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GARBH-INi Programme: प्रीटर्म बर्थ, एआई प्रेडिक्शन और मातृ स्वास्थ्य

GARBH-INi Programme: प्रीटर्म बर्थ, एआई प्रेडिक्शन और मातृ स्वास्थ्य

चर्चा में क्यों?

23 मार्च 2026 को, केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री, डॉ जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि GARBH-INi (गर्भ-इनी) कार्यक्रम के तहत भारत के सबसे बड़े गर्भावस्था कोहोर्ट (cohort) ने लगभग 12,000 गर्भवती महिलाओं को नामांकित किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समय से पहले जन्म (preterm birth) की भविष्यवाणी करने और उसे रोकने के लिए कृत्रिम-बुद्धिमत्ता-संचालित उपकरण विकसित करना है, जो नवजात मृत्यु और दीर्घकालिक रुग्णता का एक प्रमुख कारण है।

पृष्ठभूमि

GARBH-INi का अर्थ इंटरडिसिप्लिनरी ग्रुप फॉर एडवांस रिसर्च ऑन बर्थ आउटकम्स - इंडिया इनिशिएटिव (Interdisciplinary Group for Advanced Research on Birth Outcomes – India Initiative) है और इसे जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित किया जाता है। समय से पहले जन्म (गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले) वैश्विक नवजात मृत्यु के एक चौथाई के लिए जिम्मेदार है, और भारत एक असंगत बोझ वहन करता है। 2015 में शुरू किया गया, GARBH-INi समय से पहले प्रसव के कारणों को समझने और व्यक्तिगत भविष्यवाणी मॉडल विकसित करने के लिए नैदानिक महामारी विज्ञान (clinical epidemiology), मल्टी-ओमिक्स बायोमार्कर (multi-omics biomarkers - जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स, मेटाबोलोमिक्स), इमेजिंग और डेटा विज्ञान को एकीकृत करता है।

मुख्य उपलब्धियां

  • बड़ा कोहोर्ट और बायोरिपॉजिटरी: गुरुग्राम सिविल अस्पताल में गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में 12,000 से अधिक महिलाओं को नामांकित किया गया था और प्रसव के दौरान उनका पालन किया गया था। इस अध्ययन ने 1.6 मिलियन से अधिक बायोस्पेसिमेन (biospecimens) और एक मिलियन अल्ट्रासाउंड चित्र तैयार किए हैं, जिन्हें शोध के लिए राष्ट्रीय बायोरिपॉजिटरी (national biorepository) में संग्रहीत किया गया है।
  • AI-आधारित उपकरण: शोधकर्ताओं ने भारतीय आबादी के अनुरूप गर्भावस्था डेटिंग मॉडल विकसित किए हैं, समय से पहले जन्म की भविष्यवाणी करने वाले माइक्रोबियल (microbial) हस्ताक्षरों की पहचान की है, और प्रारंभिक जोखिम मूल्यांकन के लिए आनुवंशिक मार्करों की खोज की है। ये उपकरण चिकित्सकों को मरीजों को वर्गीकृत करने और जल्द हस्तक्षेप करने में सक्षम बनाते हैं।
  • डेटा-शेयरिंग प्लेटफॉर्म: GARBH-INi-DRISHTI पोर्टल अनाम डेटा और छवियों तक सुरक्षित पहुंच प्रदान करता है, जिससे दुनिया भर के शोधकर्ता विश्लेषण में योगदान कर सकते हैं और वैज्ञानिक खोज में तेजी ला सकते हैं।
  • अनुवाद के लिए साझेदारी: GARBH-INi-Anandi Maa (आनंदी मां) पहल के तहत माइक्रोबायोम-आधारित बायोथेरेप्यूटिक्स, AI-सक्षम अल्ट्रासाउंड रिपोर्टिंग सिस्टम और जोखिम-स्तरीकरण प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए जैव प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

यह क्यों मायने रखता है

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का समाधान: समय से पहले जन्म शिशु मृत्यु और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। भारतीय आबादी के अनुरूप भविष्य कहनेवाला (Predictive) उपकरण चिकित्सकों को निवारक उपाय करने और परिणामों को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
  • एकीकृत विज्ञान: महामारी विज्ञान, मल्टी-ओमिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का संयोजन गर्भावस्था की समग्र समझ पैदा करता है और अन्य जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए एक टेम्पलेट प्रदान करता है।
  • क्षमता निर्माण: यह कार्यक्रम शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करता है, बायोरिपॉजिटरी जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण करता है और अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।

निष्कर्ष

एक अभूतपूर्व डेटासेट को इकट्ठा करके और AI की शक्ति का उपयोग करके, GARBH-INi पहल भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बदलने का प्रयास करती है। जैसे-जैसे भविष्यवाणियां परिपक्व होती हैं और नैदानिक भागीदारी का विस्तार होता है, यह कार्यक्रम समय से पहले जन्म के बोझ को काफी कम कर सकता है और डेटा-संचालित स्वास्थ्य देखभाल अनुसंधान के लिए एक मानदंड स्थापित कर सकता है।

स्रोत: PIB

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