समाचार में क्यों?
Institute for Economics & Peace ने जून में अपना Global Peace Index 2026 जारी किया। यह रिपोर्ट संघर्ष, अपराध और सैन्यीकरण (militarisation) जैसे संकेतकों के आधार पर 163 देशों और क्षेत्रों में शांति के स्तर का आकलन करती है। यह दर्शाता है कि लगातार दसवें वर्ष दुनिया कम शांतिपूर्ण हुई है。
पृष्ठभूमि
Global Peace Index एक वार्षिक रिपोर्ट है जो देशों को उनकी शांति के अनुसार रैंक करती है। संकेतकों को तीन डोमेन (domains) में बांटा गया है: चल रहे संघर्ष, सामाजिक सुरक्षा व संरक्षा, और सैन्यीकरण। स्कोर अंतरराष्ट्रीय संगठनों और थिंक टैंकों (think tanks) के गुणात्मक और मात्रात्मक डेटा पर आधारित होते हैं। कम स्कोर अधिक शांति का संकेत देता है。
प्रमुख निष्कर्ष
- समग्र गिरावट: 2025 की तुलना में वैश्विक शांति में 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। 23 में से चौदह संकेतक खराब हुए हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी भी समय की तुलना में अब अधिक सक्रिय राज्य-आधारित (state-based) संघर्ष चल रहे हैं।
- शीर्ष और निचले देश: आइसलैंड (Iceland) लगातार 19वें वर्ष सबसे शांतिपूर्ण देश बना रहा। न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, स्लोवेनिया (Slovenia) और आयरलैंड शीर्ष पांच में शामिल अन्य देश रहे। रूस को सबसे निचला स्थान मिला, उसके बाद सूडान, Democratic Republic of the Congo, यूक्रेन और इज़राइल का स्थान रहा।
- क्षेत्रीय बदलाव: दक्षिण एशिया (South Asia) में सबसे बड़ी क्षेत्रीय गिरावट का अनुभव हुआ और मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका (Middle East and North Africa) के बाद यह दूसरा सबसे कम शांतिपूर्ण क्षेत्र है। निन्यानबे देशों के स्कोर में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 62 देशों में सुधार हुआ।
- भारत का प्रदर्शन: भारत 127वें स्थान पर खिसक गया, जिसमें चार स्थानों की गिरावट और इसके स्कोर में 2.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। चल रहे संघर्ष के डोमेन में 9.2 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसका आंशिक कारण मणिपुर में जारी जातीय हिंसा है जिसमें मई 2023 से 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। पाकिस्तान और म्यांमार के साथ तनाव के कारण पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में भी गिरावट आई है।
- आर्थिक लागत: 2025 में हिंसा का वैश्विक आर्थिक प्रभाव 21.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 10.5 प्रतिशत के बराबर है।
निष्कर्ष
2026 Global Peace Index बढ़ते संघर्षों और असुरक्षा की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। भारत की गिरावट संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में बातचीत और सुलह (reconciliation) तथा पड़ोसियों के साथ रचनात्मक जुड़ाव (constructive engagement) की आवश्यकता को उजागर करती है। नीति निर्माताओं (Policymakers) को शांति-निर्माण की पहल में निवेश करने के साथ-साथ अशांति को बढ़ावा देने वाले सामाजिक और आर्थिक कारकों को भी संबोधित करना चाहिए。