History

Guru Tegh Bahadur: नौवें सिख गुरु, हिंद दी चादर और धार्मिक स्वतंत्रता

Guru Tegh Bahadur: नौवें सिख गुरु, हिंद दी चादर और धार्मिक स्वतंत्रता

चर्चा में क्यों?

दुनिया भर के सिखों ने 7 अप्रैल 2026 (नानकशाही कैलेंडर में 25 चेत) को गुरु तेग बहादुर की जयंती, प्रकाश पुरब (Parkash Purab) मनाई। भारत के प्रधान मंत्री ने गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित की, धार्मिक स्वतंत्रता (religious freedom) के लिए उनकी निडरता (fearlessness) और बलिदान (sacrifice) की सराहना की।

पृष्ठभूमि

गुरु तेग बहादुर (1621-1675) का जन्म अमृतसर में छठे सिख गुरु, गुरु हरगोबिंद के यहाँ त्यागा मल के रूप में हुआ था। उन्होंने युद्ध में वीरता का प्रदर्शन करने के बाद "तेग बहादुर" की उपाधि प्राप्त की, जिसका अर्थ है "बहादुर तलवारबाज" (brave swordsman)। 1664 में वे अपने भतीजे गुरु हर कृष्ण के उत्तराधिकारी बनकर नौवें सिख गुरु बने। उन्होंने आनंदपुर साहिब (Anandpur Sahib) शहर की स्थापना की और गुरु ग्रंथ साहिब (Guru Granth Sahib) में 116 भजनों का योगदान दिया, जिसमें वैराग्य (detachment), विनम्रता और सेवा पर जोर दिया गया था।

जीवन और विरासत

  • आध्यात्मिक नेतृत्व (Spiritual leadership): गुरु तेग बहादुर ने व्यापक रूप से यात्रा की, समानता और भगवान की भक्ति का प्रचार किया। उन्होंने सिखों से ईमानदारी से जीने, जरूरतमंदों की मदद करने और प्रतिकूल परिस्थिति (adversity) में अखंडता (integrity) बनाए रखने का आग्रह किया।
  • धार्मिक स्वतंत्रता के चैंपियन: मुगल सम्राट औरंगजेब के शासन के दौरान, हिंदुओं और सिखों को इस्लाम में परिवर्तित होने के दबाव का सामना करना पड़ा। जब कश्मीरी पंडितों ने उनसे सुरक्षा मांगी, तो गुरु तेग बहादुर ने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया और खुद को एक बलिदान के रूप में पेश किया। 11 नवंबर 1675 को दिल्ली में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया, प्रताड़ित (tortured) किया गया और सिर कलम कर दिया गया।
  • शहादत और प्रभाव: उनके निष्पादन (execution) ने उपमहाद्वीप को चौंका दिया और सिखों को धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरित किया। उन्हें मजलूमों की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान करने के लिए हिंद दी चादर (Hind di Chadar), "भारत की ढाल" (Shield of India) के रूप में सम्मानित किया जाता है।
  • उत्तराधिकार (Succession): अपनी गिरफ्तारी से पहले, उन्होंने अपने छोटे बेटे गोबिंद राय-बाद में गुरु गोबिंद सिंह-को दसवें गुरु के रूप में नियुक्त किया। गुरु गोबिंद सिंह ने अंततः 1699 में खालसा (Khalsa) की स्थापना की, जो सिख पहचान को संस्थागत (institutionalising) करता है।

स्मरणोत्सव (Commemorations)

प्रकाश पुरब गुरु के जन्म और शिक्षाओं का जश्न मनाता है, जबकि उनकी शहादत को दिसंबर में शहीदी दिवस (Shaheedi Diwas) के रूप में मनाया जाता है। भारत और विदेशों में गुरुद्वारे इन अवसरों को चिह्नित करने के लिए कीर्तन, जुलूस (processions) और सामुदायिक रसोई (लंगर) आयोजित करते हैं। राजनीतिक नेता अक्सर सांप्रदायिक सद्भाव (communal harmony) को बढ़ावा देने के लिए उनकी विरासत का आह्वान करते हैं।

स्रोत: Encyclopaedia Britannica, Prime Minister’s Office, SikhNet

Sign in Today’s news
Current affairs Daily news Daily quiz News Blitz Shorts Economic Survey 2025-26 Subjects
Polity Economy Geography Environment History Science & Tech Intl. Relations Internal Security Art & Culture Social Issues
All subjects Exam info UPSC Syllabus Prelims syllabus Mains syllabus Exam pattern Eligibility & attempts OBC & EWS checker Resources How to prepare for UPSC Prepare with a job Free downloads Books & NCERTs Previous year papers Video notes YouTube channel