बीयर (Himalayan brown bear) का पहला फोटोग्राफिक सबूत प्राप्त किया। इस दूरस्थ उच्च ऊंचाई वाले संरक्षित क्षेत्र में निगरानी प्रयासों के दौरान कैमरा ट्रैप (Camera traps) ने गंभीर रूप से लुप्तप्राय (critically endangered) भालू को कैद किया। यह दृश्य अभयारण्य के पारिस्थितिक मूल्य और संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

अभयारण्य के बारे में

Gamgul Siyabehi Wildlife Sanctuary हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की सलूनी तहसील (Salooni tehsil) की भंडार घाटी (Bhandal valley) में स्थित है। 1962 में स्थापित, यह लगभग 109 वर्ग किमी को कवर करता है और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की सीमा में है। इस उच्च ऊंचाई वाले रिजर्व (high‑altitude reserve) में देवदार और शंकुधारी जंगल (coniferous forests), अल्पाइन चारागाह (alpine pastures) और बीहड़ घाटियाँ हैं। यह हिमाचल प्रदेश का एकमात्र अभयारण्य है जिसके बारे में माना जाता है कि इसने कभी कश्मीरी बारहसिंगे (hangul) का समर्थन किया था।

वन्यजीव महत्व

  • विविध जीव-जंतु (Diverse fauna): अभयारण्य कस्तूरी मृग (musk deer), हिमालयन तहर (Himalayan tahr), तीतर (pheasants) और रंगीन पक्षी प्रजातियों की मेजबानी करता है। अल्पाइन घास के मैदान (Alpine meadows) और जंगल के पैच इन जानवरों के लिए आवास प्रदान करते हैं।
  • गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियां: हिमालयन ब्राउन बीयर को भारत में गंभीर रूप से लुप्तप्राय (critically endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। हाल की तस्वीर गामगुल (Gamgul) में इसकी उपस्थिति की पुष्टि करती है, जो दूरस्थ निगरानी और आवास सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करती है।
  • पारिस्थितिक महत्व (Ecological importance): शंकुधारी वन और अल्पाइन चरागाहों का मिश्रण आवासों का मोज़ेक (mosaic of habitats) बनाता है। यह क्षेत्र पीर पंजाल श्रेणी (Pir Panjal range) का हिस्सा है, जो पश्चिमी हिमालय को कश्मीर घाटी से जोड़ता है और उच्च ऊंचाई के अनुकूल प्रजातियों का समर्थन करता है।

चुनौतियाँ और संरक्षण के प्रयास

बीहड़ भूभाग (Rugged terrain) और कठोर मौसम गश्त (patrolling) को कठिन बना देते हैं। पशुओं की चराई और कभी-कभी अतिक्रमण जैसी मानवीय गतिविधियाँ, वन्यजीवों को परेशान कर सकती हैं। वन विभाग ने कैमरा-ट्रैप (camera‑trap) निगरानी बढ़ा दी है, स्थानीय समुदायों को शामिल किया है और अभयारण्य के चारों ओर एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (eco‑sensitive zone) तैयार किया है। आवासों की रक्षा करना यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि हिमालयन ब्राउन बीयर जैसी दुर्लभ प्रजातियां जीवित रह सकें।

निष्कर्ष

Gamgul Siyabehi Sanctuary में हिमालयन ब्राउन बीयर (Himalayan brown bear) की खोज क्षेत्र की जैव विविधता पर जोर देती है। निरंतर निगरानी, ​​सामुदायिक भागीदारी और आवास सुरक्षा (habitat protection) इस उच्च ऊंचाई वाले रिजर्व और इसके वन्यजीवों को सुरक्षित रखने में मदद करेगी।

स्रोत

New Indian Express

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