Environment (पर्यावरण)

Gangotri National Park: उत्तराखंड, भागीरथी नदी और हिमालयी जैव विविधता

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चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park) सर्दियों (winter season) के कारण बंद रहने के बाद 1 अप्रैल 2026 को पर्यटकों के लिए फिर से खुल गया। ट्रैकरों (trekkers) को प्रवेश करने की अनुमति देने से पहले अधिकारियों ने 'कंखू बैरियर गेट (Kankhu barrier gate)' पर औपचारिक पूजा (ceremonial worship) की। उन्होंने घोषणा की कि बर्फ पिघलने के साथ-साथ नेलांग घाटी (Nelang Valley), गरतांग गली (Gartang Gali), गौमुख-तपोवन (Gaumukh–Tapovan) और केदारताल (Kedartal) जैसे लोकप्रिय मार्ग धीरे-धीरे फिर से खुल जाएंगे। पार्क के फिर से खुलने के साथ ही भारत के सबसे दर्शनीय ऊंचे उद्यानों (scenic high‑altitude parks) में से एक में ट्रैकिंग सीजन की शुरुआत हो गई है।

पृष्ठभूमि

1989 में स्थापित, गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान भागीरथी नदी (Bhagirathi River) के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र (catchment) में लगभग 1,553 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस पार्क में शंकुधारी वन (coniferous forests), अल्पाइन घास के मैदान (alpine meadows) और ग्लेशियर शामिल हैं, जिनमें 'गंगोत्री ग्लेशियर (Gangotri Glacier)' भी शामिल है, जो गोमुख (Gomukh) में अपने उद्गम स्थल (origin) पर गंगा नदी (River Ganga) को पानी देता है। इसकी सीमा उत्तर-पूर्व में चीन (तिब्बत) से लगती है और यह गोविंद राष्ट्रीय उद्यान (Govind National Park) और केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य (Kedarnath Wildlife Sanctuary) से सटा हुआ है, जो एक बड़ा संरक्षित परिदृश्य (protected landscape) बनाता है। यहाँ की ऊंचाई लगभग 1,800 मीटर से 7,000 मीटर से अधिक तक है, जो समशीतोष्ण वनों (temperate forests) से लेकर ऊंचाई वाले टुंड्रा (high‑altitude tundra) तक आवासों (habitats) की एक पच्चीकारी (mosaic) बनाता है।

पारिस्थितिकी और आकर्षण (Ecology and attractions)

  • वनस्पतियां (Flora): निचले हिस्सों में पश्चिमी हिमालयी उप-अल्पाइन कोनिफर वन (subalpine conifer forests) पाए जाते हैं, जिनमें देवदार (deodar), फर (fir), स्प्रूस (spruce) और ओक (oak) के पेड़ बहुतायत में होते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोडोडेंड्रोन (rhododendrons), बौने जुनिपर (dwarf junipers) और रंग-बिरंगे जंगली फूलों के साथ अल्पाइन झाड़ियां और घास के मैदान (alpine shrubs and meadows) मिलते हैं।
  • जीव-जंतु (Fauna): यह पार्क हिम तेंदुओं (snow leopards - लगभग 35 व्यक्ति), हिमालयी काले भालू (Himalayan black bears), भूरे भालू (brown bears), कस्तूरी मृग (musk deer), नीली भेड़ (blue sheep - भरल), हिमालयन तहर (Himalayan tahr) और कई पक्षी प्रजातियों (bird species) जैसे हिमालयन मोनाल (Himalayan monal) और कोकलास तीतर (koklass pheasant) को आवास प्रदान करता है।
  • प्रसिद्ध ट्रेक (Iconic treks): पर्यटक गौमुख (Gaumukh) तक के 18 किलोमीटर के ट्रेक की ओर आकर्षित होते हैं, जो गंगोत्री ग्लेशियर (Gangotri Glacier) का सिरा (snout) है; चुनौतीपूर्ण तपोवन घास का मैदान ट्रेक (Tapovan meadow trek); और केदारताल ट्रेक (Kedartal trek), जो ऊंची चोटियों के नीचे नीले रंग की हिमनद झीलों (glacial lakes) से होकर गुजरता है। नेलांग घाटी (Nelang Valley), जिसे इसके बंजर परिदृश्य (barren landscape) के लिए 'मिनी लद्दाख (Mini Ladakh)' कहा जाता है, और गरतांग गली (Gartang Gali), जो एक चट्टान के किनारे बना एक बहाल लकड़ी का मार्ग (restored wooden trail) है, अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं।
  • संरक्षण संबंधी चुनौतियाँ (Conservation challenges): कठोर सर्दियाँ, कठिन इलाके और तीर्थयात्रियों और ट्रैकर्स (pilgrims and trekkers) के भारी दबाव के कारण संरक्षण में चुनौतियाँ आती हैं। वन्यजीवों की सुरक्षा (protect wildlife) और लोगों की सुरक्षा (safety) के लिए यह पार्क हर साल 30 नवंबर से 31 मार्च तक बंद रहता है। सख्त परमिट (Strict permits) और आगंतुकों की संख्या (visitor numbers) पर सीमाएं इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने में मदद करती हैं।

