भूगोल

Ghaggar River: सरस्वती नदी, सिंधु घाटी स्थल और नदी प्रबंधन

Ghaggar River: सरस्वती नदी, सिंधु घाटी स्थल और नदी प्रबंधन

खबरों में क्यों?

पंजाब विधानसभा (Punjab Vidhan Sabha) की एक समिति ने राज्य सरकार को घग्गर नदी (Ghaggar River) पर नए बांध बनाने की हरियाणा की योजनाओं का विरोध करने की सलाह दी है। समिति ने सीवेज के उपचार (treat sewage), औद्योगिक प्रदूषण को रोकने और बाढ़ को रोकने के लिए तटबंध (embankments) बनाने के लिए कड़े उपायों की भी सिफारिश की। ये सिफारिशें पड़ोसी राज्यों के बीच जल बंटवारे और नदी प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवादों (long‑standing disputes) को रेखांकित करती हैं।

पृष्ठभूमि

घग्गर एक आंतरायिक नदी (intermittent river) है जो मुख्य रूप से मानसून के दौरान बहती है। यह हिमाचल प्रदेश की शिवालिक पहाड़ियों (Shivalik hills) से निकलती है, हरियाणा (पिंजौर, अंबाला और हिसार सहित) से होकर गुजरती है और राजस्थान के थार रेगिस्तान (Thar Desert) में गायब हो जाती है। पाकिस्तान में नीचे की ओर यह हाकरा (Hakra) के रूप में जारी रहती है। कई पुरातत्वविद् घग्गर-हाकरा (Ghaggar–Hakra) की पहचान प्राचीन ग्रंथों में वर्णित वैदिक सरस्वती नदी (Vedic Saraswati River) से करते हैं, और इसके सूखे तल (dry bed) के साथ कई सिंधु घाटी स्थल (Indus Valley sites) पाए गए हैं। आज यह नदी दो सिंचाई नहरों को पानी देती है और इसका प्रवाह वर्षा और नहरों से मोड़े गए पानी पर निर्भर करता है।

समिति की सिफारिशें

  • नए बांधों का विरोध: समिति ने उल्लेख किया कि हरियाणा ने घग्गर पर पहले ही कौशल्या बांध (Kaushalya Dam) और कई जलाशय (reservoirs) बना लिए हैं। इसने पंजाब से घग्गर स्थायी समिति (Ghaggar Standing Committee) की अगली बैठक में आगे के निर्माण पर आपत्ति जताने का आग्रह किया।
  • सीवेज उपचार: चंडीगढ़ और हरियाणा से अनुपचारित नगरपालिका और औद्योगिक अपशिष्ट (effluents) नदी को प्रदूषित करते हैं। पंजाब को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (sewage treatment plants) को समय पर पूरा करने और अनुपालन की निगरानी के लिए नियमित रूप से पानी के नमूने (water samples) भेजने के लिए कहा गया है।
  • औद्योगिक प्रदूषण: नदी में कचरा डंप करने वाले कारखानों की जांच की जानी चाहिए और उन पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए। प्रदूषण (contamination) को रोकने के लिए पर्यावरण मानदंडों (environmental norms) को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।
  • बाढ़ नियंत्रण: भारी बारिश के दौरान दरारों को रोकने के लिए, समिति ने मिट्टी के तटबंध ("धुस्सी" - earthen embankments) बनाने और पत्थरों और तार की जाली (wire mesh) के साथ किनारों को मजबूत करने की सिफारिश की। किसानों को सिंचाई के लिए सीवेज प्लांट से उपचारित पानी मिलना चाहिए।
  • सर्वेक्षण और सीमांकन (Survey and demarcation): अधिकारियों को नदी के पुराने मार्ग का सर्वेक्षण और सीमांकन करना चाहिए और उन संवेदनशील बिंदुओं की पहचान करनी चाहिए जहां सिंचाई पाइपों से रिसाव (leaks) बाढ़ का कारण बन सकता है।

ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व

  • पवित्र पहचान: घग्गर-हाकरा (Ghaggar‑Hakra) की तुलना अक्सर ऋग्वेद की पौराणिक सरस्वती नदी (Saraswati River) से की जाती है। कालीबंगन और बनावली (Kalibangan and Banawali) सहित कई सिंधु घाटी सभ्यता स्थल (Indus Valley civilisation sites), इसके पैलियोचैनल्स (palaeochannels) के साथ स्थित हैं।
  • मौसमी प्रकृति: बारहमासी हिमालयी नदियों (perennial Himalayan rivers) के विपरीत, घग्गर केवल मानसून के दौरान बहती है और जल्दी सूख जाती है। सदियों से इसका प्रवाह कम हो गया है क्योंकि सतलुज और यमुना (Sutlej and Yamuna) जैसी सहायक नदियों ने अपना मार्ग सिंधु और गंगा बेसिन की ओर बदल दिया है।
  • सिंचाई की भूमिका: इसके मौसमी प्रवाह (seasonal flow) के बावजूद नदी दो नहरों को पानी देती है जो हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों की सिंचाई करती हैं। प्रस्तावित बांध पानी की उपलब्धता को बदल सकते हैं और अंतर-राज्य विवादों (inter‑state disputes) को बढ़ा सकते हैं।

स्रोत: The Hindu

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