समाचार में क्यों?
हिमाचल प्रदेश में यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site), Great Himalayan National Park (GHNP) अपने संरक्षण प्रयासों और जैव विविधता के अध्ययन के लिए चर्चा में रहा है। अधिकारी स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के साथ पारिस्थितिक संरक्षण को संतुलित करना जारी रखते हैं।
पृष्ठभूमि
1984 में स्थापित और 1999 में अधिसूचित, GHNP पश्चिमी हिमालय में लगभग 75,440 हेक्टेयर (Sainj और Tirthan वन्यजीव अभयारण्यों सहित व्यापक GHNP संरक्षण क्षेत्र कुल 90,540 हेक्टेयर है) को कवर करता है। यह 1,500 मीटर से लेकर 6,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई तक फैला हुआ है, जिसमें गहरी नदी घाटियां, अल्पाइन घास के मैदान (alpine meadows) और बर्फ से ढकी चोटियां शामिल हैं। चार प्रमुख नदियाँ—Jiwa Nal, Sainj, Tirthan और Parvati—पार्क के भीतर उत्पन्न होती हैं और Beas और Indus घाटियों में मिल जाती हैं। पार्क के चारों ओर 26,560 हेक्टेयर का बफर जोन (इको-जोन) है जहां गांव पर्यावरण के अनुकूल आजीविका का अभ्यास करते हैं।
जैव विविधता
- वनस्पति: GHNP संवहनी पौधों (vascular plants) की 800 से अधिक प्रजातियों का घर है, जिनमें शंकुधारी (conifers), रोडोडेंड्रोन (rhododendrons) और अल्पाइन जड़ी-बूटियां शामिल हैं। पच्चीस अलग-अलग वन प्रकार नम समशीतोष्ण वनों (moist temperate forests) से लेकर अल्पाइन स्क्रब (alpine scrubs) तक के संक्रमण का विस्तार करते हैं।
- जीव: यह पार्क लगभग 31 स्तनपायी (mammal) प्रजातियों और पक्षियों की 200 से अधिक प्रजातियों को आश्रय देता है। उल्लेखनीय जानवरों में लुप्तप्राय पश्चिमी ट्रैगोपैन (western tragopan), हिमालयन तहर (Himalayan tahr), हिम तेंदुआ (snow leopard), कस्तूरी मृग और हिमालयी भूरा भालू (Himalayan brown bear) शामिल हैं। उभयचर (Amphibians), सरीसृप (reptiles) और विविध कीट जीवन इसकी समृद्धि में इजाफा करते हैं।
- जैव-भौगोलिक महत्व (Biogeographic significance): GHNP पैलारक्टिक (Palearctic) और इंडोमलायन (Indomalayan) क्षेत्रों के मिलन बिंदु पर स्थित है और यहां मानसून तथा पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance) दोनों का प्रभाव रहता है। यह संयोजन विविध आवास और उच्च स्थानिकता (endemism) बनाता है।
संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी
- संरक्षण: यह पार्क वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (Wildlife Protection Act 1972) द्वारा शासित है। कोर क्षेत्र के भीतर चराई और संसाधन निष्कर्षण (resource extraction) निषिद्ध है। पारिस्थितिक प्रभाव को कम करने के लिए जलविद्युत विकास और पर्यटन को विनियमित किया जाता है।
- इको-ज़ोन: बफर जोन में लगभग 160 गाँव स्थित हैं। निवासियों को इको-टूरिज्म, हस्तशिल्प उत्पादन और औषधीय पौधों की खेती में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कार्यक्रमों का उद्देश्य आजीविका में सुधार करते हुए पार्क के संसाधनों पर निर्भरता को कम करना है।
- विश्व धरोहर का दर्जा: यूनेस्को ने 2014 में GHNP को इसके उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य के लिए मान्यता दी। चल रही प्रबंधन योजनाएं आवास संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और सामुदायिक शिक्षा पर केंद्रित हैं।
महत्व
GHNP उच्च-ऊंचाई वाले पारिस्थितिक तंत्रों (high-altitude ecosystems) की रक्षा करता है जो जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हैं। इसकी नदियाँ बहाव के नीचे के लाखों लोगों को पानी उपलब्ध कराती हैं, और इसकी जैव विविधता इसे आनुवंशिक संसाधनों का एक महत्वपूर्ण भंडार (reservoir) बनाती है। यहां संरक्षण के प्रयास मानव कल्याण के साथ पारिस्थितिक अखंडता को संतुलित करने के लिए सबक प्रदान करते हैं।