ख़बरों में क्यों?
भारत ने मार्च 2026 में ग्लोबल ऑपरेशनल नेटवर्क ऑफ एंटी-करप्शन लॉ एन्फोर्समेंट अथॉरिटीज (Global Operational Network of Anti-Corruption Law Enforcement Authorities), जिसे आमतौर पर ग्लोबई नेटवर्क (GlobE Network) के रूप में जाना जाता है, की 12वीं संचालन समिति (Steering Committee) की बैठक की मेजबानी की। नई दिल्ली में प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के निदेशक ने इस बात पर जोर दिया कि संपत्ति की वसूली (asset recovery) भ्रष्टाचार विरोधी सफलता का सच्चा उपाय है। इस आयोजन ने नेटवर्क की रणनीतिक दिशा पर चर्चा करने और सहयोग को मजबूत करने के लिए 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया।
पृष्ठभूमि
ग्लोबई नेटवर्क एक बहुपक्षीय (multilateral) मंच है जो दुनिया भर में विशेष भ्रष्टाचार विरोधी एजेंसियों को जोड़ता है। इसे 2021 में सऊदी अरब की G20 अध्यक्षता के दौरान रियाद पहल (Riyadh Initiative) के तहत लॉन्च किया गया था और यह भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCAC) के ढांचे के भीतर संचालित होता है। नेटवर्क में 135 सदस्य देश और 250 से अधिक प्राधिकरण शामिल हैं, जिनमें EUROPOL, विश्व बैंक (World Bank) और भ्रष्टाचार-विरोधी प्राधिकरणों के अंतर्राष्ट्रीय संघ (International Association of Anti-Corruption Authorities) जैसे पर्यवेक्षक (observers) शामिल हैं। गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) ग्लोबई के लिए भारत के केंद्रीय प्राधिकरण के रूप में कार्य करता है, और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इसकी सदस्य एजेंसियां हैं।
विशेषताएं और कार्य
- सुरक्षित संचार मंच (Secure communication platform): ग्लोबई एक एन्क्रिप्टेड, रीयल-टाइम चैनल प्रदान करता है जो सदस्य एजेंसियों को सीधे जानकारी साझा करने और जांच में समन्वय (coordinate) करने की अनुमति देता है। यह व्यवसायी-स्तर (practitioner-level) का जुड़ाव औपचारिक पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों (mutual legal assistance treaties) का पूरक है।
- संचालन समिति (Steering committee): नेटवर्क एक समिति द्वारा शासित होता है जिसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तेरह सदस्य होते हैं जो प्राथमिकताएं निर्धारित करते हैं और संचालन की देखरेख करते हैं। समिति प्रगति की समीक्षा करने और भविष्य की गतिविधियों की योजना बनाने के लिए समय-समय पर मिलती है।
- क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सहकर्मी-से-सहकर्मी (peer-to-peer) आदान-प्रदान सदस्यों को अवैध संपत्तियों (illicit assets) का पता लगाने, उन्हें जब्त करने और वापस लाने में कौशल निर्माण में मदद करते हैं। यह नेटवर्क जटिल मामलों पर सहयोग की सुविधा प्रदान करता है जो कई अधिकार क्षेत्रों (jurisdictions) में फैले हुए हैं।
- भारत की भूमिका: नई दिल्ली की बैठक में CBI निदेशक ने आधुनिक भ्रष्टाचार की अंतरराष्ट्रीय और तकनीकी प्रकृति पर प्रकाश डाला, और ग्लोबई के प्लेटफॉर्म के अधिक उपयोग का आह्वान किया। भारत ने अपराधों की जांच करने और चोरी की गई संपत्तियों की वसूली के लिए भागीदारों के साथ सहयोग करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
महत्व
- सीमा पार भ्रष्टाचार से लड़ना: चूंकि भ्रष्टाचार की योजनाओं में कई देश और डिजिटल लेनदेन शामिल होते हैं, ग्लोबई नेटवर्क पारंपरिक कूटनीतिक (diplomatic) चैनलों से परे त्वरित सहयोग के लिए एक लचीला तंत्र प्रदान करता है।
- जवाबदेही को मजबूत करना: संपत्ति की वसूली (asset recovery) को प्राथमिकता देकर, नेटवर्क पीड़ितों को चोरी किए गए धन की वापसी और भविष्य के अपराधों को रोकने पर जोर देता है।
- भारत की प्रोफाइल को बढ़ाना: संचालन समिति (steering committee) की मेजबानी वैश्विक भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों में भारत के नेतृत्व को दर्शाती है और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों के बीच विश्वास पैदा करती है।
स्रोत: News On Air