चर्चा में क्यों?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (Ministry of New and Renewable Energy) ने 17 जून 2026 को भारत का ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल (Green Hydrogen Certification Portal) लॉन्च किया। यह पोर्टल, हरित हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (Green Hydrogen Certification Scheme - GHCS) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि "हरित" (green) के रूप में उत्पादित और बेचा जाने वाला हाइड्रोजन सत्यापित पर्यावरणीय मानकों (verified environmental standards) को पूरा करता है।
पृष्ठभूमि
2023 में घोषित भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) का उद्देश्य देश को हरित हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र (global hub) बनाना है। नवोदित बाजार (nascent market) में विश्वास पैदा करने के लिए, सरकार ने एक प्रमाणन प्रणाली (certification system) शुरू की है जो हाइड्रोजन उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट (carbon footprint) की पुष्टि करती है। इलेक्ट्रोलिसिस (electrolysis) या बायोमास रूपांतरण (biomass conversion) के माध्यम से अक्षय ऊर्जा (renewable energy) से उत्पादित हाइड्रोजन को हरित के रूप में योग्य माना जा सकता है यदि इसका गैर-बायोजेनिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन बारह महीनों के औसत पर, 2 किलो CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन से अधिक न हो।
प्रमाणन योजना की मुख्य विशेषताएं
- प्रमाणन के प्रकार: चार प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं: संकल्पना (Concept), सुविधा-स्तर (Facility-Level), अनंतिम (Provisional) और अंतिम (Final)। संकल्पना और सुविधा-स्तरीय प्रमाणपत्र डिजाइन और तैयारी का आकलन करते हैं; अनंतिम और अंतिम प्रमाण पत्र उत्पादन के दौरान वास्तविक उत्सर्जन का मूल्यांकन करते हैं।
- स्वतंत्र सत्यापन: उत्पादकों को अपने उत्सर्जन का ऑडिट करने के लिए ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) द्वारा मान्यता प्राप्त कार्बन सत्यापन एजेंसियों (Accredited Carbon Verification agencies) को नियुक्त करना होगा।
- योग्य रास्ते (Eligible pathways): केवल अक्षय बिजली (renewable electricity) का उपयोग करके इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से या बायोमास रूपांतरण के माध्यम से उत्पादित हाइड्रोजन प्रमाणीकरण के लिए पात्र है।
- कार्बन क्रेडिट: प्रमाणित हरित हाइड्रोजन उत्पादक भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (Carbon Credit Trading Scheme) के तहत कार्बन क्रेडिट तक पहुंच सकते हैं, बशर्ते वे अतिरिक्त आवश्यकताओं को पूरा करते हों।
- नीतिगत गति (Policy momentum): केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कई राज्यों ने हरित हाइड्रोजन नीतियों को पेश या एकीकृत किया है और कंपनियों को इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण (electrolyser manufacturing) और हाइड्रोजन आपूर्ति अनुबंधों (hydrogen supply contracts) के लिए प्रोत्साहन (incentives) दिए गए हैं।
महत्व
- बाजार की अखंडता (Market integrity): प्रमाणन पारदर्शिता सुनिश्चित करता है और ग्रीनवॉशिंग (greenwashing) को रोकता है, जिससे निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए विश्वास पैदा होता है।
- उत्सर्जन में कमी: स्पष्ट उत्सर्जन सीमाएँ (emission thresholds) निर्धारित करके, यह योजना भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों (decarbonisation goals) का समर्थन करती है और अक्षय ऊर्जा को अपनाने को प्रोत्साहित करती है।
- औद्योगिक विकास: इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण और हाइड्रोजन उपयोग के लिए प्रोत्साहन स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में रोजगार और तकनीकी उन्नति का वादा करते हैं।
निष्कर्ष
हरित हाइड्रोजन प्रमाणन योजना भारत को स्वच्छ-ईंधन प्रशासन (clean-fuel governance) में सबसे आगे रखती है। प्रमाणन को उत्सर्जन मानकों और कार्बन क्रेडिट से जोड़कर, सरकार का उद्देश्य एक पारदर्शी बाजार (transparent market) विकसित करना और हरित हाइड्रोजन बुनियादी ढांचे में निवेश में तेजी लाना है।