हाल के घटनाक्रम (Recent developments)

  • 2025 में इस पार्क में लगभग 29,000 पर्यटक आए, जिससे लगभग ₹81 लाख का राजस्व (revenue) प्राप्त हुआ। अधिकारी नाजुक आवासों (fragile habitats) की सुरक्षा करते हुए पर्यटन (tourism) को जिम्मेदारी से बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं।
  • गौमुख और केदारताल जैसे कुछ मार्ग अप्रैल की शुरुआत में भी आंशिक रूप से बर्फ से ढके (snow‑covered) रहते हैं। वन विभाग (forest department) ने ट्रैकर्स को ऊंचाई वाले मार्गों पर जाने से पहले स्थितियों की जांच करने और परमिट (permits) प्राप्त करने की सलाह दी है।
  • स्थानीय समुदाय और वन विभाग गरतांग गली जैसे ऐतिहासिक मार्गों (historic routes) को बहाल (restore) करने और कैंपसाइट (campsites) और अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं (waste‑management facilities) जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं।

महत्व (Significance)

  • इकोटूरिज्म (Ecotourism): यह पार्क आगंतुकों को प्राचीन हिमालयी जंगल (pristine Himalayan wilderness) का अनुभव करने का अवसर प्रदान करने के साथ-साथ स्थानीय गाइडों (local guides) और कुलियों (porters) को आजीविका (livelihoods) प्रदान करता है। जिम्मेदार पर्यटन संरक्षण और जागरूकता (conservation and awareness) को प्रोत्साहित करता है।
  • जल विज्ञान संबंधी महत्व (Hydrological importance): गंगा के उद्गम क्षेत्रों (headwaters) की रक्षा करना निचले इलाकों के लाखों लोगों के लिए जल सुरक्षा (water security) सुनिश्चित करता है। पार्क में ग्लेशियर (Glaciers) और जंगल (forests) जलप्रवाह (streamflow) को नियंत्रित करते हैं और बर्फ के पिघले पानी (snowmelt) को जमा करते हैं।
  • जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity conservation): गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park) दुर्लभ प्रजातियों (rare species) के लिए एक शरणस्थली है और पश्चिमी हिमालय में आनुवंशिक विविधता (genetic diversity) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

निष्कर्ष

गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान का वार्षिक उद्घाटन ट्रैकिंग सीजन (trekking season) की शुरुआत का संकेत देता है और पर्यटन और संरक्षण के बीच नाजुक संतुलन (delicate balance) को भी उजागर करता है। आगंतुकों को नियमों (regulations) का सम्मान करना चाहिए, पर्यावरणीय प्रभाव (environmental impact) को कम करना चाहिए और पार्क के पारिस्थितिक (ecological) और सांस्कृतिक महत्व (cultural significance) की सराहना करनी चाहिए।

स्रोत: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस (The New Indian Express)

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